कहा, बंगाल में 45 दिन में एक्शन, BSF-SSB को मिली 1,129 एकड़ जमीन; अमित शाह ने बताया कैसे मजबूत होगी सीमा सुरक्षा?
-'साहिबा तो आती नहीं थीं,आप आ गए', गृह मंत्री
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को एसएसबी मुख्यालय रानीडांगा में कहा कि जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत सुरक्षित रह सकता है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर इशारा करते हुए कहा कि 'साहिबा तो आती नहीं थीं,आप आ गए', गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में आयोजित कार्यक्रम में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने बिस्मिल्लाह खान और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद 80वें स्वतंत्रता दिवस, वंदे मातरम्, विकसित भारत के लक्ष्य और सीमा सुरक्षा बलों के साथ राजनीतिक दलों के रिश्ते पर बात की। लेकिन उनके भाषण में एक लाइन बहुत खास रहा। 'साहिबा तो आती नहीं थीं, आप आ गए', तो आइए जानते हैं कि क्या है इसके मायने। शाह ने कहा कि उनके कई बार अनुरोध करने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई। इस मौके पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और सांसद राजू विष्ट भी मौजूद रहे। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जब तक घुसपैठ पर पूरी तरह रोक नहीं लगती, तब तक पश्चिम बंगाल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि घुसपैठ रुकना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना न तो पश्चिम बंगाल सुरक्षित होगा और न ही भारत। सशस्त्र सीमा बल के जवानों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने सीमा सुरक्षा और घुसपैठ रोकने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक और सीमाई सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी में SSB के कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और कल्याण सिंह को याद करने के बाद वंदे मातरम्, स्वतंत्रता दिवस और विकसित भारत की बात की. हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उस टिप्पणी पर रही, जिसमें उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री को लेकर कहा कि हमने आपको बुलाया, आप आ गए, साहिबा तो आती नहीं थीं. इसके साथ शाह ने सीमा सुरक्षा और जवानों के साथ राजनीतिक दलों के रिश्ते पर भी अपनी बात रखी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर ही सुवेंदु जी ने BSF और SSB को 1,129 एकड़ जमीन दी है। काम में यह तेजी इसलिए नहीं है कि वह भाजपा के मुख्यमंत्री हैं। वह समझते हैं कि जब तक घुसपैठ नहीं रुकेगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल सुरक्षित है और न ही भारत। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे। यहां उन्होंने सीमा सुरक्षा बल के जवानों को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल में बीएसएफ और एसएसबी को 1,129 एकड़ जमीन दिए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर यह कदम उठाया गया और इसकी वजह BJP सरकार होना नहीं, बल्कि घुसपैठ के खतरे को समझना है। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि घुसपैठ पर रोक लगाए बिना न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सकता है।इसके बाद शाह ने मुद्दा सीमा सुरक्षा की तरफ मोड़ दिया. उन्होंने कहा कि SSB और BSF किसी राजनीतिक दल या किसी एक सरकार की एजेंसी नहीं हैं. ये ऐसे बल हैं, जो तपस्या और मेहनत करके देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।शाह ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को जवानों के साथ आत्मीय रिश्ता रखना चाहिए। सरकार बंगाल में हो या केंद्र में, जवानों के सम्मान और उनके साथ संबंध को पार्टी की राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए।
‘तेजी की वजह BJP सरकार होना नहीं’: गृह मंत्री ने कहा कि इस काम में दिखाई जा रही तेजी की वजह केवल यह नहीं है कि राज्य में BJP की सरकार है। उनके मुताबिक, इसके पीछे घुसपैठ के खतरे को लेकर गंभीर समझ और उसे रोकने की प्रतिबद्धता है।भाषण में शाह ने 80वें स्वतंत्रता दिवस को भी याद किया. उन्होंने कहा कि आजादी के 80 साल बाद लाल किले से पूर्ण रूप से वंदे मातरम् का गान देश और दुनिया ने सुना. उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को आजादी के आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि इसने आंदोलन को गति देने के साथ आजाद भारत के लिए एक दिशा भी दी. शाह के मुताबिक आजादी के बाद वंदे मातरम् को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया. संसद में इसका गान होता रहा और लोग खड़े भी होते थे, लेकिन पूरा गान न होने का दुख उनके जैसे कई लोगों के मन में था.
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स्कूलों में पूरा गान कराने का फैसला
शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने संसद में विधेयक पारित कराया और पूरे वंदे मातरम् कार्यक्रम को सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा बनाने का फैसला किया. उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया. उनका कहना था कि इससे बच्चों, किशोरों और युवाओं तक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का संदेश पहुंचेगा. स्कूलों में पूरा वंदे मातरम् गाने से बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना मजबूत होगी. यानी शाह ने इस मुद्दे को सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत नहीं, बल्कि नई पीढ़ी से जोड़कर भी पेश किया.
2047 के लिए सात स्तंभों का जिक्र
शाह ने भाषण में भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से बताए गए सात स्तंभ गिनाए. इनमें मैन्युफैक्चरिंग पावर, रक्षा शक्ति, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, भारत का सॉफ्ट पावर और भारत गतिशक्ति के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं. इसके अलावा तीन साल में 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर और आठ नए सेमीकंडक्टर यूनिट्स पूरे करने का संकल्प बताया गया. शाह ने कहा कि आजादी की शताब्दी तक इन आधारों पर भारत को हर क्षेत्र में दुनिया में सबसे आगे ले जाने का लक्ष्य है.
बिस्मिल्लाह खान और कल्याण सिंह को याद किया
भाषण के शुरुआती हिस्से में शाह ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बिस्मिल्लाह खान को भारतीय संगीत को दुनिया तक पहुंचाने वाला महान कलाकार बताया. शाह ने उनसे अपनी मुलाकात भी याद की और कहा कि गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद संगीत की चर्चा होते ही उनके चेहरे पर उत्साह आ जाता था. कल्याण सिंह को याद करते हुए शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने राज्य को प्रशासनिक रूप से पुनर्गठित करने का प्रयास किया. राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका का जिक्र करते हुए शाह ने उन्हें योद्धा और सफल सेनानी बताया. उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी। शाह के पूरे भाषण को देखें तो अमित शाह ने अलग-अलग मुद्दों को एक ही मंच पर जोड़ा। शुरुआत में उन्होंने दो प्रमुख हस्तियों को याद किया। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस और वंदे मातरम् के जरिए राष्ट्रवाद की बात की। फिर विकसित भारत के लिए सात स्तंभों का जिक्र किया। अंत में सीमा सुरक्षा और जवानों के साथ राजनीतिक दलों के रिश्ते पर जोर दिया। इसी बीच आया “साहिबा तो आती नहीं थीं” यह लाइन ममता बनर्जी पर तंज था। जो केंद्र सरकार के कार्यक्रम में नहीं आती थीं।
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