- मिल रहे चौंकाने वाले आंकड़े, तिब्बत में दो हजार फीट चौड़ा ग्लेशियर टूटा, नदी में आई 100 मीटर ऊंची बाढ़
नेपाल बोर्डर से अशोक झा: जब प्राकृतिक आपदा आती है तो वह सिर्फ उसी देश को तबाह और बर्बाद नहीं करता बल्कि कई और देशों को प्रभावित करता है। ऐसा ही कुछ हुआ है नेपाल में आई प्राकृतिक जल प्रलय ने। नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ के बाद देश में हालात भयावह हैं। कई इलाके पूरी तरह मलबे में दबे हुए हैं। नेपाल सरकार के अनुसार, भूकंप के कुछ ही मिनट बाद बाढ़ आई। इस त्रासदी में भारत के कई राज्यों के नागरिक प्रभावित हुए हैं।नेपाल में अचानक आए भीषण बाढ़ के बाद भारत के कई राज्यों के लोग वहां फंस गए हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी बाढ़ के बाद लापता बताया जा रहा है। वहीं, केरल के 37 पर्यटक नेपाल में फंसे हैं, जबकि कर्नाटक समेत कई राज्यों की सरकारों ने अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं। इसके बाद राज्यों ने अपने नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू की है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह स्थानीय समय के अनुसार 8.37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट यानी हिमनद झील फटने की घटना हुई हो, जिससे अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया। इस बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। सड़कें और पुल बह गए हैं, घरों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है तथा कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में संचार और आवागमन की व्यवस्था ठप होने के कारण प्रशासन के लिए लोगों की सही स्थिति और संख्या का पता लगाना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कोलकाता का 32 सदस्यीय दल संपर्क से बाहर: कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हो गया। दल में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल हैं। यह दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, दल बुधवार सुबह करीब 8.30 बजे रसुवागढ़ी पहुंचा था। यहां उसे नेपाल-तिब्बत सीमा पार कर तिब्बत जाना था। दल के सदस्य इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी इलाके में अचानक बाढ़ आ गई। बाढ़ आने के बाद से दल के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बुरी तरह बाधित है और मौके तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल है। टूर एजेंसी के प्रतिनिधि दिव्य ज्योति बसु ने बताया कि दल के दोनों मैनेजर जयंत सान्याल और नृपेन सरकार के मोबाइल में रोमिंग की सुविधा थी। उनसे आखिरी बार सुबह करीब 8 बजे संपर्क हुआ था। कुछ पर्यटकों ने इसी दौरान फेसबुक पर लाइव भी किया था। इसके बाद सभी से संपर्क टूट गया। टूर एजेंसी के मुताबिक, नेपाल में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी ने प्रभावित इलाके में एक हेलीकॉप्टर भी भेजा है।पश्चिम बंगाल सरकार ने हेल्पलाइन शुरू की: पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि वह नेपाल में फंसे राज्य के पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, कामगारों और कारोबारियों की स्थिति पर नजर रख रही है। राज्य सरकार भारतीय दूतावास और नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के कुछ लोग भी नेपाल में फंसे या लापता बताए जा रहे हैं। परिजनों की मदद के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। लोग 033-24793311 और 9147890181 पर संपर्क कर सकते हैं। कोलकाता पुलिस की ओर से 18003455678 और व्हाट्सऐप नंबर 9874902880 भी जारी किया गया है।
केरल के 37 पर्यटक सुरक्षित, नेपाल में फंसे:केरल के कन्नूर जिले के पय्यानूर विधानसभा क्षेत्र के 37 लोग भी नेपाल में फंसे हुए हैं। पय्यानूर के विधायक वी. कुन्हीकृष्णन ने बताया कि ये सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन बाढ़ के कारण आगे की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं और नेपाल से वापस भी नहीं लौट सकते। विधायक के अनुसार, उन्होंने सभी 37 पर्यटकों के मौजूदा स्थान और फोन नंबर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के कार्यालय को उपलब्ध करा दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया है। विधायक ने कहा कि सभी पर्यटकों से बात हो चुकी है और उनके परिवारों को भी जानकारी दे दी गई है। इसलिए परिजनों को घबराने की जरूरत नहीं है। केरल सरकार ने भी पर्यटकों और उनके परिजनों की मदद के लिए 9447111844 और 9737132147 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
कर्नाटक ने भी लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की कर्नाटक सरकार ने नेपाल और तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में फंसे राज्य के लोगों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग टूर ऑपरेटरों, परिजनों और फंसे हुए लोगों से उनकी जानकारी साझा करने को कह रहा है, ताकि बचाव और सुरक्षित निकासी के लिए केंद्र सरकार और भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय किया जा सके।
कर्नाटक के लोग 1070 या 080-22253707 पर राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। कई राज्यों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल की बाढ़ के बाद कई राज्यों ने अपने नागरिकों की मदद के लिए नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन शुरू की हैं।उत्तर प्रदेश: 1070
महाराष्ट्र: 1070 और +91-9321587143
तेलंगाना: 9871999044, 9949351270 और 9618597969
राजस्थान: 1070, 112 और 0141-2851960, 0141-2385776, 0141-2385777, 0141-2227296, 0141-2927392, 0141-2227603
ओडिशा: 011-23012807, 7428135044 और 8527580245
सिक्किम: 03592201145, 03592202461 और 03592202256
भारत के नेपाल स्थित दूतावास ने भी प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 नंबर जारी किए हैं। ये नंबर व्हाट्सऐप पर भी उपलब्ध हैं। सवाल क्या भूकंप से टूटा ग्लेशियर... 3 मिनट बाद सबकुछ तबाह : नेपाल में यह आपदा ग्लेशियर का लगभग 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर निचली नदी घाटी में गिरने से आई। सैटेलाइट चित्रों के अध्ययन के बाद कैलगरी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक डेनियल शुगर ने बताया कि भूतल से 17,000 फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का करीब 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा पूरी तरह से अलग हो गया। यह विशाल हिमखंड 4,000 फीट नीचे गिरा। भारी ऊंचाई से इतना बड़ा हिमखंड गिरने से ल्हेंडे खोला नदी में प्रचंड सैलाब उठा, जो भोटेकोशी नदी में पहुंचा। इस तेज बहाव ने निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई।'100 मीटर ऊंची लहर ने पल भर में सबकुछ तबाह किया': नेपाल के काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि जब वह बाहर भागे तो उन्होंने ऊपर की ओर से धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार को तिमुरे बाजार की ओर तेजी से आते देखा। उन्होंने कहा, 'बाढ़ करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह उठती हुई बाजार में घुसी और कुछ ही पलों में पूरा बाजार बह गया'।
कंक्रीट के 22 पुल, 42 किमी सड़क भी बही: काठमांडू से 125 किमी दूर रसुवा व धाडिंग के अलावा नुवाकोट भी बुरी तरह प्रभावित है। नेपाल के समाचार पत्र कांतिपुर के अनुसार, एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे बिजली का संकट भी पैदा हो गया है। रसुवा, नुवाकोट व धाडिंग के अलग-अलग इलाकों में कंक्रीट के 22 पुल और पांच बेली पुल बह गए। तेजी से आई बाढ़ में 42 किमी सड़क भी बह गई। सैलाब के बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट जिलों में फैल गया। सरकार ने रसुवा, नुवाकोट व धाडिंग को तीन माह के लिए आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। इलाज से लेकर अन्य सुविधाओं तक तत्काल कदम उठाए जाएंगे।
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