- ऊंची कस्टम ड्यूटी के कारण अनऑफिशियल रास्तों से तस्करी बढ़ी
- सोना पर ड्यूटी 15% से घटाकर 6% करने पर विचार कर सकती है केंद्र सरकार
- भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से बढ़े सोने की तस्करी
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स के लिए सोने की तस्करी का एक प्रमुख ट्रांजिट हब बन चुका है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरे होने और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के प्रवेश द्वार होने के कारण यह संकरा गलियारा तस्करों के लिए अत्यधिक संवेदनशील और सुगम रूट बन गया है। तस्करी के इस नेटवर्क, रूट और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: तस्करी का मुख्य मार्ग और नया ट्रेंड चीन और म्यांमार कनेक्शन: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, भारी मात्रा में विदेशी मार्किंग वाला सोना चीन और म्यांमार की सीमाओं से भारत में प्रवेश करता है।म्यांमार सीमा के तामू-मोरे (मणिपुर) और ज़ोखावथार (मिजोरम) रूट से यह सोना पूर्वोत्तर भारत में आता है। सिलीगुड़ी (चिकन नेक) का इस्तेमाल: पूर्वोत्तर में प्रवेश करने के बाद, राष्ट्रीय राजमार्गों और ट्रेनों के जरिए इस सोने को सिलीगुड़ी लाया जाता है। चूंकि सिलीगुड़ी से देश के अन्य बड़े शहरों (जैसे कोलकाता, दिल्ली, मुंबई) के लिए कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है, इसलिए इसे मुख्य वितरण केंद्र बनाया गया है। नेपाल और बांग्लादेश सीमा: हालिया खुफिया रिपोर्टों से पता चला है कि नेपाल सीमा के पास चिकन नेक कॉरिडोर के मुहाने पर (जैसे किशनगंज और सिलीगुड़ी के आसपास) सोने की भारी आवाजाही देखी गई है। बांग्लादेश सीमा के पोरस (कच्चे और नदी वाले) रास्तों का इस्तेमाल भी सोने की सिल्लियां छिपाकर लाने के लिए किया जाता है। सोने को छिपाने और परिवहन के तरीके: तस्कर हर बार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए नए और अनोखे तरीके अपनाते हैं। वाहनों में गुप्त कैविटी: कारों, ट्रकों और दुपहिया वाहनों के अंदर विशेष रूप से नकली खांचे बनाए जाते हैं, जिनमें सोने के बिस्कुट छिपाए जाते हैं। विशेष बेल्ट और कपड़े: तस्कर अपनी कमर या कपड़ों के नीचे विशेष रूप से सिलवाई गई बेल्ट में सोना बांधकर ले जाते हैं। जमीन में छिपाना: भारत-बांग्लादेश सीमा के पास कई मामलों में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने जंगली और ग्रामीण इलाकों में जमीन के नीचे गड्ढों में छिपाया हुआ सोना भी बरामद किया है। सुरक्षा एजेंसियों की हालिया कार्रवाई और बड़ी बरामदगी करोड़ों का सोना जब्त: राजस्व खुफिया निदेशालय और सीमा सुरक्षा बल ने पिछले कुछ समय में सिलीगुड़ी और बंगाल -बांग्लादेश सीमा से सैकड़ों किलोग्राम अंतरराष्ट्रीय सोना जब्त किया है, जिसकी कीमत अरबों रुपये है।अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़: एजेंसियों ने हाल ही में ऐसे बड़े गिरोहों को पकड़ा है जिनके तार दिल्ली, कोलकाता और महाराष्ट्र के बड़े सर्राफा व्यापारियों से जुड़े थे। सरकार और सुरक्षा बलों का कड़ा रुख: चिकन नेक भारत का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सैन्य चोकपॉइंट है। यहां सोने की तस्करी केवल राजस्व का नुकसान नहीं है, बल्कि इसके जरिए होने वाली टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'ट्रायंगुलर सिक्यूरिटी ग्रिड' तैयार किया है, जो चोपड़ा, किशनगंज और धुबरी को आपस में जोड़ता है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बचे हुए खुले हिस्सों को पूरी तरह सील करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में BSF को बड़े पैमाने पर जमीन हस्तांतरित की है ताकि फेंसिंग, लेजर वॉल और अत्याधुनिक थर्मल कैमरे लगाए जा सकें।इसका असर सिर्फ गोल्ड ट्रेड पर ही नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व और संगठित ज्वेलरी कारोबार पर भी पड़ सकता है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद बदला बाजार का माहौल: सरकार ने 13 मई को सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी। इसके अलावा सोने पर 3 प्रतिशत जीएसटी भी लागू है। यानी कानूनी तरीके से आयात किए गए सोने पर कुल टैक्स का बोझ करीब 18 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।यही टैक्स अंतर अब ग्रे मार्केट के लिए सबसे बड़ा अवसर बन गया है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि कानूनी और अवैध कारोबार के बीच बढ़ा यह अंतर तस्करी को फिर से बढ़ावा दे रहा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान संगठित कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें नियमों के तहत कारोबार करना पड़ता है। जब्ती के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: ड्यूटी बढ़ने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई में भी तेजी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 13 मई से 30 जून के बीच 160.91 किलोग्राम सोना जब्त किया गया। इससे पहले 1 अप्रैल से 12 मई के बीच 86.16 किलोग्राम सोना पकड़ा गया था।यानी ड्यूटी बढ़ने के बाद जब्त किए गए सोने की मात्रा लगभग दोगुनी हो गई. यह संकेत देता है कि अवैध सप्लाई चैन दोबारा सक्रिय होती दिखाई दे रही है।
सोने-चांदी के व्यापारियों और ज्वैलर्स समेत इंडस्ट्री के प्रतिनिधि ड्यूटी को मौजूदा 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी करने की मांग : केंद्र सरकार सोने-चांदी के आयात शुल्क में कटौती पर विचार कर रही है। ऊंची कस्टम ड्यूटी के कारण अनऑफिशियल रास्तों से तस्करी बढ़ी है। सरकार इसे रोकना चाहती है। मकसद ड्यूटी की दरें घटाकर तस्करी को हतोत्साहित करना है। साथ ही व्यापारियों को लीगल चैनलों के जरिए आधिकारिक आयात के लिए बढ़ावा देना है ताकि सरकार को रेवेन्यू का नुकसान न हो। मनीकंट्रोल ने तीन सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि अभी ड्यूटी कम करने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन, सरकार का एक गुट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ड्यूटी कम करने से सोने की तस्करी कम हो सकती है, क्या औपचारिक तरीकों से ज्यादा इंपोर्ट को बढ़ावा मिल सकता है?
ड्यूटी 15% से घटाकर 6% करने की मांग: सूत्रों के मुताबिक, सोने-चांदी के व्यापारियों और ज्वैलर्स समेत इंडस्ट्री के प्रतिनिधि ड्यूटी को मौजूदा 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं।सोने के इंपोर्ट को कम करने और देश के डॉलर रिजर्व को बचाने के मकसद से 13 मई, 2026 को ड्यूटी बढ़ाई गई थी। कम ड्यूटी से क्या फर्क पड़ेगा?
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि कम ड्यूटी से कानूनी तौर पर इंपोर्ट किए गए सोने और अनौपचारिक तरीकों से देश में लाए गए सोने की कीमत के बीच का अंतर कम हो सकता है। इससे तस्करी के लिए प्रोत्साहन कम हो सकता है। ड्यूटी की दर ऊंची होने से टैक्स चोरी और तस्करी का मुनाफा बढ़ जाता है। इससे ब्लैक मार्केट को बढ़ावा मिलता है। जब सोना-चांदी स्मगलिंग से आता है तो सरकार को उस पर मिलने वाला पूरा कस्टम ड्यूटी टैक्स शून्य हो जाता है।
सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक है भारत:भारत सोने के सबसे बड़े इंपोर्टर्स में से एक है। हर साल यह लगभग 700-800 टन सोना इंपोर्ट करता है। भारत यूएई, थाईलैंड या सिंगापुर जैसे देशों को सोने के गहने भी एक्सपोर्ट करता है।ड्यूटी बढ़ने से पहले अप्रैल 2026 में सोने का इंपोर्ट सालाना आधार पर लगभग 82 फीसदी ऊपर गया था। इंपोर्ट में यह उछाल चिंता का विषय था। कारण है कि ज्यादा इंपोर्ट से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ता है। इससे रुपये पर भी दबाव पड़ता है। मई के मध्य तक रुपया पहले ही साल-दर-साल 6 फीसदी से ज्यादा गिर चुका था। इसके पीछे सरकार की ओर से सोने पर ड्यूटी बढ़ाना कई कारणों में से एक था। ड्यूटी बढ़ने से तस्करी में आया उछाल: मई में सोने का इंपोर्ट करीब 34 फीसदी बढ़ा, जबकि उस महीने में ज्यादा ड्यूटी केवल आधे महीने के लिए लागू थी। ड्यूटी बढ़ने के बाद पहले दो पूरे महीनों में सोने का इंपोर्ट 5.5 फीसदी बढ़कर जून और जुलाई में 6.13 अरब डॉलर हो गया। यह एक साल पहले इसी अवधि में 5.81 अरब डॉलर था। इंडस्ट्री के एक सूत्र के अनुसार, कीमती धातुओं पर ड्यूटी बढ़ने से तस्करी में काफी उछाल आया। उन्होंने कहा, 'सरकार डॉलर बचाना चाहती है। लेकिन, पैरेलल इकॉनमी (समानांतर अर्थव्यवस्था) के जरिए बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जा रहे थे। टैक्स में बदलाव से बस यह बदला है कि कानूनी तौर पर कितना सोना आयात किया गया। 'समय और दायरा अभी तय नहीं: माना जा रहा है कि केंद्र सरकार चांदी और प्लेटिनम के मामले में भी इस मुद्दे पर विचार कर रही है। कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, इंडस्ट्री के एक अन्य सूत्र ने कहा कि किसी भी संभावित बदलाव का स्वरूप, समय और दायरा अभी तय नहीं है। सोने की तरह ही चांदी और प्लेटिनम की भी 'सेफ-हेवन' के तौर पर मांग रहती है। लेकिन, साथ ही अलग-अलग सेक्टर में इनका बड़े पैमाने पर औद्योगिक इस्तेमाल भी होता है। जहां चांदी का इस्तेमाल सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक अहम कम्पोनेंट के तौर पर होता है। वहीं, प्लेटिनम का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल और हेल्थकेयर सेक्टर में किया जाता है। लिहाजा, जहां ज्यादा आयात शुल्क देश के विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करता है। वहीं, इससे इंडस्ट्रियल इनपुट की लागत भी बढ़ जाती है।
#चिकननेक
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