कहा, जेएनयू और उस्मानिया के बाद अब जाधवपुर की बारी
- किशनजी कौन हैं? उन्होंने चुनाव के बहिष्कार का किया था आह्वान
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी में लगे 'आजादी' के नारों पर एक बार फिर से अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने ऐसे छात्रों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह सरकारी यूनिवर्सिटी के कैंपस में माओवादी, फिलिस्तीन के समर्थकों और कश्मीर की आजादी चाहने वाले लोगों के लिए खुली जगह नहीं बनने देंगे। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी में इस तरह के नारे लगाने वालों को सख्त हिदायत दी थी। शुक्रवार को रक्षाबंधन के मौके पर जाधवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारी ने ऐसे नारों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "आप लोग 'आजादी-आजादी' कहते रहते हैं। कैसी आजादी चाहिए आपको? हेरोइन और गांजा पीने की आजादी? आप लोग 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' हैं।"
ऑपरेशन सिंदूर चलाया जाता है, तो ऐसे लोग युद्ध विरोधी रैलियां निकालते हैं- सीएम अधिकारी
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अधिकारी ने कहा कि जाधवपुर यूनिवर्सिटी बेहतर सम्मान की हकदार है। उन्होंने कहा, "जब अवंतीपोरा में आतंकवादी CRPF के 45 जवानों की हत्या कर देते हैं या पहलगाम में किसी खास धर्म के पर्यटकों को गोली मार दी जाती है, तब आप न तो दुख जताते हैं और न ही कोई रैली करते हैं। लेकिन जब पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया जाता है, तो युद्ध-विरोधी रैलियां की जाती हैं।"
मुख्यमंत्री अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पता है कि यह कौनसी बीमारी है और वह इसकी दवा को भी अच्छे से जानते हैं।
JNU और उस्मानिया के बाद अब जाधवपुर की बारी है:
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूरे देश के एबीवीपी के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जेएनयू और उस्मानिया यूनिवर्सिटी को ठीक कर दिया गया है। अब जाधवपुर की बारी है। उन्होंने कहा, "मेरे पास देश के सभी ABVP कार्यकर्ताओं के लिए संदेश है। आपने दिल्ली की जेएनयू और हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी को सुधार दिया है। अब जाधवपुर की बारी है। यह भी पूरा हो जाएगा। राष्ट्रवाद का एक तूफान उठ खड़ा हुआ है, वह नहीं रोका जा सकता।
"अब हिसाब-किताब बराबर करने का समय आ गया है- सीएम अधिकारी:मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस एनकाउंटर में मारे गए माओवादी नेता कोटेस्वर राव उर्फ किशनजी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "अब हिसाब-किताब करने का समय आ गया है या तो वे रहेंगे या हम रहेंगे। मेरी बात ध्यान से सुनें। आप कहते हैं 'कश्मीर मांगे आजादी'। मैं कहता हूं कि हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर कब्जा करेंगे।"सीएम ने कहा, "यूनिवर्सिटी के आर्ट्स डिपार्टमेंट के हॉस्टल की दीवार पर एक पोस्टर लगा है जिस पर लिखा है, 'रेड सैल्यूट किशनजी'। किशनजी कौन हैं? उन्होंने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया था। वह गोमती से गोराबारी नदियों तक फैला एक अलग राज्य चाहते थे। अपने 'फ्री फिलिस्तीन' (आजाद फिलिस्तीन) के नारे को 'फ्री PoK' के नारे से बदलें।"
क्या है मामला?: बता दे, यह पूरा मामला जाधवपुर यूनिवर्सिटी में भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और लेफ्ट के छात्रों के बीच हुए विवाद से जुड़ा हुआ है। 20 अगस्त को दोनों संगठनों के बीच में झड़प हुई थी। इसके बाद दोनों ही संगठनों ने एक दूसरे पर तोड़फोड़ और मारपीट किए जाने के आरोप लगाए। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स के मुताबिक विवाद के बाद एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने कैंपस में घुसने की कोशिश की। इसी दौरान यूनिवर्सिटी के गेट पर लगा लकड़ी का प्रतीक चिन्ह भी टूट गया।
CPI(M) के स्टूडेंट विंग, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आरोप लगाया कि ABVP के सदस्यों ने हिंसा करने के लिए बाहरी लोगों को बुलाया था। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन (AIDSO) ने भी यही आरोप लगाया। यूनिवर्सिटी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।ABVP क्या बोली?
इस पूरे मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से कहा गया है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) के सीनियर पदाधिकारियों ने JU के लोगो को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची थी। इस मामले को लेकर संगठन ने पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है।
ABVP की शिकायत को लेकर भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में जो कुछ भी हो रहा है। उच्च शिक्षा विभाग इस पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, "मैं भी इस पर नजर रखे हुए हूं। देखता हूं इन उपद्रवियों को JUTA के नेता कब तक बचा पाते हैं। हम ड्रोन का इस्तेमाल करके पता लगाएंगे कि कैंपस के अंदर कौन कफ सिरप भेज रहा है और कौन ड्रग्स ले रहा है। मैं जानता हूं कि कचरा कैसे साफ किया जाता है।"
दरअसल, सत्ताधारी पक्ष भाजपा की तरफ से आरोप लगाए जाते रहे हैं कि यूनिवर्सिटी में माओवादी तत्वों को पनाह दी जाती रही है। यूनिवर्सिटी कैंपस में लेफ्ट संगठनों का दबदबा और लगातार राज्य में वामपंथी पार्टियों की उपस्थिति से यह दावा और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है। हालांकि, यूनिवर्सिटी की तरफ से यह साफ किया जाता रहा है कि वह केवल एक शिक्षा का केंद्र ही है। वहां पर कोई माओवादी नहीं है।
राज्य में भाजपा की सत्ता आने के बाद यूनिवर्सिटियों में भी विद्यार्थी परिषद का जोर बढ़ रहा है। फिलहाल यहां पर वह ज्यादा मजबूत नहीं है।
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