कहा,राज्य को डराने या दबाव में लेने की किसी भी कोशिश को नहीं किया जाएगा बर्दाश्त
- अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में देश को तोड़ने वाले नारों को नहीं किया जाएगा बर्दाश्त
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 'कश्मीर मांगे आजादी' जैसे किसी भी तरह के अलगाववादी गतिविधियों और उकसावे वाले नारों को लेकर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक असहमति का स्वागत है, लेकिन राष्ट्रीय अखंडता और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद दिलाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने अरबिंदो, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंगाल हमेशा से भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण और देशभक्ति का केंद्र रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार रचनात्मक आलोचना का स्वागत करती है और अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हटती, लेकिन राज्य को डराने या दबाव में लेने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने अलगाववादी मानसिकता रखने वालों को सीधे तौर पर सचेत करते हुए कहा कि राज्य में "कश्मीर मांगे आजादी" या किसी भी प्रकार के 'आजादी' के नारे लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे नारे लगाने वाले तत्वों को तुरंत गिरफ्तार कर उन पर कानूनी मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा, 'लोकतंत्र में इंकलाब जिंदाबाद जैसे राजनीतिक नारे लगाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की पूरी आजादी है। जनता को सरकार, भाजपा या उसकी छात्र शाखा (ABVP) की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में देश को तोड़ने वाले नारों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"जुलूसों में फिलिस्तीनी झंडे फहराने पर आपत्ति: राज्य में हाल ही में हुए एक धार्मिक जुलूस के दौरान कथित तौर पर फिलिस्तीनी झंडे मिलने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले ही गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और भविष्य में भी ऐसे प्रतीकों के प्रदर्शन पर पाबंदी रहेगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "आप अपने धार्मिक झंडे रखिए कोई समस्या नहीं है। यदि कोई तिरंगा लेकर निकलता है तो उसका स्वागत है। लेकिन जुलूसों में फिलिस्तीनी झंडे क्यों? आप किसे उकसाने की कोशिश कर रहे हैं?" विरासत से कोई समझौता नहीं: उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति और शासन के दो मूल स्तंभ हैं राष्ट्र प्रथम और भाजपा के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की वैचारिक विरासत। विश्वविद्यालय परिसरों की दीवारों पर मारे गए माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे नारों और "लाल सलाम" की संस्कृति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की ऐतिहासिक राष्ट्रवादी पहचान को उग्रवादी या माओवादी विचारधारा से धूमिल नहीं होने दिया जाएगा।
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