- पड़ोसी राष्ट्र बांग्लादेश में हिंदू और हिंदुस्तान के लिए रची जा रही साजिश
- अगर आप बोर्डर पर रहते है तो हमेशा रहना होगा सजग और सतर्क
- बांग्लादेश इस्लामिक नाटो में शामिल होता है तो इससे भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर बढ़ेगा खतरा
- पाक की चल रही सफल तो इससे बंगाल की खाड़ी भी भारत के लिए हो जाएगी असुरक्षित
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: तीन दिवसीय दौरे पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर को साधने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज ही रात सिलीगुड़ी पहुंच रहे है। उनके आगमन को लेकर कई लोग कई बातें कर रहे है। पर सच्चाई कुछ और है। भारत अब टू फ्रंट नहीं बल्कि थ्री-फ्रंट वॉर के लिए अपने को तैयार कर रहा है। उनके दौरा को लेकर मैने सीमा और सीमा पार से जानकारियां जुटाई जो बेहद चौंकाने वाले और सभी भारतीय नागरिकों को सजग और सतर्क रहने वाला है। जरा इस रिपोर्ट को पढ़े तो सबकुछ समझ आ जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह के दौरे का मकसद सीमा प्रबंधन और तैयारी में शामिल सुरक्षा बलों और एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है। शाह भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई पहलों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस दौरान, गृह मंत्री सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों से बातचीत करेंगे। यह बल भारत-नेपाल सीमा के 1,751 किलोमीटर और भारत-भूटान सीमा के 699 किलोमीटर हिस्से की सुरक्षा करता है। इस बातचीत से ऑपरेशन से जुड़ी चुनौतियों, सीमा प्रबंधन और इलाके में तैनात सुरक्षा बलों की तैयारियों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा। सिलीगुड़ी एक सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कॉरिडोर है, जिसे अक्सर 'चिकन नेक' कहा जाता है। इसका आकार लगभग 60 किलोमीटर गुणा 22 किलोमीटर है। यह भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसके दक्षिण और पश्चिम में बांग्लादेश, उत्तर में तिब्बत (चीन) और पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश और भूटान हैं। दक्षिण एशिया का कूटनीतिक और रणनीतिक परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है। तुर्की के समाचार पत्र येनी शफाक में आई रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्की मिलकर अपने इस्लामिक नाटो में अब बांग्लादेश को भी शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। तुर्की और पाकिस्तान भारत के पारंपरिक विरोधी रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर में तुर्किये ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था. भारत और इजरायल के खिलाफ तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले दिनों त्रि-पक्षीय रक्षा समझौता किया था. जिसमें यह प्रावधान है कि एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. अब भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और तुर्किये इसमें बांग्लादेश को भी शामिल करना चाहते हैं. जिससे भारत दोनों तरफ से घिर जाए और जिहादी शक्तियां भारत में अपने हमले शुरू कर सकें।
भारत को घेरने की सधी रणनीति:
रणनीतिकारों के मुताबिक, तुर्किये की मंशा मुस्लिम बहुल देशों का एक रणनीतिक सैन्य समूह खड़ा करने की है. ऐसा करके वह दुनिया में इस्लामी मुल्कों की चौधराहट और खुद को उसका मुखिया बनाना चाहता है. तुर्किये का मानना है कि अगर बांग्लादेश इस गुट में शामिल हो जाता है तो बंगाल की खाड़ी में भी इस इस्लामिक नाटो का दखल हो जाएगा। साथ ही, भारत को दो मोर्चों पर घेरना आसान हो जाएगा। पाकिस्तान भी इस मौके का इस्तेमाल भारत को दोनों तरफ से घेरने के लिए कर रहा है. इसमें उसे चीन का का भी परोक्ष समर्थन हासिल है, जो बंगाल की खाड़ी में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है. वहीं तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश की मौजूदा सरकार इस ऑफर को 'भारत पर निर्भरता' की पारंपरिक नीति को खत्म कर दूसरे विकल्पों पर आगे बढ़ने के रूप में देख रही है।ऐसे में पाकिस्तान, तुर्किये और बांग्लादेश के बीच उभर रही यह नई जुगलबंदी भारत के लिए खतरे बढ़ा रही है। असल में भारत अब तक पश्चिमी मोर्चे (पाकिस्तान) और उत्तरी मोर्चे (चीन) को ध्यान में रखते हुए 'टू-फ्रंट वॉर' के लिए रणनीति बनाता आया है. लेकिन अब बांग्लादेश में भारत-विरोधी कट्टरपंथी तत्वों की सक्रियता और इस्लामिक नाटो की आहट के बाद उसे थ्री-फ्रंट वॉर के लिए अपने आपको तैयार करना होगा।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर बढ़ा खतरा:
अगर बांग्लादेश इस्लामिक नाटो में शामिल होता है तो इससे भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर खतरा कई गुणा बढ़ जाएगा. पश्चिम बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर मात्र 20-22 किलोमीटर चौड़ा एक संवेदनशील ज़मीनी मार्ग है, जो भारत के मुख्य भूभाग को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यदि बांग्लादेश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और कट्टरपंथी समूहों की पैठ बढ़ती है, तो वे इस कॉरिडोर को काटने की रणनीति पर आगे बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद को फिर से भड़काना भी दुश्मनों के लिए आसान हो सकता है। बंगाल की खाड़ी में लग सकता है झटका: भारत के लिए चुनौती केवल यही नहीं है. बांग्लादेश अगर इस्लामिक नाटो में शामिल होने का फैसला करता है तो इससे बंगाल की खाड़ी भी भारत के लिए असुरक्षित हो जाएगी. समझौते में शामिल होने के बाद पाकिस्तान और तुर्किये के युद्धपोतों और पनडुब्बियों का आवाजाही बंगाल की खाड़ी में बढ़ जाएगी. जिससे भारत के बंदरगाहों और युद्धपोतों के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा. तीनों मुल्कों का यह सैन्य सहयोग भारत के पूर्वी नौसैनिक कमान (विशाखापत्तनम) के लिए भी सीधी चुनौती खड़ा करेगा। भारत के खिलाफ बड़ी साजिश: 10 अगस्त को यूएनएससी की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा (AQIS) अब क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क को बड़ा करने जुटा हुआ है।
कहा गया कि ऑर्गनाइजेशन ने अपना लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल नेटवर्क बना लिया है और अब वह छोटे और स्वतंत्र इकाइयों के बजाए बड़े ग्रुप में काम कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि AQIS बांग्लादेश में आतंकी गुट खड़ा करने की कोशिश कर रहा है. इस रिपोर्ट में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। बांग्लादेश में अल-कायदा के एक कट्टरपंथी नेता ने हिंदुओं को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। हारून इजहार नाम के कट्टरपंथी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहा है कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है।यह वीडियो एक समारोह का है, जो बांग्लादेश के चटगांव का बताया जा रहा है।
इसमें इजहार यह कहते सुना जा सकता है कि उसे खुद ऐसा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उसके समर्थक ही इसके लिए काफी हैं। जब से शेख हसीना से हाथ से बांग्लादेश की सत्ता गई है, तब से हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों पर अत्याचार और हमले बढ़ गए हैं।
कौन है हारुन इजहार?: हारून इजहार बांग्लादेश के चटगांव का एक कट्टरपंथी इस्लामी नेता है और हिफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा है। उसके पिता, मुफ्ती इजहारुल इस्लाम भी चटगांव में एक प्रमुख इस्लामी नेता और मदरसा डायरेक्टर थे।
हारून का नाम लंबे समय से कट्टरपंथ और हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में चर्चा में रहा है। 2013 में, चटगांव के लालखान बाजार के एक मदरसे में धमाका हुआ था. इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी। जांच के दौरान, पुलिस ने विस्फोटक बनाने का सामान, एसिड और बिना फटे ग्रेनेड जब्त किए।इस मामले में हारून और उसके पिता समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।अल-कायदा से क्या है कनेक्शन?हारून इजहार पर जिहादी नेटवर्क और अल-कायदा से लिंक के आरोप पुराने हैं। अबांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स ने उसके पिता के मदरसे के तार प्रतिबंधित संस्था हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश से जुड़े बताए हैं। ऐसा भी दावा है कि उसके पिता के ओसामा बिन लादेन और तालिबान के नेता मुल्ला उमर से थे।रिपोर्ट्स में हारून इजहार को कट्टरपंथी संस्था हिफाजत-ए-इस्लाम का सीनियर नेता बताया गया है. साथ ही कहा गया कि उसके कथित तौर पर अंतराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क्स से रिश्ते हैं.
2021 की हिंसा में भी था नाम: पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में मार्च 2021 में बांग्लादेश के चटगांव के अलावा अन्य इलाकों में हिंसा फैल गई थी. हारून को हिंसा के मामलों में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उसने पूछताछ के दौरान यह कबूला था कि हिंसा में उसका हाथ था.उसने उन लोगों का भी नाम बताया था, जो हिंसा भड़काने में शामिल थे. ढाका, चटगांव और राजशाही में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। साल 2025 में हारून इजहार को चटगांव सेंट्रल जेल से बेल पर छोड़ा गया।पुलिस के मुताबिक, उसे 11 मामलों में जमानत मिली थी। पुलिस ने कहा था कि उसे सर्विलांस पर रखा जाएगा। साल 2025 में हारून का नाम दिसंबर में हुए हिंसक भारत-विरोधी प्रदर्शन के दौरान सामने आया था।रिपोर्ट्स के मुताबिक, चटगांव में उसने भारत के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बाद वह पुलिस स्टेशन पहुंच गया। वहां,उसे भारतीय राजनयिक मिशन पर हुए हमले के आरोपियों के मामले में दखल देते हुए देखा गया था।


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