- इंडो-नेपाल बॉर्डर को गृह अशांति में झोंकने की थी पूरी तैयारी
- सीमांत में रहना होगा सभी वर्ग के लोगों को सजग और सतर्क
भारत नेपाल बोर्डर से अशोक झा: सीमांत क्षेत्र में मस्जिद और मदरसा है तो हिंदू हो या मुसलमान सभी को सजग रहना होगा। वह इसलिए क्योंकि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इन दिनों नेपाल सीमांत क्षेत्रों से कई साजिश करने में लगे है। ये ऐसे लोग है जो साजिश के तहत भारत नेपाल के बीच तनाव फैलाकर दोनों देशों की शांति को भंग करना चाहते है। इसके पीछे तुर्की और बांग्लादेश के कुछ ट्रेड मौलाना शामिल है। यह बात मेरी नहीं पिछले दिनों पड़ोसी राष्ट्र नेपाल भारत की सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा ने दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। इस पूरे उपद्रव के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। इन सबके पीछे सीमावर्ती क्षेत्र में स्थापित मदरसे और बांग्लादेश और पाकिस्तान के जमात का कॉर्डिनेटर मौलवी इलियास मंसूरी का हाथ था। सांप्रदायिक हिंसा में झोंकने का षडयंत्र न केवल नेपाल तक ही सीमित था, बल्कि इसे भारत और खासतौर पर बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाने की साजिश थी।दंगे के समय टर्की और बांग्लादेश से आए कुछ मौलानाओं की भारतीय सीमा के मदरसों और मस्जिदों में उपस्थिति भी इस बात का प्रमाण है कि भारत के सीमावर्ती जिलों में साम्प्रदायिक दंगे करवा कर आईएसआई भारतीय सीमा क्षेत्र को असुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है। गृह मंत्रालय को सौंपी गई एनआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक टर्की में रहने वाला पाकिस्तानी मूल का मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवानगंज में एक मस्जिद में पिछले पांच दिन से रूका हुआ था। उसके साथ में काठमांडू के जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी भी था। सुनसरी के देवानगंज गांवपालिका के कप्तानगंज में 26 जुलाई को एक शिव मंदिर की खाली जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मुहर्रम का पर्व मनाने के लिए इस्लामिक झंडे लगाए थे। मुहर्रम खत्म होने के बाद से ही हिन्दू समुदाय के लोग बार-बार इस इस्लामिक झंडे को हटाने के लिए आग्रह कर रहे थे। लगातार एक महीने तक स्थानीय गांवपालिका के जनप्रतिनिधि से लेकर सांसद और पुलिस प्रशासन को कहने के बाद भी मंदिर की खाली जमीन पर लगाए गए इस्लामिक झंडे को नहीं हटाया गया।59 पेज की रिपोर्ट में बड़े खुलासे: इस बात का खुलासा नेपाल के दीवानगंज में हुए सांप्रदायिक हिंसा,झड़प और गोलीकांड को लेकर नेपाल के गृह मंत्रालय को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में हुआ है। नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुंग के निर्देश पर निजी सचिव जेम्स कार्की और सुनसरी क्षेत्र संख्या चार के सांसद ई.दीपक कुमार साह के नेतृत्व में गठित टीम ने यह जांच की थी, जिसमें नेपाल गृह मंत्रालय को 59 पृष्ठों का गोपनीय जांच रिपोर्ट दी गई है।नेपाल के मदरसे भी बने दंगों का कारण: सौंपी गई रिपोर्ट में मदरसों में दो जाने वाली धार्मिक शिक्षा, सीमावर्ती क्षेत्र में खुले धार्मिक स्कूल, मस्जिद और अंतर्राष्ट्रीय सीमा के खुले होने के कारण नेपाल भारत के बीच तस्करी सहित अन्य गतिविधियों को घटना का प्रमुख कारण माना गया है। टीम द्वारा सौंपे गए रिपोर्ट में इंडो नेपाल ओपन बॉर्डर पर अवैध गतिविधि, मस्जिदों और मदरसों की बढ़ती संख्या और उसकी गतिविधि के साथ तीसरे राष्ट्रों से हो रही आवाजाही, गैर कानूनी आर्थिक कारोबार,अपराध मामलों में उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की गई है।
इलियास मंसूरी ने रची थी साजिश: नेपाल में इस्लामिक गतिविधियों को संचालित करने वाले मौलवी इलियास मंसूरी की भूमिका पर सवाल खड़ा किया गया है। इलियास मंसूरी नेपाल भारत सीमावर्ती क्षेत्र में मदरसा के नियंत्रण के साथ साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले जमात के कोऑर्डिनेटर की भूमिका में कार्य करता है और घटना और तनाव के बाद से वह फरार बताया जाता है। जांच रिपोर्ट में पुलिस निरीक्षक राकेश राई के मोबाइल पर इलियास मंसूरी द्वारा बार-बार फोन किए जाने और तनावपूर्ण स्थिति सृजित करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करने का आरोप लगाया गया है।भारत तक दंगों की आंच लाने की थी साजिश: टीम ने इसके लिए पुलिस निरीक्षक राकेश राई और इलियास मंसूरी के मोबाइल कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन संबंधित व्यक्तियों के बयान तथा उपलब्ध डिजिटल प्रमाण के परीक्षण करने का सुझाव सरकार को दिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि इलियास मंसूरी विवादित मदरसों और संस्था से जुड़ा है,जिसका विवरण रिपोर्ट के साथ सबमिट किया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित दीवानगंज में सांप्रदायिक हिंसा के पीछे उसकी आग में न केवल नेपाल को झोंकने का षडयंत्र था,बल्कि भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की योजना थी। ताकि नेपाल और भारत का सीमावर्ती इलाका गृह अशांति के आगोश में रहे। रिपोर्ट के अनुसार,घटना के दिन शाम सात बजे स्थानीय 25 से 30 की संख्या में हिन्दू युवा बोलबम यात्रा के लिए धार्मिक ध्वज के साथ डीजे बजाते हुए जल चढ़ाने के लिए शिवालय की ओर निकले थे। डीजे की आवाज और धर्मिक ध्वज को लेकर मुस्लिम समुदाय के साथ कहासुनी हुई थी। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने काफी समझाने बुझाने का भी प्रयास किया, बावजूद विवाद बढ़ता चला गया और तोड़फोड़ के साथ दोनों समुदाय में झड़प हो गई। रात दस बजे के करीब पुलिस द्वारा हवाई फायर किए जाने और बिजली के अचानक गुल हो जाने के कारण गोली से दस हिन्दू समुदाय के लोग घायल हो गए। गोली नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल दोनों की ओर से गोली चलाई गई।रिपोर्ट में सुरक्षा टीम की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है। गोलीकांड में इलाज के दौरान ओमप्रकाश मेहता, जयप्रकाश मेहता और रवींद्र मेहता की मौत हो गई। जबकि सांप्रदायिक हिंसा के फैले आग में सिराहा के गोला बाजार में गणेश यादव की मौत पुलिस की गोली से हुई। सांप्रदायिक हिंसा में चार लोगों की मौत हुई।
मदरसों को लेकर भी रिपोर्ट में जिक्र
रिपोर्ट में कहा गया है कि कप्तानगंज के नए हाट क्षेत्र में स्थित चौक को हिंदू समुदाय द्वारा 'श्रीराम चौक', मुस्लिम समुदाय द्वारा 'इस्लाम चौक' और राजनीतिक हलकों में 'बीपी चौक' कहकर संबोधित किया जाता है। उसी स्थान पर निर्मित बड़ी मदरसा संरचना की कानूनी हैसियत, आर्थिक स्रोत और संचालन अनुमति को लेकर जांच किए जाने पर जोर दिया गया है।रिपोर्ट में सुनसरी के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते धार्मिक विद्यालयों की संख्याऔर सुरक्षा संवेदनशीलता पर भी ध्यान आकृष्ट कराया गया है। कोशी ग्रामीण नगरपालिका में 24 और भोक्राहा नरसिंह ग्रामीण नगरपालिका में 19 सहित 43 से अधिक धार्मिक विद्यालयों के संचालन में होने का उल्लेख है।
बिना नंबर प्लेट की बाइक्स का भी रिपोर्ट में जिक्र
रिपोर्ट में सीमावर्ती क्षेत्र में बिना नंबर प्लेट की भारतीय बाइक के उपयोग से तस्करी और सुरक्षा चुनौतियां बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है। साथ ही घटना के बाद उत्पन्न संवेदनशील परिस्थिति को संबोधित करने के लिए धार्मिक विद्यालयों को बंद करने की नीति अपनाने के बजाय उनके पंजीकरण, नियमन, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की योग्यता, आर्थिक स्रोत और नियमित निगरानी का कानूनी ढांचा तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा सरकार को तत्काल एकीकृत नागरिक शिक्षा व सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम संचालन कर संभावित सीमा अपराध और बाहरी तत्वों की घुसपैठ रोकने का सुझाव दिया गया है।
पहले ही जताई गई थी आशंका, लेकिन नहीं दिया गया ध्यान: रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, घटना के पूर्व ही कुछ संवेदनशील स्थानों की सूचना संबंधित सुरक्षा प्रमुखों को दी गई थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। प्रमुख जिलाधिकारी ईश्वरी प्रसाद अर्याल, सहायक प्रमुख जिलाधिकारी पोषण लामिछाने, नेपाली सेना के जिला प्रमुख राजन भुजु, सशस्त्र पुलिस बल के संबंधित प्रमुख, नेपाल पुलिस के प्रमुख तथा राष्ट्रीय अनुसंधान के अधिकारियों को संभावित जोखिम युक्त स्थानों की जानकारी थी और कुछ स्थानों पर अधिकारियों की डायरी में भी इसका उल्लेख भी है। पूर्व सूचना के बावजूद क्या उसके आधार पर सुरक्षा योजना नहीं बनाए जाने पर प्रश्न खड़ा किया गया है?
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