आज विष्णु दिगम्बर पलुस्कर की जयंती है... आपने इस महान देशभक्त शास्त्रीय संगीतकार का नाम कम ही सुना होगा... इसलिए आज इनका एक किस्सा सुन लीजिए... यकीन मानिए इसके बाद आप इनका नाम कभी नहीं भूलेंगे... ये उन दिनों की बात है जब कांग्रेस के अधिवेशन का शुभारंभ वंदेमातरम के गायन से होता था... 1923 का अधिवेशन आंध्र प्रदेश में काकीनाड़ा में हुआ था और खिलाफत आंदोलन के नेता मोहम्मद अली जौहर (आज़म खान की यूनिवर्सिटी वाले) उस समय गांधी जी की कृपा से कांग्रेस के अध्यक्ष थे... अधिवेशन में जब महान शास्त्रीय गायक विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने वन्देमातरम गीत प्रारम्भ किया, तो मोहम्मद अली जौहर ने इसे इस्लाम विरोधी बताकर रोकना चाहा इस पर पलुस्कर ने कहा कि - "ये कांग्रेस का मंच है, कोई मस्जिद नहीं"... और इसके बाद उन्होंने पूरे सुरों के साथ वन्दे मातरम गाया... इस बात से मौलाना जौहर इतने बेइज्जत हुए कि मुंह छुपाते हुए मंच से उतर गये... पलुस्कर जी जैसी हिम्मत अगर आज़ादी के बाद भी दिखाई गई होती तो वंदेमातरम गीत को आज इस तरह से अपमान सहन न करना पड़ता... ऐसे देशभक्त संगीतकार को शत-शत नमन। ( राज्यसभा सदस्य डॉक्टर दिनेश शर्मा की कलम से )
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