- उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार से तीन लोगों की मौत की पुष्टि
- पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी ने किया मुआवजे का ऐलान
- पुलिस ने होटल के मालिक कल्याण पॉल को किया गिरफ्तार
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ स्थित होटल में सोमवार को लगी आग में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। पुलिस ने इसकी पुष्टि की है। मृतकों में पांच मेघालय के एक ही परिवार के सदस्य थे, जो पवित्र शहर तारा मंदिर में पूजा-अर्चना करने आए थे। मृतकों में पांच वयस्क पुरुष, एक महिला और दो नाबालिग शामिल हैं। मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स स्थित शिब्बारी गांव के पांच परिवार के सदस्यों की पहचान राजेंद्र नाथ, आशा नाथ, बुरान मोदक, औशोनाथ मोदक और शिबराज मोदक के रूप में हुई है, जिनकी उम्र क्रमशः आठ और दस वर्ष है। अन्य तीन पीड़ित कमल रॉय, अमित पॉल और सुबीर साहा हैं, जो सभी उत्तरी बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के निवासी हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 28 लोगों को होटल से सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि सात लोगों का रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज चल रहा है।
इसी बीच, पुलिस ने ‘बिदेशिनी’ होटल के मालिक कल्याण पॉल को गिरफ्तार कर लिया। जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि होटल की अग्निशमन प्रणाली चालू थी या नहीं और क्या अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के तारापीठ स्थित होटल विदेशिनी अग्निकांड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मृतकों के निकट परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. पीएम मोदी ने कहा- पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में आग लगने की वजह से लोगों की मौत की खबर से स्तब्ध हूं. इस अग्निकांड में जिन लोगों ने अपने निकट परिजनों को खोया है, उनके प्रति मैं संवेदनाएं और शोक व्यक्त करता हूं।घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. प्रधानमंत्री ने आगे लिखा है कि स्थानीय प्रशासन पीड़ितों और उनके परिजनों की हरसंभव मदद कर रहा है। बीरभूम के एसपी विदित राज बुंदेश के मुताबिक, होटल के बाहर से आग या धुएं की लपटें दिखाई नहीं दे रही थीं। इसके बावजूद होटल के अंदर धुआं तेजी से फैल गया, जिससे वहां मौजूद लोगों को बाहर निकलने में काफी परेशानी हुई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू किया।रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस और दमकल कर्मियों ने सीढ़ियों की मदद से होटल में फंसे 22 लोगों को बाहर निकाला। इनमें से 11 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल लोगों का उपचार जारी है। हादसे के बाद पुलिस ने होटल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि होटल में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। इसके अलावा होटल में सुरक्षा मानकों और फायर सेफ्टी व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।उन्होंने कहा, 'FASL टीम और हमारे फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी फिलहाल आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं. होटल के पिछले हिस्से में एक दरवाजा था जिसका इस्तेमाल आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए किया जा सकता था, लेकिन वह बंद था. छत पर जाने वाली सीढ़ियां भी बंद थीं. फायर डिपार्टमेंट इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या आग से बचाव के नियमों का ठीक से पालन किया गया था.'
फायर डिपार्टमेंट के अधिकारियों को शुरुआती तौर पर शक है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी. धुआं पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया, जबकि आग ग्राउंड और पहली मंजिल पर फैल गई. आग लगने की घटना के बाद पुलिस ने होटल के मालिक को हिरासत में ले लिया है. अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या होटल में आग से बचाव के उपाय पर्याप्त थे और क्या सभी नियमों का पालन किया गया था। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि पीछे का निकास द्वार बंद था, जिससे वे बाहर नहीं निकल पाए. इस आरोप की भी जांच की जा रही है। हादसे के बीच एक महिला ने बताया कि वह दक्षिण 24 परगना से रविवार दोपहर तारापीठ में पूजा करने आई थी। उनके साथ उनकी मां और बच्चे भी थे। महिला के मुताबिक, उनकी मां होटल के रूम नंबर एक में थीं। हादसे के बाद उनकी मां और दो बच्चे नहीं मिल रहे हैं। परिवार के लोग लगातार उनकी तलाश कर रहे हैं।
अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के समय होटल में 43 लोग मौजूद थे, जिनमें से एक अस्पताल में भर्ती है, जबकि 34 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
किंवदंती के अनुसार, 13वीं सदी का तारापीठ मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां देवी तारा की पूजा की जाती है। मंदिर नगरी तारापीठ में चार मंजिला होटल के भूतल पर तड़के करीब 4:30 बजे आग लगी जब समय ज्यादातर मेहमान सो रहे थे। इनमें कई श्रद्धालु थे, जो सावन महीने के आखिरी सोमवार को पूजा करने आए थे।
अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद घना धुआं पूरे भवन में फैलने के कारण कई मेहमान ऊपरी मंजिलों पर फंस गए, इसके बाद दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर भेजकर आग पर काबू पाया गया। उन्होंने कहा कि घायलों को रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग झुलस गए, जबकि कुछ लोग दम घुटने के कारण बीमार हो गए।
होटल के अधिकारियों ने दावा किया कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था के एक उपकरण में चिंगारी भड़कने के बाद होटल के 'रिसेप्शन' के पास आग शुरू हुई। हालांकि आग लगने का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों ने बताया कि होटल के अंदर सजावट और फाइबर की सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई और धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया, जिसके कारण कई मेहमान अपने कमरों में फंस गए। अधिकारियों ने बताया कि होटल में आग बुझाने वाले उपकरणों के रखरखाव में कथित लापरवाही के संबंध में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। इस घटना और आगामी कौशिकी अमावस्या पर्व के दौरान भारी भीड़ जुटने के मद्देनजर बीरभूम जिला प्रशासन ने तारापीठ के होटलों, लॉज और अन्य प्रतिष्ठानों में बिजली व्यवस्था और अग्निशमन व्यवस्था की विशेष जांच कराने की घोषणा की है।
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