जैश हमीम मंडल के माध्यम से तैयार कर रहा था तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान मॉड्यूल
August 05, 2026
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- पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईसआई के इशारे पर कर रहा था काम,मिल रही नई नई जानकारियां
- पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से सोशल मीडिया के जरिये हमीम को लगातार मिलते थे निर्दश
- जरूरतमंद हिंदू युवक युवतियों को बनाया जा रहा निशाना
- पंजाब के तर्ज पर बंगाल को अशांत करने की हो रही साजिश
अशोक झा/ कोलकाता: पाकिस्तान में सक्रिय जैश ए मोहम्मद बंगाल में हमीम मंडल के माध्यम सेतहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान मॉड्यूल पर काम करवा रहा था। आतंकवादी गुट ‘शहजाद भट्टी’ हनीट्रैप का इस्तेमाल कर राज्य के कम से कम 6 मंत्रियों और उनके परिवार के सदस्यों को इसमें फंसाने की साजिश रच रहा था। यह काम गिरफ्तार आतंकवादी नेता हमीम मंडल की महिला साथी अर्पिता सरकार को सौंपा गया था। हमीम मंडल और उसकी प्रेमिका अर्पिता सरकार के बाद यह तीसरी गिरफ्तारी है। बंगाल एसटीएफ ने हमीम और अर्पिता से पूछताछ के बाद आदित्य सिंह से संपर्क किया। एक ओर कॉलेज छात्र आदित्य सिंह को गिरफ्तार किया गया है। वह गरीब घर का लड़का है। लेकिन उसके बैंक एकाउंट में अभी 60 लाख रुपए होने की बात सामने आ रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आदित्य सिंह को पश्चिम बंगाल के मंत्री उमेश राय के बेटे और उसके ठिकाने की तस्वीरें खींचने का काम सौंपा गया था। आदित्य ने उमेश राय के बेटे, उसकी कार और आवास की कुछ तस्वीरें खींची और उन्हें एक गुप्त सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से हमीम मंडल और अर्पिता को भेज दिया। एसटीएफ की जांच में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन शहजाद भट्टी के 2 ‘अमीरों’ (कमांडर) अजमल गुर्जर और राजा के नाम सामने आये हैं। यह भी पता चला है कि वे भारत के अलग-अलग राज्यों में आतंकवादियों की भर्ती के लिए सोशल मीडिया पर अलग-अलग नाम का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके लिए बड़ी संख्या में महिलाओं को भर्ती करने का विचार था। एक अधिकारी ने बताया कि इस साजिश का मुख्य ध्यान पश्चिम बंगाल पर था। जांच में यह भी पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी 'इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस' ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बेटों को निशाना बनाने के लिए महिलाओं की भर्ती का काम सौंपा था। महिलाओं की भर्ती की योजना: जांचकर्ताओं के अनुसार, यह मॉड्यूल ऐसी युवतियों की तलाश कर रहा था जिन्हें हनी-ट्रैप ऑपरेशन के लिए शामिल किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इन महिलाओं को इस काम के लिए अच्छी रकम देने का वादा किया गया था। इसके अलावा, जैश ने मंत्रियों के बेटों का अपहरण करने और जबरन वसूली के जरिए भारी फिरौती मांगने की योजना भी बनाई थी।अधिकारियों का मानना है कि टीटीएच और टीटीपी के बीच संबंध दिखाकर पाकिस्तान एक बड़ा प्रचार अभियान चलाने की तैयारी में है। इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा सकती है कि पाकिस्तान में टीटीपी द्वारा किए जा रहे हमलों के पीछे भारत का हाथ है। बता दें कि हाल के वर्षों में टीटीपी के हमलों में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में देश के कई राज्यों में कार्रवाई करते हुए एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और उसके कथित सहयोगी शहजाद भट्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क के जरिए तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) नामक संगठन खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी। कई राज्यों में फैला था नेटवर्क:सुरक्षा एजेंसियों ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में कार्रवाई कर कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इन मॉड्यूल्स को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कुछ लोगों को संवेदनशील सैन्य और सरकारी प्रतिष्ठानों के बारे में जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया था, जबकि कुछ सदस्य पेट्रोल बम हमले, गोलीबारी और अन्य हिंसक गतिविधियों की तैयारी में लगे थे। टीटीएच को लेकर एजेंसियां सतर्क:अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआत में टीटीएच को केवल प्रचार के लिए बनाया गया एक काल्पनिक संगठन माना जा रहा था। लेकिन हालिया जांच में संकेत मिले हैं कि यह संगठन वास्तव में तैयार किया जा रहा है और इसकी जिम्मेदारी शहजाद भट्टी को दी गई है, जो दुबई और पाकिस्तान से सक्रिय बताया जाता है। खुफिया अधिकारियों का मानना है कि टीटीएच को पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। साथ ही इसे भारत के भीतर पैदा हुआ एक स्थानीय संगठन दिखाने की रणनीति पर भी काम हो रहा है। हिंदू और मुस्लिम युवाओं की भर्ती का प्रयास: जांच एजेंसियों के अनुसार, शहजाद भट्टी सोशल मीडिया, वैचारिक प्रचार और आर्थिक लालच का इस्तेमाल कर युवाओं की भर्ती कर रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि नेटवर्क कथित रूप से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा था ताकि टीटीएच को पूरी तरह भारतीय संगठन के रूप में पेश किया जा सके और इसके विदेशी संबंधों पर पर्दा डाला जा सके। सिर्फ आतंक नहीं, कई अवैध गतिविधियों की योजना: जांच में सामने आया है कि टीटीएच की योजना केवल आतंकवादी हमलों तक सीमित नहीं है। एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की सप्लाई, ऑनलाइन कट्टरपंथी प्रचार, नकली मुद्रा और दस्तावेजों के कारोबार तथा देशभर में अलग-अलग मॉड्यूल खड़े करने की दिशा में भी काम कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यही वजह है कि टीटीएच को एक बेहद खतरनाक और बहुआयामी नेटवर्क माना जा रहा है।इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब 8 फरवरी 2026 को सीआईएसएफ ने जनपथ मेट्रो स्टेशन और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थानों पर ‘भारत विरोधी’ और ‘प्रो-पाकिस्तानी’ पोस्टर लगे देखे. इन पोस्टरों पर आतंकी बुरहान वानी की तस्वीरें थीं और ‘हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है’ जैसे भड़काऊ नारे लिखे थे। दिल्ली पुलिस ने तुरंत एफआईआर नंबर 01/26 दर्ज की और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे ‘स्पेशल सेल’ को सौंप दिया। बांग्लादेश में बैठा मास्टरमाइंड: जांच में सामने आया कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड शब्बीर अहमद लोन है, जो कश्मीर के गांदरबल का रहने वाला है. शब्बीर का इतिहास बेहद दागदार है. उसे 2007 में एके-47 और ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया गया था और वह आतंकी हाफिज सईद का करीबी माना जाता है. 2018 में जेल से रिहा होने के बाद वह अवैध तरीके से बांग्लादेश भाग गया. वहां उसने लश्कर के नेतृत्व के साथ मिलकर भारतीय जेलों में बंद रहे पुराने संपर्कों और भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी युवाओं का एक नया नेटवर्क तैयार किया। कोयंबटूर से कोलकाता तक फैला जाल: स्पेशल सेल की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी स्तर पर सूचनाएं जुटाने के बाद सबसे पहले कोलकाता के हातिआरा इलाके में छापेमारी की. वहां से उमर फारूक और रोबियल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, 21 फरवरी को तमिलनाडु के तिरुपुर में एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी गई, जहां से 6 और बांग्लादेशी आतंकियों को पकड़ा गया।गिरफ्तार आतंकी क्या करने वाले थे?: गिरफ्तार आतंकियों को अलग-अलग काम सौंपे गए थे।पश्चिम बंगाल का रहने वाला उमर फारूक इस मॉड्यूल का भारत में मुख्य संचालक है. बांग्लादेश का रोबियल इस्लाम पोस्टर लगाने और रेकी करने में शामिल था। मो. मिजानुर रहमान, शेफायत हुसैन, जाहिदुल इस्लाम, मो. लिटन, मो. उज्ज्वल और उमर है।पूछताछ में हुए पहले भी हो चुके है सनसनीखेज खुलासे: आरोपी उमर फारूक ने बताया कि शब्बीर लोन ने उसे भारत के महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी करने और वीडियो भेजने का जिम्मा सौंपा था. इन आतंकियों ने दिल्ली के 10 अलग-अलग स्थानों पर पोस्टर लगाए और उनका वीडियो बनाकर बांग्लादेश भेजा।शब्बीर लोन इन्हें हथियार मुहैया कराने और भारत के भीतर ‘फिदायीन’ हमलों के लिए तैयार कर रहा था।पुलिस ने इनके पास से 10 मोबाइल फोन, बांग्लादेशी पासपोर्ट, फर्जी आईडी कार्ड और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
टीटीएच ने पंजाब में की पुलिस अफसरों की हत्या
संदिग्धों के पास से जब्त डिजिटल उपकरणों की अब तक की जांच में पता चला है कि हमीम मंडल न केवल शहजाद भट्टी गैंग के लिए काम कर रहा था, बल्कि ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (टीटीएच) का सदस्य भी था। टीटीएच ने इस साल फरवरी और मई में पंजाब में पुलिस अधिकारियों की हत्या की थी। 5 हजार रुपए देकर लगवाते थे देश विरोधी पोस्टर
जांच अधिकारी को अब कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाकर और उनकी हत्या करके इसी तरह के हमले करने की साजिश का पता चला है. देखा गया है कि उक्त आतंकी संगठन के सदस्य देश विरोधी पोस्टर लगाने के लिए प्रति व्यक्ति 5 हजार रुपए तक खर्च करते थे। हमला करने के लिए 3 लाख रुपए देते थे. पुलिस पर हमले और हथियार हासिल करने के निर्देश पाकिस्तान से सोशल मीडिया हैंडल के जरिये भेजे जाते थे। बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी पर हमले की रची थी साजिश:
जांच में यह भी पता चला है कि आतंकवादियों ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर भी हमले की साजिश रची थी. उन्होंने हमले के संभावित तरीकों और रास्तों का खाका तैयार कर लिया था। इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को हमीम और अर्पिता सरकार ने दी थी। हैंडलर्स ने ड्राफ्ट की समीक्षा की, अपनी राय दी और संभावित रास्तों का सुझाव दिया। जांच अधिकारियों ने बताया है कि हमीम मंडल इस साजिश में अकेला नहीं था।पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स, जिनकी पहचान राणा, उजैर, आबिद जथ और हमार के तौर पर हुई है, ने सोशल मीडिया के जरिये कई और लोगों को इसमें शामिल किया था. बंगाल में कई टीटीएच मॉड्यूल बनाने की योजना थी। पाकिस्तान से मिले निर्देशों के आधार पर हमीम ने इस संबंध में कई बैठकें की थीं। वह कुछ हथियारबंद भी तैयार कर रहा था। इतना ही नहीं, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फंड और हथियार जुटाने के लिए स्लीपर सेल भी बनाये जा रहे थे।
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