- सिलीगुड़ी वासियों को एक एक दिन का इंतजार पड़ रहा भारी
युवा महिला हो या व्यापारी , सबने कि है मिलकर तैयारी
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: देश में 9 अगस्त को मुख्य रूप से विश्व आदिवासी दिवस (अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस, नागासाकी दिवस तथा भारत में भारत छोड़ो आंदोलन दिवस भी याद किया जाता है। इसी दिन इस वर्ष सावन मास की एकादशी भी है। इसी सब के बीच सिलीगुड़ी को ऐतिहासिक बनाने आ रही है दीदी मां साध्वी ऋतंभरा। सिलीगुड़ी के उत्तरबंग मारवाड़ी पैलेस में उनका प्रवचन होगा। जिसे वर्तमान में घटित घटनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम की तैयारी में युवा महिला और व्यापारी जुड़े है सभी बारी बारी। दीदी माँ लोकप्रिय टीवी चैनलों के माध्यम से हर दिन लाखों घरों तक पहुँचती हैं, जहाँ उनकी भक्ति साधनाओं और प्रवचनों का प्रसारण होता है। उन्हें 'तप-सिद्ध संन्यासिनी' कहा गया है। एक ऐसी साध्वी, जिनकी उच्च चेतना की खोज की भक्ति इसी जीवन में सफल हुई है। उनके गुरुजी, आदरणीय युगपुरुष ने उनसे अपना जीवन समाज के कल्याण के लिए समर्पित करने को कहा था, और उन्होंने अटूट निष्ठा के साथ ऐसा ही किया है।महान संत पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज जो उनके सद्गुरुदेव हैं की प्रेरणा, मार्गदर्शन और करुणा के साये में, दीदी माँ ने शांति और सुकून के मोती पाने के लिए आध्यात्मिकता की गहराई में गोता लगाया है। अपने विज़न को साकार करने के लिए उन्होंने सांसारिक और भौतिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया है। आज, वह भारतीय माँ की असली भावना को जगाने का काम करती हैं। साध्वी जी का मानना है कि हर नवजात शिशु एक दिव्य रचना है, क्योंकि हर आत्मा का जन्म किसी दिव्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए होता है। माता-पिता, खासकर माँ के बिना रहने वाले कुछ बच्चों को अनाथालयों में शरण लेनी पड़ती है। वहाँ उन्हें वह आत्म-सम्मान और माँ की सुरक्षा का एहसास नहीं मिल पाता जो आम तौर पर एक परिवार में मिलता है। इसीलिए, 'वात्सल्य ग्राम' की शुरुआत उनके विज़न की दिशा में एक और कदम है।
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