- मामले की सीबीआई कर रही है जांच, अभी और भी गिरफ्तारी होनी है
अशोक झा/ कोलकाता: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं सहित कुल 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीआई ने हाल ही में रथ के कार्यालय में काम करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं सागर सोनकर और उसके भाई साहिब सोनकर को गिरफ्तार किया था। उन पर रथ की हत्या की सुपारी उत्तर प्रदेश के शूटर्स को देने का आरोप है। अधिकारियों ने कहा कि राज्य में एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है।उन्होंने बताया कि सीबीआई को जानकारी मिली है कि भाजपा में शामिल होने से पहले 2020 तक सागर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के विधायक के साथ काम करता था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के दो दिन बाद छह मई को मध्यग्राम में शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में शामिल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड अब नए एंगल सामने आया है।मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में सीबीआई ने जिन दो भाइयों को साजिश का आरोपी बनाया है, उनका परिवार इस कार्रवाई को गलत बता रहा है।पिता का कहना है कि उनके बेटे निर्दोष हैं और उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है. यह दावा ऐसे समय आया है जब सीबीआई लगातार इस केस की जांच आगे बढ़ा रही है।
हत्या के आरोपी बने सबसे करीबी सहयोगी:मीडिया मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में सीबीआई ने 29 वर्षीय सागर सोनकर और उसके 20 वर्षीय भाई साहेब सोनकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों भाइयों ने हत्या की साजिश रची और शूटरों की व्यवस्था की। दोनों की गिरफ्तारी 31 जुलाई को हुई।इससे पहले सीबीआई इस मामले में चार कथित शार्पशूटर समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी।
पिता बोले- मेरे बेटों को फंसाया गया: सागर और साहेब के पिता संजय सोनकर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनके बेटे चंद्रनाथ रथ के सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे। उन्होंने दावा किया कि हत्या वाले दिन सागर चंद्रनाथ रथ के साथ बीजेपी कार्यालय में था। बाद में वह घर लौट आया।जब उसे गोली मारने की खबर मिली तो वह तुरंत अस्पताल पहुंचा और काफी देर तक वहीं रहा। पिता का कहना है कि दोनों बेटों को बेवजह इस मामले में फंसाया जा रहा है।सीबीआई का दावा क्या है?
सीबीआई की जांच में दावा किया गया है कि सागर सोनकर बीजेपी में रहने के बावजूद एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के संपर्क में था. जांच एजेंसी के मुताबिक, लैंडलाइन कॉल रिकॉर्ड में ऐसे संपर्क मिले हैं. सीबीआई का कहना है कि इन्हीं कड़ियों के आधार पर दोनों भाइयों की भूमिका सामने आई. हालांकि एजेंसी ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है और मामले की पड़ताल जारी है। रथ और सोनकर परिवार का था गहरा रिश्ता: संजय सोनकर के मुताबिक, सागर पहले एक स्थानीय नेता के कार्यालय में काम करता था। बाद में उसने अस्पताल में संविदा नौकरी की। साल 2021 में वह बीजेपी में शामिल हुआ. इसके बाद चंद्रनाथ रथ ने उसे अपने साथ काम करने का मौका दिया। पिता का दावा है कि सागर रथ की आर्थिक जिम्मेदारियां भी संभालता था। बाद में छोटे भाई साहेब को भी रथ ने अपने साथ काम पर रखा। सागर की शादी में भी चंद्रनाथ रथ शामिल हुए थे।परिवार का कहना है कि उनका रिश्ता सिर्फ काम तक सीमित नहीं था।
चुनाव में दोनों भाइयों ने खूब किया काम: परिवार के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों भाई भवानीपुर सीट पर लगातार सक्रिय रहे। सागर कई-कई दिन घर नहीं आता था। वह चंद्रनाथ रथ के साथ चुनावी काम में व्यस्त रहता था। रिश्तेदारों का कहना है कि ऐसे व्यक्ति पर हत्या की साजिश का आरोप लगना उन्हें हैरान करता है। परिवार का दावा है कि राजनीति में लंबे समय से सक्रिय होने के बावजूद उनकी छवि कभी विवादित नहीं रही।चंद्रनाथ रथ की हत्या कैसे हुई?
चंद्रनाथ रथ 6 मई को घर लौट रहे थे। रास्ते में एक कार ने उनकी एसयूवी को रोका। इसके बाद बाइक सवार हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। हमले में उनकी मौत हो गई। रथ भारतीय वायुसेना के पूर्व जवान थे। वह साल 2018 से सुवेंदु अधिकारी के साथ जुड़े थे और 2021 में उनके पीए बने थे। घटना के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि हत्या के पीछे राजनीतिक कारण हो सकता है, लेकिन बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।
दोनों दलों की चुप्पी भी चर्चा में:रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अब तक बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस की ओर से गिरफ्तारियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।स्थानीय नेताओं से भी संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।ऐसे में अब सभी की नजर सीबीआई की आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही पर है।
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