- सुबह-सुबह बंगाल में मचा हड़कंप: फंदे से लटके मिले ममता के करीबी और पूर्व डिप्टी स्पीकर
- TMC नेता को जिंदगी से आसान क्यों लगा मौत को गले लगाना? आशीष बनर्जी के आखिरी नोट ने खोले बड़े राज!
अशोक झा/ कोलकाता: बीरभूम जिले के रामपुरहाट में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक आशीष बनर्जी की मौत से हड़कंप मच गया है।उनका शव रविवार (16 अगस्त 2026) की सुबह घर के पास स्थित पार्टी कार्यालय में लटका हुआ मिला। पुलिस ने मौके से एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मौत की वजह साफ नहीं है। आशीष बनर्जी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था। वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रह चुके थे। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार में शिक्षा और कृषि विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली थी। डॉ. आशीष बनर्जी (74) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता था। वे रामपुरहाट विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे. जब राज्य में पहली बार तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब से लेकर वे लंबे समय तक राज्य के शिक्षा मंत्री और कृषि मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। इसके अलावा, उन्होंने विधानसभा के डिप्टी स्पीकर का पद भी संभाला था। पुलिस उनके इस सुसाइड नोट का परीक्षण कर रही है। अब सवाल उठता है कि वह आत्महत्या किया या उनकी हत्या कर फंदे से लटकाया गया? यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा। लेकिन जिस प्रकार से सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा है उससे ऐसा लगता है वह भ्रष्टाचार मामले को लेकर डरे हुए थे। जब वह इतने ईमानदार थे तो उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं थी।उन्हें बदनाम करने की जी भी साजिश की गई थी उसका उन्हें खुलकर विरोध करना चाहिए था। एक सवाल यह भी उठता है कि वह अपने घर के बदले टीएमसी पार्टी ऑफिस में ही फंदे से क्यों झूल गए। क्यों बंगाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कारवाई याजच को प्रभावित करने की कोई बड़ी साजिश तो नहीं? इस बीच तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता निलंजन दास ने बनर्जी का हाथों से से लिखा यह सुसाइड नोट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने TMC नेता का सुसाइड नोट के हवाले से लिखा, "भ्रष्टाचार से मेरा कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी मुझे बदनाम करने के लिए ये सभी पूरी तरह से झूठे आरोप लगाए गए हैं।"तथाकथित सुसाइड नोट में कहा गया है, "मैं छात्र जीवन से ही राजनीति में रहा हूं। मैं कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा। मैं बर्दवान यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का महासचिव बना। वहां भी मैं किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं था। राजनीतिक बहसें होती रही हैं, लेकिन पहले कभी उन बहसों ने दुश्मनी का रूप नहीं लिया। हालांकि, मैं हमेशा पार्टी के सभी गलत फैसलों को स्वीकार नहीं कर पाया, लेकिन मैं विरोध भी नहीं कर सका। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में किसी भी काम के बदले एक पैसा भी नहीं लिया।"आशीष बनर्जी ने अपने कथित सुसाइड नोट में लिखा कि वह छात्र जीवन से ही राजनीति (Politics) से जुड़े हुए थे, लेकिन उन्होंने कभी किसी तरह का भ्रष्टाचार नहीं किया। उन्होंने लिखा कि बर्दवान यूनिवर्सिटी छात्र संघ के महासचिव रहते हुए भी उन्होंने किसी तरह का भ्रष्टाचार नहीं किया था।
उन्होंने आगे लिखा कि राजनीतिक काम में उनकी व्यस्तता रही, लेकिन उन्होंने कभी किसी पद को लेने की इच्छा नहीं रखी। पार्टी की तरफ से कई बार उनसे अनुरोध किए गए, जिन्हें उन्होंने रोकने की कोशिश की, लेकिन हर बार ऐसा कर पाना संभव नहीं हुआ। नोट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में बिना किसी शर्त या बदले के किसी से एक पैसा तक नहीं लिया। यहां तक कि जब उनके लड़के अटेंडेंट के तौर पर काम करते थे, तब भी उन्होंने उनसे कभी किसी मेहमान का खर्च नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक भ्रष्टाचार में उनका कभी कोई हाथ नहीं रहा। TRDA के कामकाज को लेकर भी किया जिक्र: कीआशीष बनर्जी ने अपने कथित सुसाइड नोट में टीआरडीए (TRDA) के कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि टीआरडीए में जनरल मीटिंग होती थीं और उनके रजिस्टर रखे जाते थे। उन्होंने कहा कि वह टेंडर कमेटी में नहीं थे। उन्होंने यह भी लिखा कि उनके पास चेक जारी करने की शक्ति नहीं थी। उन्होंने न तो कोई प्लान पास किया और न ही कोई एनओसी (NOC) जारी किया। उनके मुताबिक इन मामलों पर ग्रुप चैंबर में उनके सामने चर्चा जरूर होती थी, लेकिन इन कामों में उनकी कोई भूमिका या जानकारी नहीं थी।
'मुझे बदनाम करने के लिए कौन से खेल खेले गए'
आशीष बनर्जी ने कथित नोट में लिखा कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ कौन-कौन से खेल खेले गए। उन्होंने आने वाले समय की राजनीति को जंग का मैदान बताया। उन्होंने अपने कॉलेज के बच्चों से कहा कि वे राजनीति में न पड़ें। उन्होंने छात्रों से अपने-अपने क्षेत्र में रहने, शांति और अनुशासन बनाए रखने और अच्छे इंसान बनने की बात कही। आशीष बनर्जी ने अपने सुसाइड नोट में अपने शिक्षक के तौर पर बिताए जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने पूरी जिंदगी पढ़ाया है और कभी क्लास नहीं छोड़ी। उन्होंने स्पेशल क्लास भी लीं और कई छात्रों को बिना फीस लिए पढ़ाया। उन्होंने लिखा कि इसके बदले उन्हें अपने छात्रों से बहुत प्यार मिला। इसके बाद उन्होंने लिखा कि अब विदा लेने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि बेवजह के शक और आरोपों से परेशान हुए बिना वह बहुत सावधानी से अपना यह घोंसला समेट रहे हैं। मुझे नहीं पता कि मुझे बदनाम करने के लिए मेरे खिलाफ कौन-कौन से खेल खेले गए। आने वाले दिनों में राजनीति एक जंग का मैदान है। मैं अपने कॉलेज के बच्चों से कहना चाहता हूं कि वे राजनीति में न पड़ें। अपने-अपने क्षेत्र में रहें, शांति और अनुशासन बनाए रखें और अच्छे इंसान बनें।" "बिशन, रानी, सौम्या, देबप्रिय, बिथी, रिरी, बरनहा, मेघदा, चैतती, दीपा, झूला, मिमी- तुम सभी को मेरा दिल से प्यार। बड़ों को मेरा प्यार देना। दादा और सौम्या, शांत रहना। पूरी जिंदगी सच और हिम्मत के साथ जीना। अपने बच्चों से जुड़े मामले और विवाद आपस में खुद सुलझाना।"
"मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।" अब उनकी मौत के बाद परिवार, राजनीतिक सफर और संपत्ति से जुड़ी जानकारी भी चर्चा में आ गई है।
आशीष बनर्जी के परिवार में कौन-कौन था?:
आशीष बनर्जी का परिवार पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट के हत्तलापारा इलाके में रहता है। चुनावी हलफनामे की जानकारी के मुताबिक उनके पिता का नाम असित वरण बनर्जी था। उनकी पत्नी गृहिणी (हाउस वाइफ) हैं।
परिवार के बारे में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी सीमित है। इसलिए उनकी पत्नी या परिवार के दूसरे सदस्यों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही हर जानकारी को सही मानना ठीक नहीं होगा। फिलहाल सार्वजनिक रिकॉर्ड में पत्नी को गृहिणी बताया गया है। और उनके बच्चे हैं या नहीं, इसकी जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है।
आशीष बनर्जी अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गए?
चुनावी हलफनामे में दर्ज संपत्ति के आंकड़ों के मुताबिक आशीष बनर्जी की कुल घोषित संपत्ति करीब ₹1,80,27,294 थी। इसमें बैंक और वित्तीय संस्थानों में जमा रकम सबसे बड़ा हिस्सा थी। उनकी घोषित संपत्ति में करीब ₹1,24,94,809 बैंक, वित्तीय संस्थानों और NBFC में जमा बताए गए थे। इसके अलावा ₹3,25,045 की LIC या दूसरी इंश्योरेंस पॉलिसियां और करीब ₹2,58,940 की ज्वेलरी दर्ज थी।
कौन थे आशीष बनर्जी?: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बनर्जी 2001 से 2026 तक रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक रहे। वह विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में स्कूली शिक्षा और कृषि समेत अलग-अलग विभागों के मंत्री भी रहे।उन्होंने 2026 का विधानसभा चुनाव रामपुरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ध्रुव साहा से 24,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हार गए थे।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/