-कोयला कारोबारियों एलबी सिंह व अनिल गोयल समेत सहयोगियों के ठिकानों पर ईडी (ED) का शिकंजा
- जानिए इनके पास कैसे पहुंची ईडी और रेड में और क्या-क्या मिले?
अशोक झा/ कोलकाता: झारखंड का धनबाद, जिसे 'ब्लैक डायमंड' यानी कोयले की राजधानी कहा जाता है।एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनबाद में अवैध कोयला खनन, रंगदारी, लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के प्रमुख कोयला कारोबारियों और आउटसोर्सिंग ठेकेदारों के 30 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।इस अभियान में बीसीसीएल (BCCL) के बड़े आउटसोर्सिंग कारोबारी लाल बाबू सिंह (एलबी सिंह) और कोयला व्यापारी अनिल गोयल सहित उनके सहयोगियों के पास से 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों व दस्तावेजों का खुलासा हुआ है। ईडी की रांची जोनल टीम ने जब तड़के धनबाद के सरायढेला, कटरास, झरिया और बैंक मोड़ जैसे इलाकों में एक साथ धावा बोला, तो पूरे कोयलांचल में हड़कंप मच गया।इस दौरान एलबी सिंह के परिसरों से चौंकाने वाली काली कमाई के सबूत मिले हैं। 160 करोड़ रुपये का म्यूचुअल फंड फ्रीज कर दिया गया है। 600 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियां मिली हैं।एलबी सिंह और अनिल गोयल के यहां क्या-क्या हुआ जब्त? : छापेमारी में 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों जिसमें प्लॉट, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, माइन्स शेयर के मालिकाना दस्तावेज मिले हैं, जिनकी अनुमानित वैल्यू 500 से 600 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। ठिकानों से 1.02 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी, डिजिटल डिवाइसेज और दर्जनों बैंक खातों के दस्तावेज जब्त किए गए हैं।छापेमारी में 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों जिसमें प्लॉट, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, माइन्स शेयर के मालिकाना दस्तावेज मिले हैं। जिनकी अनुमानित वैल्यू 500 से 600 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. ठिकानों से 1.02 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी, डिजिटल डिवाइसेज और दर्जनों बैंक खातों के दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
धनबाद के ‘कोयला माफियाओं’ का खूनी और सियासी इतिहास: धनबाद में कोयला माफिया का इतिहास कोई नया नहीं है. 1970 के दशक में बीसीसीएल के राष्ट्रीयकरण के बाद से ही यहां अवैध खनन और सिंडिकेट का बोलबाला रहा है। सला 1970- 2000 तक यहां बाहुबल का दौर रहा था। बीपी सिन्हा से लेकर सूर्यदेव सिंह सिंह मेंशन तक, धनबाद ने बाहुबलियों का वह दौर देखा जहां कोयले की खदानों पर कब्जे के लिए खूनी गैंगवार आम बात थी. ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की पटकथा इसी जमीन से निकली। ईडी ने कैसे इतनी रकम बरामद की?: 2000 के बाद खदानों में बाहुबल की जगह ‘आउटसोर्सिंग कंपनियों’ ने ले ली। एलबी सिंह, अनिल गोयल और उनके जैसे कई लोग सरकारी खदानों का ठेका लेकर पर्दे के पीछे से अवैध उत्खनन और लेवी वसूली का समानांतर नेटवर्क चलाने लगे। लेकिन गृह मंत्रालय का ‘जीरो टॉलरेंस’ और ED की आगे की योजना केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कोयला चोरी और समानांतर अर्थशास्त्र पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के निर्देशों के बाद ईडी ने यह कार्रवाई की है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अपराध की कमाई से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करना है। 600 करोड़ से अधिक का यह जब्ती का आंकड़ा बताता है कि धनबाद का कोयला सिंडिकेट कितना गहरा और जड़ जमा चुका था।धनबाद के इतिहास में ईडी का यह एक्शन कोयला माफियाओं की कमर तोड़ने वाला साबित हुआ है. 600 करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति और 160 करोड़ के म्यूचुअल फंड फ्रीज होने के बाद अब जांच एजेंसी उन सफेदपोश नेताओं और नौकरशाहों तक पहुंचने की तैयारी में है, जिनके संरक्षण में यह अवैध कोयला सिंडिकेट दशकों से फल-फूल रहा था।
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