- फंसे लोगों को बचाने की जद्दोजहद, पीएम और गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री से की बात
- 500 मेगावाट के सपने पर मौत का टनल!
अशोक झा/ गंगटोक: पीएम मोदी ने झोलंगी के समरडुंग में निर्माणाधीन सुरंग हादसे के बाद चल रहे बचाव कार्यों की समीक्षा की। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने इस त्रासदी पर गहरी चिंता व्यक्त की और प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने राज्य सरकार को बचाव अभियान और राहत उपायों के लिए केंद्र से हर संभव सहायता का भरोसा दिया। एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर विवेक कुमार ने बताया कि अब तक 10 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी सुरंग के अंदर कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है, इसलिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।सिक्किम के जिस सुरंग ने 10 मजदूरों की जान ले ली और 18 अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। झोलुंगे के समरडुंग में इस सुरंग को तीस्ता स्टेज-VI हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा रहा है, जो सिक्किम के सिरवानी गांव में प्रस्तावित एक जलविद्युत परियोजना है। यह ‘रन ऑफ द रिवर’ मॉडल पर आधारित है, यानी इसमें नदी के बहते पानी का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा और इसके लिए बड़े जलाशय की जरूरत नहीं होगी। इस परियोजना का उद्देश्य तीस्ता नदी की जलविद्युत क्षमता का चरणबद्ध (कैस्केड) तरीके से उपयोग करना है, ताकि नदी के विभिन्न हिस्सों में बिजली उत्पादन किया जा सके. 500 मेगावाट की क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट के सितंबर 2029 तक चालू होने की संभावना जताई गई है.
सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है.
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शुरुआत में इस परियोजना को लैंको समूह की कंपनी लैंको तीस्ता हाइड्रो पावर लिमिटेड (LTHPL) द्वारा विकसित किया जाना था, लेकिन कंपनी के वित्तीय संकट में फंसने के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की प्रक्रिया के तहत एनएचपीसी सबसे ऊंची बोलीदाता के रूप में सामने आई और अक्टूबर 2019 में कंपनी का अधिग्रहण कर लिया. परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से मार्च 2019 में मंजूरी दी गई थी. शुरुआती अनुमान के मुताबिक इसकी लागत 5,748.04 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 8,448.74 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. संशोधित लागत अनुमान को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
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हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की खासियत
तीस्ता-VI परियोजना में 125-125 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित की जाएंगी. इसके जरिए हर वर्ष लगभग 2,400 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली उत्पादन होने का अनुमान है, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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