अशोक झा/ बंगाल: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट और गहरा हो गया है। ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने अपनी जिला कमिटी का एलान कर दिया है, जिसमें ममता बनर्जी के करीबी रहे अनुब्रत मंडल को बीरभूम का अध्यक्ष बनाया गया है। कई बड़े चेहरों और प्रवक्ताओं की इस नई लिस्ट से बंगाल की राजनीति में एक नया पावर सेंटर खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के ऋतब्रत बनर्जी वाले गुट ने अपनी जिला कमिटी और अध्यक्षों की लिस्ट जारी कर दी है। इस घोषणा में सबसे हैरान करने वाला नाम अनुब्रत मंडल का है। बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। वह अब ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं। ऋतब्रत गुट ने उन्हें बीरभूम का नया जिला अध्यक्ष बनाया है। इस फैसले को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
क्या शांतनु सेन की नई भूमिका बदलेगी पार्टी का समीकरण?: ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने न केवल जिला अध्यक्षों की घोषणा की, बल्कि पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन को अपनी राज्य समिति में शामिल कर लिया है। पार्टी की बैठक में पूर्व पानीहाटी विधायक निर्मल घोष भी नजर आए। निर्मल घोष का नाम आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना से जुड़ी कथित जल्दबाजी में हुई अंत्येष्टि के विवाद में सामने आया था। हालांकि, ऋतब्रत बनर्जी ने साफ किया कि निर्मल घोष की मौजूदगी के बावजूद उनके बारे में बैठक में कोई चर्चा या फैसला नहीं लिया गया है। ऋतब्रत गुट की इस घोषणा की पांच बड़ी बातें: बीरभूम के मजबूत नेता अनुब्रत मंडल अब आधिकारिक रूप से ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में आ गए हैं।
प्रसून बंद्योपाध्याय को इस नए गुट का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। स्नेहाशीष चक्रवर्ती, अखरुज्जामन, शांतनु सेन, सुदीप राहा, कोहिनूर मजूमदार, संदीपान साहा और अपूर्व सरकार को प्रवक्ता बनाया गया है। दक्षिण कोलकाता में देबाशीष कुमार और उत्तर कोलकाता में संदीपान साहा को कमान सौंपी गई है। पार्टी के इस विभाजन और नए पदाधिकारियों की घोषणा से ममता बनर्जी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
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