-विधानसभा अध्यक्ष हो या अन्य मंत्री हाथों में झाड़ू थामे बुहारते रहे पथ
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल में आजादी के बाद भाजपा के सत्ता सुख का माहौल महाप्रभु श्रीजगन्नाथ जी की रथयात्रा में स्पष्ट झलक रहा था। आज है महाप्रभु श्रीजगन्नाथ जी की रथयात्रा। आज प्रभु श्रीमंदिर से बाहर आएंगे अपने रथ नंदीघोष में बैठकर भक्तों को दर्शन देने निकले। महाप्रभु जगन्नाथ अपने साथ-साथ बलभद्र माता सुभद्रा को भी लेकर आते हैं।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को राजधानी कोलकाता में भारी बारिश के बीच इस्कॉन की रथ यात्रा में शामिल हुए। पीले रंग का कुर्ता और सफेद धोती पहने शुभेंदु अधिकारी ने अल्बर्ट रोड स्थित इस्कॉन (ISKCON) की शोभायात्रा के शुभारंभ के अवसर पर परंपरागत रूप से भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की और रथ की रस्सी भी खींची। वही सिलीगुड़ी इस्कॉन मंदिर में विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस, मंत्री आनंदमय बर्मन, सांसद मनोज तिग्गा, परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह आदि ने भगवान के रथ को खींच एकता का संदेश दिया।
बुराई पर अच्छाई की हो जीत : शुभेंदु अधिकारी
इससे पहले शुभेंदु अधिकारी ने सुबह इस्कॉन मंदिर में विधिवत 'मंगल आरती' की और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा- इस पावन उत्सव का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। मैं इससे पहले भी कई बार यहां आ चुका हूं। यह मेरे लिए बहुत बड़ा अवसर है।मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि समाज में हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत हो।राज्य के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु सुबह से ही देश की सबसे पुरानी रथ यात्राओं में शामिल महेश की प्रसिद्ध रथ यात्रा में भाग लेने के लिए हुगली जिले में पहुंच रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सदियों पुराने इस उत्सव के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
तमलूक और मेचेदा की रथ यात्रा में शामिल होंगे सीएम
पश्चिम बंगाल के चीफ मिनिस्टर ने बताया कि वह कोलकाता के बाद पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलूक और मेचेदा में आयोजित होने वाले रथ यात्रा कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
राज्यभर में रथ यात्रा की धूम, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
समूचे राज्य में रथ यात्रा का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. राज्य के प्रमुख आयोजनों में हुगली जिले का ऐतिहासिक महेश और तटीय शहर दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्राएं विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।चतुर्भुज जगन्नाथ, कंठ शोभित कौसतुभः ॥पद्मनाभ, बेडगरवहस्य,चन्द्र सूरज्या बिलोचनःजगन्नाथ, लोकानाथ,निलाद्रिह सो पारो हरि,दीनबंधु, दयासिंधु,कृपालुं च रक्षकः की गूंज सुनाई पड़ रही थी
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