जुलूस में फेंके गए अंडे तो भड़की ममता बनर्जी ने चला दिये थप्पड, तीन लोगों को पीटा
जुलाई 09, 2026
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- भीड़, धक्का-मुक्की और फिर जड़ दिया थप्पड़! ममता बनर्जी का गुस्सा कैमरे में कैद, भाजपा ने कसा तंज
कहा,क्या देश में प्रदर्शन करने की भी इजाजत नहीं? ममता
- रैली के बाद ममता बनर्जी का कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ.
-तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि रैली के दौरान कई कार्यकर्ता घायल हुए
- पार्टी ने विरोधियों पर रैली में हंगामा करने का लगाया आरोप
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बरूईपुर में हुए जघन्य रेप और मर्डर मामले को लेकर सूबे की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। इस मामले में पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने और न्याय की आवाज बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरीं बरूईपुर में आयोजित एक विरोध मार्च के दौरान जबरदस्त हंगामा और बवाल हो गया।जानकारी के मुताबिक बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक निकाली गई रैली के दौरान ममता बनर्जी के काफिले की ओर अंडे फेंके गए. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने "चोर-चोर" के नारे भी लगाए. घटना के वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है.
रैली के दौरान हुआ विरोध प्रदर्शन: बताया जा रहा है कि इस रैली के रास्ते में मौजूद कुछ लोगों ने अचानक विरोध शुरू कर दिया. विरोध के दौरान अंडे फेंके गए और नारेबाजी की गई. हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. विपक्षी पार्टी दल और तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने आ सकते हैं। ममता ने आरोप लगा या कि इस मार्च के लिए बाकायदा कलकत्ता हाई कोर्ट से अनुमति ली गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न नहीं होने दिया गया. कई साल बाद ममता बंगाल की सड़कों पर 'चंडी अवतार' के रूप में उतरी. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी अब जनता की मुद्दों को लेकर शुभेंदु सरकार से आर-पार करेंगी?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद बंगाल पुलिस मूकदर्शक बनी रही और विपक्षी दल के इशारे पर उनके कार्यकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों पर बर्बरता से हमला किया गया। प्रोटेस्ट मार्च के दौरान हुए हंगामे और कार्यकर्ताओं पर हुए हमले से नाराज ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया. उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा. इस दौरान बचाव कर रहे एक टीएमसी कार्यकर्ता को ही ममता ने चांटा मार दिया।
ममता ने दिखाया उग्र रूप', अब क्या होगा बंगाल में?
ममता बनर्जी ने कहा, "राम का नाम बदनाम न करो. जब हाई कोर्ट ने इस रैली के लिए बकायदा इजाजत दी थी, तो पुलिस ने इस तरह की गुंडागर्दी की अनुमति कैसे दी? मैं सीधे तौर पर सिर्फ बीजेपी को दोष नहीं दे रही हूं, बल्कि असली कसूरवार यहां की पुलिस और प्रशासन हैं। यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी कि रैली शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो, लेकिन इसके बजाय उन्होंने जो किया वह शर्मनाक है।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?: ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस की शह पर विरोधी तत्वों को 10-10 मंच, डायस और माइक्रोफोन लगाने की छूट दी गई, जबकि टीएमसी कार्यकर्ताओं के वैध हैंड-माइक तक छीनकर तोड़ दिए गए।विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब टीएमसी के कई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला हुआ. ममता बनर्जी ने बताया कि उनके पास खबर आई कि टीएमसी की आईटी सेल चेयरपर्सन को उपद्रवियों ने चारों तरफ से घेर लिया है और उनके साथ मारपीट की जा रही है. यह सुनते ही वे खुद अपनी नेता को रेस्क्यू करने यानी बचाने के लिए मौके पर पहुंच गईं।पुलिस पर बरसीं ममता बनर्जी: लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, मुझे सूचना मिली कि हमारे आईटी सेल के अध्यक्ष को घेरकर उन पर हमला किया गया है। इसलिए मैं उन्हें बचाने गई. कानून कहां गया? हमारे बेटों और बेटियों को नारे लगाने से रोकने की कोशिश की गई. मैं बीजेपी को दोष नहीं दे रही हूं. मैं प्रशासन को दोष दे रही हूं। आपकी ज़िम्मेदारी थी कि रैली का आयोजन सुनिश्चित हो सके. पूर्व सीएम ने कहा कि इसके बजाय पुलिस ने क्या किया? भाजपा के लोगों को यहां लाया गया. फिर उन्होंने हमारे हैंड माइक छीन लिए. जबकि हाई कोर्ट ने हमें हैंड माइक इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। हमारे कार्यकर्ताओं की पिटाई की गई। उन्होंने हमारे कार्यकर्ताओं को पीटा।
क्या देश में प्रदर्शन करने की भी इजाजत नहीं?- टीएमसी
उन्होंने भावुक और गुस्से में कहा कि हमारी महिलाओं को बुरी तरह पीटा गया है, लड़कों, लड़कियों और यहां तक कि वरिष्ठ नागरिकों को भी नहीं बख्शा गया. कई कार्यकर्ताओं के मुंह से खून निकल रहा है और उन्हें अस्पताल तक जाने से रोका जा रहा है. ममता बनर्जी ने बंगाल की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसकी तुलना उत्तर प्रदेश से कर दी. उन्होंने कहा कि आज बंगाल में जो चल रहा है वह पूरी तरह से अराजकता है, जो यूपी से भी बदतर हो चुकी है.
न्यायालय के आदेश की अवहेलना- ममता
ममता के अनुसार, "पुलिस अब पूरी तरह से बीजेपी के कैडर की तरह काम कर रही है." लोकतांत्रिक अधिकार सवाल उठ रहा है कि क्या अब एक लोकतांत्रिक देश में किसी पीड़ित के इंसाफ के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार भी विपक्ष से छीन लिया जाएगा?।टीएमसी प्रमुख ने साफ किया कि इस शांतिपूर्ण मार्च को रोकने के लिए सुबह से ही धमकियां दी जा रही थीं. उन्होंने कहा, "हमें सुबह से ही डराने और धमकाने की कोशिश की जा रही थी. पुलिस मूकदर्शक बनी रही और हमारे लोगों पर अत्याचार होने दिया गया. हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं." इस घटना के बाद कोलकाता में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी हुए इस बवाल ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है. ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वे इस नाइंसाफी और गुंडागर्दी के खिलाफ पीछे हटने वाली नहीं हैं और बरूईपुर मामले में न्याय मिलने तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
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