- कहा अगर नेत्री मान लेती है शर्त तो सभी बागी नेता होंगे उनके साथ
अशोक झा/ कोलकाता: उत्तर बंगाल से टीएमसी के पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बेहद सीनियर नेता और उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है।बागी गुट में शामिल हो चुके घोष ने रविवार को खुला ऐलान किया कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग करने में कामयाब हो जाती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे के ज्यादातर नाराज नेता वापस टीएमसी में लौट आएंगे। रवींद्रनाथ घोष का ममता बनर्जी का साथ छोड़कर विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट में जाना कूर्चबिहार समेत पूरे बंगाल में एक बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।क्या ‘दीदी’ के हाथों में कोई ताकत बची है?’
दो दशकों से अधिक समय तक तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे ममता बनर्जी के वफादार रवींद्रनाथ घोष ने अब सीधे पार्टी प्रमुख की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा- क्या सच में अब दीदी के हाथों में कोई ताकत बची है? शक्ति का केंद्र कहीं और चला गया है और नाकाबिल लोगों को अहम जिम्मेदारियां दे दी गयी हैं। अगर ममता बनर्जी कुछ सुधार करना भी चाहें, तो अब वे असहाय हैं।
समानांतर सरकार चलाने की तैयारी:
यह बड़ा सियासी घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब बागी गुट ने पूरी तृणमूल कांग्रेस पर कब्जा करने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। इस गुट ने राज्य से लेकर जिला स्तर तक अपनी खुद की अलग और समानांतर समितियां बनाकर पार्टी आलाकमान को सीधी चुनौती दी है। बागियों के इस आक्रामक कदम के बाद ममता बनर्जी के कई पुराने और बेहद भरोसेमंद सिपहसालार भी दीदी का साथ छोड़ रहे हैं। इनमें बीरभूम के कद्दावर और रसूखदार नेता अनुब्रत मंडल का नाम भी शामिल है, जो अब बागी खेमे में खड़े नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बागी गुट बहुत जल्द रवींद्रनाथ घोष को कूचबिहार का नया जिला अध्यक्ष घोषित कर दिया है।रवींद्रनाथ घोष ने कहा कि अभिषेक बनर्जी किसी जन आंदोलन से निकलकर राजनीति में नहीं आए हैं। उन्होंने आई-पैक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2011 और 2016 के चुनावों में आई-पैक नहीं थी, फिर भी टीएमसी ने जीत हासिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में यही संस्था पार्टी के फैसलों पर हावी हो गई और अंत में पार्टी को नुकसान पहुंचाकर अलग हो गई। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अंदरूनी कलह लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने रविवार को बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट का दामन थाम लिया। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को फिलहाल सक्रिय राजनीति से अलग कर दें, तो पार्टी छोड़ चुके अधिकांश नेता और कार्यकर्ता वापस टीएमसी में लौट सकते हैं। रवींद्रनाथ घोष का यह फैसला कूचबिहार में टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बागी गुट उन्हें कूचबिहार जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दे दिया है।अभिषेक और आई-पैक को ठहराया हार का जिम्मेदार
रवींद्रनाथ घोष ने विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के लिए अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अभिषेक के फैसलों की वजह से पार्टी को भारी नुकसान हुआ। रवींद्रनाथ घोष ने आरोप लगाया कि 80 से अधिक मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के टिकट काट दिए गए और कई नेताओं को संगठन से भी हटा दिया गया। इससे कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी बढ़ी, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा।
'क्या अब भी ममता के हाथ में है पार्टी की कमान?'
पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या ममता बनर्जी के पास अब भी पार्टी की वास्तविक कमान है। उन्होंने कहा कि सत्ता कुछ लोगों के हाथों में सिमट गई है और अनुभवहीन लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे दी गईं। उनके अनुसार, कई बार ममता बनर्जी चाहकर भी फैसले नहीं ले सकीं।
'हम किसी गुट में नहीं, असली टीएमसी के साथ हैं'
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने ममता बनर्जी से सीधे बात करने के बजाय बागी गुट का साथ क्यों चुना, घोष ने कहा कि टीएमसी केवल एक ही है और वे उसी के साथ हैं जहां पार्टी के अधिकतर नेता और कार्यकर्ता हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर बंगाल के कई विधायक और नेता अब एक साथ आ चुके हैं और वे कार्यकर्ताओं के हित में यह फैसला ले रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, उन्हें संगठन में जिम्मेदारियां दी गईं और अब वे छिपे हुए हैं, जबकि सामान्य कार्यकर्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा ने भी साधा निशाना
इधर, केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने टीएमसी के भीतर चल रहे विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी दो नावों में बंट चुकी है और दोनों नावें डूब रही हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी के नेता अपनी पसंद से किसी भी नाव में बैठ सकते हैं, लेकिन दोनों का अंजाम एक जैसा होगा।
बागी गुट लगातार मजबूत कर रहा संगठन
शनिवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता में दो दिन की बैठक के बाद अपनी समानांतर राज्य और जिला समितियों की घोषणा की थी। इससे पहले यह गुट ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने, वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुनने और चुनाव आयोग से खुद को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता देने की मांग भी कर चुका है। इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन को प्रमुख प्रवक्ता बनाया गया है, जबकि कई पूर्व मंत्री और विधायकों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे अनुब्रत मंडल को बागी गुट ने बीरभूम जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिसे इस गुट की बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
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