- सिलीगुड़ी में गूंजायमन होगा ‘जय जगन्नाथ’, उल्टा रथ यात्रा में दिखेगा भगवान का अनूठा संगम
अशोक झा/ सिलीगुड़ी:पूर्वी भारत का प्रवेशद्वार। ऐतिहासिक शहर सिलीगुड़ी आज पूरी तरह भगवान श्री जगन्नाथ की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आयोग। मौका था चौगान मैदान से शुरू हुई 18वीं भव्य रथयात्रा का, जिसने न केवल श्रद्धालुओं को आस्था के सूत्र में बांधा, बल्कि सामाजिक सौहार्द और जिम्मेदारी की भी एक नई मिसाल पेश की जाएगी।
जयघोष से गूंजे शहर में भगवान उठाई पालकी
दोपहर जैसे ही भगवान श्री जगन्नाथ, भइया बलभद्र और देवी सुभद्रा के पावन विग्रह रथ पर विराजमान हुए, पूरा शहर गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर स्थानीय विधायक अजय सोलंकी और भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने भी अपनी हाजिरी लगाई। इस दौरान माहौल में ऐसा उल्लास था कि विधायक और श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और पारंपरिक नाटी डालकर उत्सव की खुशियों को दोगुना कर दिया।
आस्था के साथ स्वच्छता: नन्हे हाथों ने पेश की मिसाल
इस भव्य आयोजन के समानांतर एक बेहद प्रेरणादायक अभियान भी देखने को मिला। रथयात्रा बैनर तले शिक्षकों और छात्रों की टीम ने हर साल की तरह इस बार भी स्वच्छता की कमान संभाली। जैसे ही मैदान से मुख्य यात्रा आगे बढ़ी, इस संस्था के बच्चों और अध्यापकों ने पूरे मैदान की सफाई व्यवस्था का जिम्मा उठा लिया। यही नहीं, रथ यात्रा जिस-जिस मार्ग से आगे बढ़ रही थी, यह पूरी टीम पीछे-पीछे पूरे रास्ते को चकाचक साफ करते हुए चल रही थी, ताकि शहर में गंदगी न फैले। भक्ति के साथ पर्यावरण के प्रति इस जिम्मेदारी को पूरे शहर ने सराहा।
इस्कॉन तक सुरक्षा के इंतजाम और भंडारों से सजी रही नगरी
कड़कती धूप और उमस के बीच श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे शहर में स्वयंसेवकों द्वारा शीतल पेयजल, छबील, फल और विभिन्न प्रकार के प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। पुलिस और प्रशासन के पुख्ता इंतजामों के चलते हजारों की भीड़ के बावजूद यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुचारु रही।
श्रद्धा, सेवा, समर्पण और आपसी सौहार्द का यह महापर्व नाहन के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ गया। हर आंख प्रभु के दर्शन पाकर सजल थी और हर दिल में बस यही प्रार्थना थी कि यह पावन परंपरा हर साल इसी तरह भाईचारे और भव्यता के साथ आगे बढ़ती रहे।
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