- मदन मित्रा ममता के साथ उस समय से हैं जब कांग्रेस से अगल होकर उन्होंने अपनी टीएमसी की स्थापना की थी
- सवाल क्या अब सिर्फ भतीजा के साथ ही रह जाएगी अकेले
अशोक झा/ कोलकाता: ममता बनर्जी के साथ रहने वाले सबसे भरोसेमंद नेताओं ने अब एक एक कर गद्दारी कर बागी खेमा में जा रहे है। जो कल तक मरते दम का हुंकार भरते थे वह अब अभिषेक बनर्जी को बुरा भला कहते हुए बागी गुट का दामन थाम लिया है। आज बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक और करीबी नेता ने तगड़ा झटका दिया है। बुधवार को तृणमूल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन मित्रा टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देकर बागी गुट में शामिल हो गए हैं। जिसके बाद ममता बनर्जी के वफादारों का दायरा और सिमट गया है। मदन मित्रा ममता दीदी के साथ उस समय से हैं जब कांग्रेस से अगल होकर उन्होंने अपनी टीएमसी की स्थापना की थी। लेकिन अब ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी रहे मित्रा ने अचानक बगावती तेवर दिखाते हुए इस्तीफा दे दिया। मदन मित्रा का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने एक घोटाला केस में उनकी पत्नी समेत दो बेटों को पूछताछ के लिए समन भेजा है। जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि मित्रा ने क्या ये इस्तीफा भयभीत होकर दिया या कोई और है वजह?।
मदन मित्रा बोले- मैंने अभिषेक से कहा अभी चले जाओ लेकिन..
मदन मित्रा ने टीएमसी छोड़ने के बाद कहा, "मैंने अभिषेक बनर्जी को सुझाव दिया था कि वो छह माह ये एक साल के लिए पार्टी से हट जाएं। मैंने उनसे कहा था कि आइए टीएमसी को मजबूत करते हैं ओर फिर आप वापस आकर अपनी जगह ले सकते हैं लेकिन वो नहीं माने और इनकार कर दिया। अभिषेक ने कहा मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा। पार्टी डूब रही है, नाव डूब चुकी है। उन्होंने कहा पार्टी ने तय कर दिया है कि सभी मर जाएं तो ठीक लेकिन अभिषेक को बचाना जरूरी है। यह बहुत दुखदायी है।"
मदन मित्रा बोले- देखते हैं कौन सा घोड़ा आगे निकलता है?: मित्रा ने आरोप लगाया कि "टीएमसी सबकी है लेकिन ऐसा लग रहा था कि बस अभिषेक की सेवा करने तक ही सीमित रह गई है। मैं ममता जी से गुजारिश करता हूं कि आइए इसे एक मैराथन की तरह देखे और हम जरूर रास्ते में एक दूसरे से मिलेंगे। मित्रा ने कहा देखते हैं कौन सा घोड़ा आगे निकलता है।" उन्होंने दावा किया कि मैंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है लेकिन मैं अभी भी विधायक हूं। मैं टीएमसी से जुड़ी चीज छोड़ दी है इसलिए काम-काज के लिए अब मैं टीएमसी एमएलए नहीं रहा। कौन है मदन मित्रा?: मदन मित्रा पश्चिम बंगाल के कमरहाटी विधानसभा से विधायक हैं। मदन मित्रा की गिनती ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में होती थी। अनुभवी नेताओं के गिने जाने वाली मदन मित्रा पूर्व सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। टीएमसी से पहले कांग्रेस की यूथ विंग में थे और इंडियन यूथ कांग्रेस में कई पदों पर काम किया।
शारदा चिट फंड षणयंत्र केस में काट चुके हैं जेल की सजा
1998 में ममता बनर्जी द्वारा स्थापित तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। 2011 में पहली विधायक निर्वाचित हुए और राज्य मंत्री की कुर्सी संभाली। मित्रा को फेमस शारदा चिट फंड षणयंत्र केस में अरेस्ट किया गया था और 22 महीने बाद जमानत पर जेल से रिहा हुए थे। क्या भय के कारण दिया टीएमसी से इस्तीफा?: दरअसल, मदन मित्रा कथित म्युनिसिपल भर्ती घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों के घेरे में हैं। अक्टूबर 2025 में इस मामले में सीबीई ने मित्रा के घर की पांच घंटे तलाशी ली थी और जून 2026 में ईडी ने इनके घर पर छापेमारी की थी। वहीं एक दिन पहले मंगलवार को ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी और दो बेटों को पूछताछ के लिए समन भेजा हैं । जिसके चंद घंटे बाद मित्रा ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से बगावत कर उनकी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि मित्रा ने ये इस्तीफा भय में आकर दिया है।
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