- केंद्रीय टीम कर रही क्षेत्र का दौरा, पीएम मोदी खुद रख रहे इस पर नजर
बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा/ केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम रामचंद्रुडु के नेतृत्व में छह सदस्यीय केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया।प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को शिवसागर जिला आयुक्त कार्यालय में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ की स्थिति, राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि असम में बाढ़ के हालात अब भी गंभीर हैं। अब तक 66 की मौत हो चुकी है। 7 लाख से ज्यादा लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है और आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़कर 70 से 75 तक पहुंच सकती है।असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, गुजरात और दादरा व नगर हवेली में भारी बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। सेना को कमान संभालनी पड़ी है, जिसने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम से लेकर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में घनघोर बारिश का अलर्ट जारी किया है। असम के हालात जानने के लिए पीएम मोदी ने किससे की बात? असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को फोन कर हालात की जानकारी ली। सोनोवाल बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर हैंअसम के शिवसागर जिले में आई बाढ़ को पिछले 50 वर्षों की सबसे भयानक बाढ़ बताया गया है. बाढ़ से करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लोग अब भी लापता हैं।असम के शिवसागर जिले में आई हालिया विनाशकारी बाढ़ पिछले 50 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ साबित हुई है. यह जानकारी शिवसागर के उपायुक्त मृदुल यादव ने को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा पुनर्वास की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि जिला प्रशासन विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर दिन-रात सामान्य स्थिति बहाल करने में जुटा हुआ है। उपायुक्त ने बताया कि जिले के तीन राजस्व सर्किलों के अंतर्गत आने वाले 301 राजस्व गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और लगभग चार लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं. सबसे अधिक नुकसान नाज़िरा और शिवसागर विधानसभा क्षेत्रों में हुआ है, जहां हजारों परिवारों ने अपने घर, खेती और आजीविका खो दी है। मृदुल यादव ने बताया कि बाढ़ में अब तक 66 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सात लोग अभी भी लापता हैं. लापता लोगों की तलाश के लिए लगातार खोज अभियान चलाया जा रहा है और प्रशासन उन्हें खोजने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।20,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
उपायुक्त ने बताया कि व्यापक राहत एवं बचाव अभियान के तहत अब तक लगभग 20,000 लोगों को जलमग्न क्षेत्रों से सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है. यह अभियान राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा स्थानीय स्वयंसेवकों के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया. उन्होंने बताया कि बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की 60 नौकाओं के साथ-साथ 62 स्थानीय देशी नौकाओं का उपयोग किया गया, जिनकी मदद से दूरदराज के जलमग्न गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
पानी घटने के बाद मलबा हटाने का कार्य तेज
उपायुक्त ने कहा कि बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के साथ ही जिला प्रशासन ने पुनर्स्थापन कार्यों में तेजी ला दी है. सड़कों, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और अन्य स्थानों पर जमा कीचड़, रेत और मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों और फॉकलैंड मशीनों को लगाया गया है, ताकि आवागमन बहाल किया जा सके और राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सके.
50 से अधिक राहत शिविर संचालित
मृदुल यादव ने बताया कि प्रभावित लोगों को आश्रय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में 50 से अधिक राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र स्थापित किए गए हैं. उन्होंने कहा कि राहत वितरण का पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरा चरण लगातार जारी है ताकि सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री की विशेष "सीएम फैमिली किट" का वितरण शीघ्र शुरू किया जाएगा. इस किट में दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं शामिल होंगी, जिससे प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिलेगी।
हेलीकॉप्टर से पहुंचाई जा रही राहत सामग्री
जिन गांवों तक सड़क मार्ग से पहुंचना अभी भी संभव नहीं है, वहां हेलीकॉप्टर के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है. उपायुक्त ने बताया कि अब तक लगभग 10,000 किलोग्राम खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं हेलीकॉप्टर के जरिए लगभग 2,000 प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि जहां तक सड़क संपर्क बहाल नहीं हुआ है, वहां आवश्यकता के अनुसार हवाई राहत अभियान जारी रहेगा.
स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क
मृदुल यादव ने बताया कि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है. दस्त, हैजा और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयों का भंडारण किया गया है. उन्होंने बताया कि 38 मेडिकल टीमें जिले के 200 से अधिक राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं. ये टीमें मरीजों के उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चला रही हैं और पेयजल की गुणवत्ता की भी लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी प्रकार की महामारी फैलने से रोका जा सके।अगले दो से तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण
उपायुक्त ने कहा कि नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के कई हिस्सों में अब भी जलभराव बना हुआ है, जिससे सामान्य स्थिति बहाल करने में कठिनाइयां आ रही हैं. उन्होंने कहा, "अगले दो से तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं. पानी का स्तर लगातार घट रहा है, लेकिन कई इलाके अब भी जलभराव और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण प्रभावित हैं. जिला प्रशासन के सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जा सके." उपायुक्त ने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने, आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने और पूरी तरह सुरक्षित होने तक जलमग्न तथा असुरक्षित क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की।
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