- मंदिर का कपाट खुलने के बाद लगातार बढ़ रहा भक्तों का भीड़
- सीएम ने कहा अब तक आठ लाख से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन
अशोक झा/ गौहाटी: अंबुबाची मेला समाप्त हो गया है लेकिन भक्तों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वशर्मा ने कहा कि अबतक आठ लाख से ज्यादा भक्तों ने दर्शन कर लिया है। सनातन तंत्र परंपरा में योनितत्त्व को केवल भौतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में देखा गया है। जिस प्रकार शिव चेतना के प्रतीक हैं, उसी प्रकार शक्ति सृजन, संरक्षण और परिवर्तन की आधारशिला हैं। शिव और शक्ति के इस दिव्य मिलन से ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का संचालन होता है।
असम स्थित माँ कामाख्या शक्तिपीठ को तंत्र साधना का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहाँ माता सती का योनिभाग गिरा था, इसलिए यह स्थान सृजनशक्ति, मातृत्व, ऊर्जा और दिव्य चेतना का प्रतीक माना जाता है। संसार के करोड़ों साधक माँ कामाख्या को आदिशक्ति, कुण्डलिनी और समस्त शक्तियों के मूल स्रोत के रूप में पूजते हैं।
तंत्र शास्त्र में स्त्री को केवल शरीर नहीं, बल्कि ब्रह्मी, वैष्णवी और रौद्री शक्तियों का जीवंत स्वरूप माना गया है। प्रत्येक स्त्री में ज्ञानशक्ति, इच्छाशक्ति और क्रियाशक्ति का दिव्य त्रिकोण विद्यमान है। यही कारण है कि तंत्र परंपरा में नारी को आदर, सम्मान और शक्ति के रूप में देखा जाता है।
माँ कामाख्या की उपासना साधक को आत्मशक्ति, आत्मविश्वास, आध्यात्मिक उन्नति और कुण्डलिनी जागरण के मार्ग पर अग्रसर करती है। तांत्रिक परंपरा के अनुसार शक्ति की आराधना से साधक के भीतर छिपी चेतना जागृत होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। माँ कामाख्या हमें यह संदेश देती हैं कि सृष्टि की प्रत्येक शक्ति का सम्मान करें, नारी को आदिशक्ति के रूप में देखें और अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना को पहचानें। जब शक्ति प्रसन्न होती हैं, तब ज्ञान, समृद्धि, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति के द्वार स्वतः खुल जाते हैं।
माँउन्होंने इसे असम की आध्यात्मिक विरासत और सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि "जय मां कामाख्या। अंबुबाची महायोग 2026 के पावन अवसर पर 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने मां कामाख्या धाम को आस्था के विराट संगम में बदल दिया है।
उन्होंने कहा कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी इस वार्षिक धार्मिक आयोजन के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है।
सरमा ने कहा, "मां के चरणों में उमड़ रही यह असीम श्रद्धा असम की आध्यात्मिक शक्ति और सनातन परंपरा की अमर चेतना का सजीव प्रमाण है।"
उन्होंने बताया कि अंबुबाची महायोग के दौरान नीलाचल पहाड़ियों पर लगभग 8 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जो इस वार्षिक धार्मिक आयोजन के इतिहास में सबसे बड़ी भीड़ में से एक मानी जा रही है।
अंबुबाची महायोग देश के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक कामाख्या मंदिर का प्रमुख धार्मिक उत्सव है।यह पर्व देवी कामाख्या के वार्षिक रजस्वला होने की प्रतीकात्मक मान्यता से जुड़ा है और हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, तपस्वी और पर्यटक इसमें शामिल होते हैं.
परंपरा के अनुसार इस दौरान मंदिर तीन दिनों तक बंद रहता है, जो देवी के वार्षिक रजस्वला काल का प्रतीक माना जाता है. चौथे दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं। असम सरकार ने इस आयोजन के लिए सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधाओं और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यापक व्यवस्था की थी. विभिन्न सरकारी विभागों ने आपसी समन्वय के साथ बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन सुनिश्चित किए।
सरकार का मानना है कि इस बार श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या ने असम में धार्मिक पर्यटन को नई गति दी है और अंबुबाची महायोग की राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया है।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/