ये हैं बनारस कथक घराने के कुशल कथक कलाकार विशाल कृष्ण। जैसा नाम वैसा काम। विशाल कृष्ण मंचों पर कृष्ण का वेश धर कर कथक नृत्य करते रहते हैं। इस दौरान उनकी भावभंगिमा देखने लायक होती है। विशाल कृष्ण ड्रीम गर्ल हेमामालिनी के साथ आठ से दस बार कृष्ण बनकर नृत्य कर चुके हैं। विशाल कृष्ण के जीवन का यह एक सुखद अहसास था जिसे उन्होंने महसूस किया। संगीत नाटक एकेडमी की ओर से विशाल कृष्ण एक माह के लिए चाइना विजिट पर गये थे। कोरिया में एक हफ्ते के लिए गए थे। यहां इतनी भीड़ थीं की दर्शकों को मंच पर बिठाना पड़ा।
विशाल कृष्ण का जन्म बनारस कथक घराने के प्रवर्तक एवं परदादा आचार्य सुखदेव महाराज के यहां हुआ था। विशाल कृष्ण के नृत्य की शिक्षा महज तीन वर्ष की आयु में ही प्रारंभ हो गई थी। उनकी प्रथम गुरु कथक क्वीन एवं दादी बुआ सितारा दैवी थीं। उन्होंने सर्वप्रथम सितारा देवी इसके बाद अपने पिता पंडित मोहन कृष्णा एवं प रवि शंकर मिश्र से कथक के गुर सीखा। विशाल कृष्ण नटराज पंडित गोपीकृष्ण के भतीजे हैं। विशाल कृष्ण के नृत्य में ग़ज़ब की स्फूर्ति, सुंदर अंग संचालन, कुशल अभिनय देखने को मिलता है। इन्हीं सब वजहों विशाल कृष्ण को कथक नृत्य में एक अलग पहचान मिली। विशाल कृष्ण बनारस कथक घराने की चौथी जनरेशन के हैं। इसकी नींव उनके परदादा आचार्य सुखदेव महाराज ने रखी थी। उस जमाने में महिलाओं को मंच पर नृत्य करना वर्जित था। सर्वप्रथम स्व सितारा देवी की बड़ी बहन अलखनंदा ने मंच पर नृत्य पेश किया। आज देश में जो भी महिला कलाकार मंचों पर जो भी कथक नृत्य कर रही हैं उसमें अलखनंदा का बहुत बड़ा योगदान रहा। विशाल कृष्ण दादा स्व दुर्गा प्रसाद रहे जबकि छोटे दादा स्व चौबे महाराज जी थे। पिछले दिनों अस्सी घाट पर एक कार्यक्रम के दौरान विशाल कृष्ण से मुलाकात हुई। ( काशी के नामचीन पत्रकार राधेश्याम कमल की कलम से )
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