अभिषेक बनर्जी को सीआईडी की तीसरी नोटिस, कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़े में बढ़ेगी मुश्किलें
जून 09, 2026
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- पार्टी नेताओं का साथ तो दूर बन गए ज्यादातर बागी, अभिषेक के खिलाफ उगल रहे जहर
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़े के मामले में राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) ने तीसरी बार समन जारी किया है।इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को उजागर किया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
जानकारी के मुताबिक, CID ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी उन्हें दो बार बुलाया गया था, लेकिन वे जांच एजेंसी के सामने उपस्थित नहीं हुए। अब जारी किए गए नए समन में उन्हें कल यानि मंगलवार को समय के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
क्या है पूरा मामला?
ये मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों से जुड़ा है। कुछ विधायकों ने दावा किया था कि प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर बिना अनुमति के लगाए गए। इसके बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और जांच शुरू हुई। चूंकि संबंधित प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अभिषेक बनर्जी की भूमिका बताई जा रही है, इसलिए जांच एजेंसी उनसे पूछताछ करना चाहती है।
मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हाल ही में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। विधानसभा में विपक्षी खेमे की ताकत बढ़ने और कई विधायकों के रुख बदलने के बाद राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं. ऐसे माहौल में CID की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
TMC के अंदर सबकुछ ठीक नहीं:
इस बीच, पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें भी सामने आ रही हैं। कुछ नेताओं के बागी रुख अपनाने के बाद TMC नेतृत्व दबाव में दिखाई दे रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों ने ये संकेत दिया है कि पार्टी के अंदर सब कुछ सामान्य नहीं है। हालांकि TMC नेतृत्व लगातार दावा कर रहा है कि पार्टी एकजुट है और विरोधी दल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मामला केवल एक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है। अगर जांच आगे बढ़ती है और नए तथ्य सामने आते हैं, तो इससे राज्य की सियासी तस्वीर प्रभावित हो सकती है. उधर, विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार और TMC नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है। वहीं सत्तारूढ़ दल का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।
ममता बनर्जी के सामने करो या मरो की स्थिति: ममता बनर्जी इस समय सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। विधानसभा में 58 विधायक विद्रोही। लोकसभा में 20 सांसद बागी। अभिषेक बनर्जी पर परिवारवाद के आरोप। I-PAC जैसी एजेंसियों पर नाराजगी। चुनावी रणनीति की नाकामी। INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के दौरान ही विद्रोह चरम पर पहुंचा। ममता अब सुलह और समझौते का रुख अपनाती दिख रही हैं, लेकिन टूट की रफ्तार तेज है।
बंगाल राजनीति का बदलता समीकरण
पश्चिम बंगाल में 2011 से TMC का शासन था। शुरू में 'परिवर्तन' का नारा कामयाब रहा, लेकिन बाद में हिंसा, भ्रष्टाचार, संदेशखाली (Sandeshkhali) जैसे मुद्दे, RG Kar कांड और तुष्टीकरण की राजनीति ने जनता को नाराज किया। भाजपा ने 'असली परिवर्तन' का वादा कर फायदा उठाया। सुवेंद्र अधिकारी (पूर्व TMC नेता) अब बीजेपी के टिकट पर मुख्यमंत्री हैं। उनका TMC के पुराने नेताओं से संपर्क विद्रोह को मजबूत कर रहा है।
जून मालिया जैसे चेहरे क्यों टूट रहे हैं?
जून मालिया फिल्मी बैकग्राउंड वाली नेता हैं। ऐसे कई चेहरे (जैसे नुसरत जहां, शताब्दी रॉय आदि) TMC में लाए गए थे। लेकिन हार के बाद असंतोष बढ़ा। वजह है, वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा। अभिषेक बनर्जी का बढ़ता दबदबा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान न देना। संगठनात्मक ढांचे का कमजोर होना। जून मालिया का मेदिनीपुर जैसे क्षेत्र से जुड़ाव और उनकी लोकप्रियता उन्हें बागी गुट के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।
TMC का अस्तित्व संकट में
जून मालिया का बागी गुट में शामिल होना ममता बनर्जी के लिए व्यक्तिगत झटका है। वे ममता की करीबी मानी जाती थीं। शताब्दी रॉय के घर हुई बैठक और सुवेंद्र अधिकारी की सक्रियता दिखाती है कि खेल अब सिर्फ दिल्ली तक नहीं, बल्कि कोलकाता की सत्ता तक पहुंच गया है। टीएमसी का भविष्य अनिश्चित है। 15 साल की सत्ता के बाद विपक्ष में बैठकर पार्टी को फिर से खड़ा करना आसान नहीं होगा। दर्शक, कार्यकर्ता और नेता अब बदलाव की मांग कर रहे हैं।
क्या ममता इस संकट को संभाल पाएंगी? क्या जून मालिया जैसे और चेहरे सामने आएंगे? क्या TMC टूटकर दो हिस्सों में बंट जाएगी? बंगाल की राजनीति के ये सवाल आने वाले दिनों में जवाब तलाश रहे हैं।
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