- श्रीराम के लिए जिसने अपना जीवन किया समर्पित वही भरोसे का जनाजा देख दे दिया त्यागपत्र
- इनके खिलाफ एफआईआर नहीं परंतु नैतिकता के आधार पर उठाया बढ़ा कदम
श्रीराम में लगी ऐसी लगन की लोग तो उन्हें प्यार से कहने लगे थे
रामलला का पटवारी
अशोक झा/ अयोध्या: राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रोजाना देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने और अपनी अटूट श्रद्धा के साथ दान पेटी में चढ़ावा चढ़ाने पहुंचते हैं। लेकिन इसी पावन धाम के भीतर बैठे कुछ जिम्मेदार लोगों ने भक्तों की आस्था और भरोसे का ऐसा जनाजा निकाला, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।इसके साथ ही ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को ट्रस्ट से इस्तीफा देने की सलाह दी है। माना जा रहा है कि दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट को सौंप दिया है, जिस पर आगे होने वाली ट्रस्ट की बैठक में विचार होगा। राम मंदिर ट्रस्ट ही इस पर फैसला लेगा, क्योंकि ट्रस्ट एक ऑटोनोमस बॉडी है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि चंदा चढ़ावा चोरी के आरोपों के बीच चंपत राय अनिल मिश्रा, दोनों पर इस्तीफा देने का दबाव था। दोनों ही विपक्ष के निशाने पर थे।इस बीच, शुक्रवार को चंपत राय ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को अपना इस्तीफा सौंप दिया। सूत्रों के अनुसार, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है। चंपत राय मंदिर के सबसे ताकतवर शख्स थे। पूरे मंदिर की जिम्मा उन्हीं के पास था। राय के बाद ट्रस्टी अनिल मिश्रा गोपाल राव मंदिर के दूसरे तीसरे सबसे ताकतवर शख्स थे। 8 लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार: इससे पहले, चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल 8 आरोपियों को गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया था। सभी आरोपियों को आज कोर्ट में पेश करके पुलिस 14 दिनों की रिमांड मांगी। बता दें, गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पुलिस ने 8 नामजदों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।इस दौरान आरोपियों को ले जाए जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।पुलिस ने आरोपियों के पास से अब तक 79 लाख 85 हजार 493 रुपये की भारी-भरकम राशि बरामद की है।इस मामले में सोमवार को सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा जहां से पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई बढ़ाएगी।
करीब 80 लाख रुपये की बड़ी बरामदगी: जांच एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपियों के ठिकानों और उनके पास से कुल 79,85,493 रुपये (लगभग 80 लाख रुपये) बरामद किए हैं.। दान के पैसों की इतनी बड़ी रिकवरी को इस केस में पुलिस की बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.।सामने आई जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए कुल 8 आरोपियों में से 7 आरोपियों के पास से ही पैसों की बरामदगी हुई है.। इन सात लोगों के अलग-अलग ठिकानों से चोरी की गई राशि के हिस्से बरामद किए गए हैं।
रिटायर्ड बैंक कर्मी का क्या है रोल?: इस मामले में गिरफ्तार एक प्रमुख आरोपी और रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव के पास से पुलिस को कोई कैश या अमाउंट बरामद नहीं हुआ है।पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि भले ही सुभाष श्रीवास्तव के पास से सीधे तौर पर पैसे न मिले हों। लेकिन वे इस पूरी चोरी और वित्तीय हेरफेर के मुख्य षड्यंत्र में शामिल थे।
हालांकि, FIR में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा सहित अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जिन आठ नामजद लोगों पर एफआईआर दर्ज करवाई है, उनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव मनीष यादव शामिल हैं. आठों आरोपियों के खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात आपराधिक षड़यंत्र सहित विभिन्न आरोपों में बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।पुलिस ने इन्हीं आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।आपको बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को ही एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद गुरुवार को मामले में केस दर्ज किया गया और 8 लोगों को आरोपी बनाया गया। आरोपियों में चंपत राय के करीबी और ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम भी शामिल हैं। अन्य आरोपियों के नाम सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्र हैं। राम मंदिर केस में अब आगे क्या होगा?: चंपत राय के इस्तीफे के कयास उसी समय लगाए जाने लगे थे, जब सोमवार को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। चंपत राय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महासचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इसके अलावा अनिल मिश्रा ट्रस्ट में सदस्य थे।विपक्ष लगातार चंपत राय का नाम इस मामले में उछाल रहा था और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था। मामले में चंपत राय की चुप्पी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। दोनों ने महंत नृत्यगोपाल दास को अपना इस्तीफा सौंपा है।यह कदम फैसला एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में मिली मजबूत सिफारिशों के बाद उठाया गया है। एसआईटी की सिफारिश के आधार पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है। इन इस्तीफों को जांच के दौरान की गई कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. बता दें कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम एफआईआर में नहीं था लेकिन फिर भी दोनों ने नैतिकता के आधार पर पद छोड़ दिया है। उनके नामों पर सियासत बहुत तेज थी. अब तक इस मामले में 8 गिरफ्तारियां और दो इस्तीफे हो चुके हैं।
इस्तीफे पहले ही हो जाने चाहिए थे-सपा सांसद
फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि ये इस्तीफे तो जांच से पहले ही हो जाने चाहिए थे। एफआईआर में इनके नाम भी होने चाहिए थे. जिनकी जिम्मेदारी चढ़ावे के लोखे-जोखे की थी, उनसे तो पहले ही इस्तीफे लेने चाहिए थे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में करोड़ों लोग आकर चढ़ावा चढ़ाते हैं और माथा टेकते हैं, ये देश और पूरे राष्ट्र का सवाल है. मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में जांच होनी चाहिए।वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि सिर्फ चंपत राय के इस्तीफे से क्या होगा. यह काफी नहीं है. उनसे भी बड़े नाम शामिल हैं. बता दें कि विरोधी बार-बार कह रहे थे कि छोटी मछलियों को पकड़ा गया है. बड़ी मछलियों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा लेकिन अब दो महत्वपूर्ण लोगों ने इस्तीफा दे दिया है। VHP ने की थी चंपत राय पर जांच की मांग: बता दें कि विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ जांच की मांग कर रहे थे।उन्होंने कहा था कि ये लोग जांच से बाहर नहीं हैं।
फिर से अयोध्या जा सकती है SIT: बता दें कि एसआईटी एक बार फिर से अयोध्या जा सकती है। प्राइमरी रिपोर्ट के बाद कुछ नए नाम पहचाने गए हैं. गिरफ्तार लोगों से पूछताछ और इन नामों पर जांच और इकट्ठे किए गए डेटा के विश्वलेषण के लिए जांच एजेंसी फिर से अयोध्या जा सकती है। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में दान प्रक्रिया में कई गड़बड़ियों के खुलने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन बताया जा रहा है कि राम मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे में कई खामियां मिली हैं।इस मामले में माना जा रहा है कि अब आगे कुछ और इस्तीफे भी हो सकते हैं। वहीं, पूलिस सूत्रों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी 8 आरोपियों की रिमांड लेने के लिए फैजाबाद की सीजेएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर के मुताबिक, सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है।
अब जानें चंपत राय के बारे में….
चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के नेता रहे हैं। साल 1991 में क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनकर चंपत राय अयोध्या आए थे। साल 1996 में वे विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री बनाए गए। 2002 में संयुक्त महामंत्री फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के रूप में उन्होंने काम किया। भगवान राम की सेवा में चंपत राय ऐसे मशगूल हुए कि उन्होंने शादी भी नहीं की। अपना पूरा जीवन उन्होंने रामलला के चरणों में अर्पित कर दिया। लोग तो उन्हें प्यार से रामलला का पटवारी कहने लगे थे।
आपातकाल में 18 महीने के लिए जेल गए थे चंपत राय
बता दें, चंपत बिजनौर के नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के रहने वाले हैं। अपने जीवन के शुरुआती दिनों में ही चंपत राय के पिता रामेश्वर RSS से जुड़ गए थे।पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए चंपत राय ने भी RSS ज्वाइन कर लिया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे धामपुर के RSM डिग्री कॉलेज में कैमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए.। 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान, वे 18 महीने के लिए जेल भी गए थे।जेल से निकलकर उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया औ संघ के प्रचारक बन गए।
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