- 9 जून को होने वाली इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन
अशोक झा/ कोलकाता: भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को नई दिल्ली तलब किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित पश्चिम बंगाल दौरे से ठीक पहले यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 9 जून को होने वाली इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन करेंगे, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्धनाथ गुप्ता के शामिल होने की संभावना है।सूत्रों के अनुसार बैठक में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती घुसपैठ, सीमा पर बाड़बंदी (फेंसिंग) की प्रगति, सीमा प्रबंधन और संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा होगी. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 13 और 14 जून को पश्चिम बंगाल के दौरे पर आने वाले हैं।अपने दौरे के दौरान शाह कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और उत्तर बंगाल के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों की समीक्षा कर सकते हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के लंबे समय से लंबित कार्यों को गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. राज्य मंत्रिमंडल ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सीमा पर फेंसिंग परियोजनाओं के लिए लगभग 31.9 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है. यह जमीन अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे नौ अलग-अलग स्थानों पर स्थित है और इसका उपयोग सीमा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि सरकार ने पहले ही सीमा सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकल्प लिया था और उसी दिशा में यह कदम उठाया गया है. इसके अलावा मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जिलों में बीएसएफ की तीन स्थायी सीमा चौकियों (बॉर्डर आउटपोस्ट) की स्थापना के लिए करीब 1.53 एकड़ अतिरिक्त भूमि भी आवंटित की गई है.
सीमा सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए उत्तर दिनाजपुर जिले के 11 स्थानों पर 12.72 एकड़ भूमि हस्तांतरण को भी मंजूरी दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में फेंसिंग पूरी होने से निगरानी क्षमता बढ़ेगी और अवैध घुसपैठ, तस्करी तथा अन्य सीमा पार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।भारत-बांग्लादेश सीमा देश की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक मानी जाती है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और बीएसएफ की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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