अशोक झा/ शिलांग: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल की 73 वीं प्लेनरी मीटिंग की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के विकास, ढांचागत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज शिलांग में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मेघालय के राज्यपाल सीएच विजय शंकर, मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा, केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, गृह सचिव गोविंद मोहन और डोनर मंत्रालय के सचिव संजय जाजू शामिल हुए।इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक से पहले सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बैठक है। इसमें क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई योजनाओं और परियोजनाओं पर निर्णय लिया जाएगा। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि उत्तर पूर्वी परिषद ने क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि सभी आठ राज्य ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी विकास योजनाओं को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डोनर मंत्रालय और एनईसी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिषद ने वर्षों से पूर्वोत्तर के विकास को नई दिशा दी है। अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों पर सीएम पेमा खांडू ने कहा कि यह हमारे लिए कोई नई बात नहीं है और हम इस तरह के दावों की बिल्कुल परवाह नहीं करते। हम इसे गंभीरता से नहीं लेते। हमारी सीमा चीन से नहीं, बल्कि तिब्बत से लगती है। अरुणाचल प्रदेश की सीमा सिर्फ़ तिब्बत से लगती है, 1962 के या उस दौर के बुनियादी ढांचे की तुलना आज के समय से करना काफ़ी गुमराह करने वाला है। पिछले 12 वर्षों में, जिस तरह से नरेंद्र मोदी ने हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को जबरदस्त बढ़ावा दिया है, उससे ये इलाके अब बहुत ज्यादा सुलभ हो गए हैं।
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने कहा कि सभी आठ राज्यों ने गृह मंत्री अमित शाह के सामने अपनी आर्थिक संभावनाओं और विकास योजनाओं को प्रस्तुत किया। साथ ही इन योजनाओं के क्रियान्वयन की रूपरेखा भी साझा की गई।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर देते हैं। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए बैठक में व्यापक चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि उन्हें दो उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का संयोजक बनाया गया था। बैठक में उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
उत्तर पूर्वी परिषद की स्थापना वर्ष 1971 में उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम के तहत की गई थी। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र की सर्वोच्च क्षेत्रीय योजना संस्था है। परिषद क्षेत्र के समन्वित विकास और सहकारी संघवाद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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