अशोक झा/ कोलकाता : पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपये के बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले की आंच अब राज्य के रसूखदार नेताओं से होते हुए उनके करीबी कारोबारियों तक पहुंचने लगी है। बंगाल में शुभेंदु सरकार के सीएम बनते ही ईडी एक्शन में आ गई है। शनिवार को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में सनसनी फैला दी। राज्य की पूर्ववर्ती सरकार में कद्दावर मंत्री रहे सुजीत बोस के बेहद खास और करीबी माने जाने वाले बड़े कारोबारी उत्तम बोस को ईडी ने पूछताछ के लिए तलब किया था।लेकिन जब उत्तम बोस साल्ट लेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद हैरान करने वाला था। केंद्रीय जांच एजेंसी के डर और भारी मानसिक दबाव के चलते उत्तम बोस इस कदर घबराए हुए थे कि दफ्तर में घुसते ही उन्हें लिफ्ट का बटन तक नहीं मिल रहा था और उनके हाथ बुरी तरह कांप रहे थे। कोलकाता और उसके आस-पास के व्यापारिक हलकों में उत्तम बोस एक जाना-माना नाम हैं, लेकिन उनकी असली ताकत का जरिया पूर्व मंत्री सुजीत बोस के साथ उनकी गहरी नजदीकियां थीं।पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान सुजीत बोस का साल्ट लेक और दमदम के इलाकों में भारी रसूख चलता था। उत्तम बोस को सुजीत बोस का दाहिना हाथ और उनका सबसे बड़ा वित्तीय रणनीतिकार माना जाता था।
लिफ्ट में कांपने लगा हाथ: लेकिन सूबे में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय जांच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता के बाद यही वीआईपी नजदीकियां अब उत्तम बोस के लिए 'जी का जंजाल' बन चुकी हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि नगरपालिका भर्ती घोटाले से कमाए गए काले धन को सफेद करने और उसे विभिन्न व्यावसायिक लेन-देन में खपाने के लिए उत्तम बोस की कंपनियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था।यही वजह है कि ईडी ने उन्हें नोटिस भेजकर सीधे तलब कर लिया।
वह कांपते हाथों से ढूंढते रहे लिफ्ट का बटन: जब उत्तम बोस अपनी गाड़ी से साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे, तो मीडियाकर्मियों और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उनके चेहरे पर साफ तौर पर हवाइयां उड़ती देखीं।वह पूरी तरह से सहमे हुए नजर आ रहे थे. जब वे पूछताछ के लिए बिल्डिंग के भीतर गए, तो अत्यधिक घबराहट और हड़बड़ाहट के कारण उन्हें लिफ्ट का पैनल तक ठीक से समझ नहीं आ रहा था। वह लिफ्ट का बटन दबाने के लिए काफी देर तक जूझते रहे और उनके हाथ इस कदर कांप रहे थे कि वहां मौजूद लोगों को भी उनकी बदहवासी साफ नजर आ गई।एक रसूखदार कारोबारी की केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर में ऐसी हालत देखकर हर कोई हैरान था।यह इस बात का स्पष्ट सबूत था कि घोटाले की जांच को लेकर उनके मन में कितना बड़ा डर समाया हुआ है।
क्या है पूरा नगरपालिका भर्ती घोटाला?:
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की विभिन्न नगरपालिकाओं में साल 2014 से 2021 के बीच हुई क्लर्क, सफाईकर्मी और चालकों की अवैध भर्तियों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों से लाखों रुपये की रिश्वत लेकर उन्हें सरकारी नौकरियां बांटी गईं।इस घोटाले की जांच सबसे पहले सीबीआई ने शुरू की थी, जिसके बाद पैसों के अवैध लेन-देन की जांच के लिए ईडी की एंट्री हुई।ईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कई ऐसी डायरियां और डिजिटल दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनमें संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड दर्ज हैं। इस मामले में पूर्व मंत्री उत्तम बोस से पूछताछ हो चुकी है। अब संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन में उत्तम बोस और पूर्व मंत्री सुजीत बोस या उनके करीबियों के खातों के बीच हुए बड़े वित्तीय लेन-देन का ब्योरा खंगाला जा रहा है।ईडी पता लगा रही है कि क्या भर्ती घोटाले का पैसा उत्तम बोस की रियल एस्टेट और अन्य कंपनियों के माध्यम से जमीन या संपत्तियों को खरीदने में निवेश किया गया था?
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