*'...अब काशी-मथुरा बाकी है!'* - हिंदू जनजागृती समिति
मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक 'भोजशाला' हिंदुओं का ही पवित्र श्री वाग्देवी (श्री सरस्वती) मंदिर है, इस पर इंदौर उच्च न्यायालय ने कानून और साक्ष्यों की मुहर लगा दी है। यह निर्णय केवल एक इमारत की जीत नहीं है, अपितु सदियों से दबाए गए ऐतिहासिक सच और विदेशी इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण किए गए मंदिरों के मुक्ति संघर्ष की एक भव्य विजय है। हालांकि भोजशाला की मुक्ति का संघर्ष आज सफल हुआ है, लेकिन इस लड़ाई में "भोजशाला मुक्ति आंदोलन" के प्रमुख नवल किशोर शर्मा और हिंदू जनजागृती समिति का बहुत बड़ा योगदान था। समिति इस ऐतिहासिक निर्णय का सहर्ष स्वागत करती है और *'...अब काशी-मथुरा बाकी हैं!'* का संकल्प उद्घोष करती है।
*हिंदू जनजागृती समिति के आंदोलन और हिंदू अधिवेशन का परिणाम!*
धार की भोजशाला की मुक्ति के लिए हिंदू जनजागृती समिति ने न केवल सड़कों पर आंदोलन किए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जागरूकता भी निर्माण की। गोवा में आयोजित होने वाले 'वैश्विक हिंदू राष्ट्र महोत्सव' (अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन) के राष्ट्रीय मंच से हर साल इस संबंध में कानूनी और रणनीतिक प्रस्ताव पारित कर संघर्ष की दिशा तय की गई। देश भर के हिंदुत्ववादी संगठनों ने मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से इस विषय में लगातार न्याय की गुहार लगाई थी। आज न्यायालय द्वारा दिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय से करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं और समिति के दीर्घकालिक आंदोलन को न्याय मिला है।
*आक्रमणकारियों का अतिक्रमण हटाकर काशी-मथुरा का संघर्ष निरंतर रहेगा!*
इस अवसर पर समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने स्पष्ट किया कि, "भारत में हिंदुओं के केवल एक-दो देवस्थान ही आक्रमित नहीं हुए हैं। विदेशी आक्रमणकारियों और धार्मिक कट्टरपंथियों ने हिंदुओं की सहिष्णुता का फायदा उठाकर हजारों मंदिरों पर अवैध रूप से कब्जा किया और उन पर अपना झूठा अधिकार जताया। अयोध्या और धार (भोजशाला) के निर्णयों ने यह सिद्ध कर दिया है कि झूठ का नकाब ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकता। अब समय आ गया है कि काशी की ज्ञानवापी से लेकर मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि तक के सभी आक्रमित क्षेत्र मुक्त होने चाहिए।"
( रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिंदू जनजागृती समिति की कलम से)
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