समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का बुधवार(13 मई) सुबह लखनऊ में निधन हो गया।दिवंगत समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और SP प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव का बुधवार सुबह लखनऊ में रहस्यमय परिस्थितियों में निधन हो गया। प्रतीक यादव, भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति थे। घर के किचन में बेहोश पाए जाने से लेकर अस्पताल में मृत घोषित किए जाने तक की कड़ियां अब पुलिस और फॉरेंसिक जांच के घेरे में हैं।
किचन में बेसुध मिले प्रतीक, अस्पताल पहुंचने से पहले थमी सांसें
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 4:55 बजे घर पर अचानक अफरा-तफरी मच गई जब प्रतीक की तबीयत बिगड़ी। बताया जा रहा है कि वह अपने घर के किचन एरिया में बेहोश मिले थे। आनन-फानन में इमरजेंसी कॉल की गई, लेकिन जब तक डॉक्टर्स की टीम विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर पहुंची, तब तक प्रतीक दम तोड़ चुके थे। सुबह 5:55 बजे उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेश चंद्र पांडे ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित कर दिया। वह 38 वर्ष के थे। प्रतीक के शव का पोस्टमॉर्टम हो चुका है. लेकिन उसमें कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है ऐसे में प्रतीक यादव की मौत के पीछे फेफड़ों की बीमारी भी एक वजह हो सकती है।खबर आ रही है कि प्रतीक यादव लंबे समय से फेफड़ों में क्लॉटिंग की बीमारी से जूझ रहे थे। इसे लेकर वे कई अस्पतालों में इलाज भी करा चुके थे। हाल ही में वे मुंबई के अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां उनका लंग्स में क्लॉट की जांच और इलाज हुआ था। इसके अलावा कुछ दिन पहले उन्हें मेदांता अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। जहां तक मौत के पीछे फेफड़ों की बीमारी वजह हो सकती है या नहीं, का सवाल है तो आइए लखनऊ के जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. एके सिंह से जानते हैं कि क्या लंग्स की बीमारी जान भी ले सकती है? यह बीमारी क्यों और कैसे होती है? क्या फिटनेस के जुनूनी भी इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं?
डॉ. एके सिंह बताते हैं कि फेफड़ों में क्लॉट यानि लंग्स क्लॉट सीरियस बीमारी है. यह इतनी गंभीर होती है कि इससे जान भी जा सकती है. यह क्रॉनिक और एक्यूट दोनों ही स्तरों पर खतरनाक हो सकती है. किसी के भी सीधे लंग में क्लॉट हो सकता है, या ऐसा भी हो सकता है कि उसके पैर या पेट में क्लॉट जमे और फिर वह ट्रैवल करके लंग तक पहुंच जाए और अचानक लंग क्लॉट से मौत हो जाए। डॉ. सिंह आगे बताते हैं कि ऐसा आमतौर पर लंबे समय तक फ्लाइट में बैठने या अन्य क्लॉटिंग डिसऑर्डर की वजह से हो सकता है. ज्यादा देर तक पैर लटका कर या चुपचाप रखकर पैरों में क्लॉट जम जाते हैं। इसके अलावा कुछ चीजें होती हैं जिनकी कमी की वजह से भी क्लॉट ज्यादा होता है।वे बताते हैं कि ये लंग क्लॉट एक्यूट और क्रॉनिक दोनों हो सकता है. सबसे खास बात है कि क्लॉट होने के मिनटों में भी जान जा सकती है और यह लंबा समय भी खींच सकती है. ये एक तरह से हार्ट अटैक की तरह होता है, तो मौत की ये वजह प्रतीक यादव के मामले में है या नहीं ये तो जांच ही बताएगी, लेकिन ये बीमारी जानलेवा है और जान ले सकती है ये तय है.
आइए डॉ. सिंंह से जानते हैं जरूरी सवालों के जवाब…
क्या लंग क्लॉट जानलेवा है?
हां लंग क्लॉट हार्ट अटैक की तरह मिनटों में जाने सकता है. यानि अभी फेफड़ों में क्लॉट बना और जान चली जाए. इसके अलावा यह क्रॉनिक बीमारी में भी जानलेवा होता है
क्या एक्सरसाइज करने वाले को भी लंग क्लॉट हो सकता है?
एक्सरसाइज आपके क्लॉटिंग को नहीं रोकता है.इस बीमारी को रोकने के लिए एक्सरसाइज का डायरेक्ट योगदान नहीं होता. हां ये खतरे कम कर सकता है लेकिन क्लॉट किसी को भी हो सकता है।क्या यह सप्लीमेंट्स लेने से होता है?
ऐसा अभी तक कोई सबूत सामने नहीं आया है कि यह बॉडी बिल्डिंग सप्लीमेंट लेने से हो।लंग क्लॉट क्यों होते हैं?यह ज्यादा देर तक फ्लाइट की लंबी दूरी की यात्रा करने या क्लॉटिंग डिसऑर्डर की वजह से होता है। इसका इलाज क्या है
क्लॉट पता चल जाए तो क्लॉट को गलाने की दवा दी जाती है। दूसरा तरीका उस क्लॉट को सक करने के निकालने का है और अगर क्रॉनिक बीमारी है तो सर्जरी से क्लॉट को निकालना होता है।क्या बीमारी से मौत पर नाखून नीले पड़ जाते हैं?
हां किसी भी बीमारी से मौत होती है तो नाखून नीले पड़ सकते हैं, ऐसा शरीर में ऑक्सीजन की कमी की वजह से होता है।फेफड़ों की बीमारी में क्या एक्सरसाइज कर सकते हैं?हां लंग क्लॉट होने पर व्यक्ति सामान्य जीवन जीता है और वह व्यायाम कर सकता है। ( अशोक झा की रिपोर्ट )
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