- महिलाओं से जुड़ी सभी बड़ी घटनाओं से सीएम नहीं करना चाहते कोई समझौता
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु अधिकारी ऐक्शन में है। ममता बनर्जी सरकार के दौरान हुई हिंसा और अपराध से जुड़ी कई पुरानी फाइलों को दोबारा खोला जा रहा है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई गैंगरेप एंड मर्डर केस की फाइल दोबारा खोले जाने के बाद अब बंगाल की बहुचर्चित कामदुनी गैंगरेप की भी फाइल दोबारा खोले जाने की चर्चा तेज है।इसके संकेत बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने दिए हैं।
दरअसल, कामदुनी गैंगरेप पीड़िता की मां और भाई सोमवार (25 मई) को कोलकाता के साल्ट लेक में भाजपा दफ्तर पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से हुई। उनके साथ कामदुनी की एक्टिविस्ट टुम्पा कयाल भी थीं। ऐसी खबर है कि इस मुलाकात के दौरान कामदुनी गैंगरेप की फिर से जांच कराने पर चर्चा हुई। ABP बांग्ला के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अगले सोमवार को पब्लिक मीटिंग में कामदुनी की पीड़िता के परिवार से मिलने वाले हैं।
बता दें कि नई भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही राज्य में आरजी कर की फाइलें खोली गईं। 3 IPS ऑफिसर - विनीत गोयल, इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। ऐसे में यह चर्चा जोरों पर है कि अब 'कामदुनी फाइलें' खोलने की बारी है?क्या है कामदुनी गैंगरेप केस: पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के बारासात में कामुदनी गांव में 7 जून 2013 को जब 21 वर्ष की बीए सेकंड ईयर की एक छात्रा कॉलेज से लौट रही थी, तब नौ लोगों ने उसका अपहरण कर लिया था और उसे सूनसान जगह ले जाकर एक बंद फैक्ट्री में उसके साथ गैंगरेप किया था। बाद में पीड़िता की बेरहमी और निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। इस घटना के अगले दिन एक खेत से छात्रा का शव एक बोरा में बरामद किया गया था। इस घटना से गुस्साए कामदुनी के स्थानीय लोगों ने पीड़िता को न्याय दिलाने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए व्यापक विरोध-प्रदर्शन किया था। इसके लिए कामदुनी प्रतिवादी मंच नामक एक संगठन भी बनाया गया था। जब हंगामा बढ़ा तो पुलिस ने इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, उनमें से एक की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। जनवरी 2016 में कोलकाता की एक निचली अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया और कुल छह अभियुक्तों को दोषी करार दिया, जबकि दो को बरी कर दिया। अदालत ने छह में से तीन दोषियों को फांसी और तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने अंसार अली, शेख अमीन अली और सैफ़ुल अली को गैंगरेप और हत्या का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई, जबकि अमीनुर इस्लाम, शोख इनामुल और भोलानाथ को आजीवन कारावास की सजा दी।इसके 10 साल बाद 6 अक्टूबर, 2023 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने कामदुनी मामले में सभी 3 आरोपियों की मौत की सजा को पलट दिया। इसने 2 दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई और 4 को बरी कर दिया। इस फैसले से कामदुनी के लोग टूट गए लेकिन हार नहीं मानी। इसके खिलाफ गांव की महिलाओं और स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर एक लंबा संघर्ष किया। इस दौरान उन्हें धमकियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन सभी ने एकजुट होकर न्याय की लंबी लड़ाई लड़ी। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, 'पश्चिम बंगाल के सभी लोग चाहते हैं कि कामदुनी की फ़ाइलें खोली जाएं क्योंकि इस केस की जांच रिपोर्ट इस तरह से तैयार की गई कि जज के पास उन्हें बरी करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।' आंदोलन के दौरान भी टुम्पा कयाल ने शुभेंदु धिकारी से मुलाकात की थी, जो उस समय विपक्ष के नेता थे। तब अधिकारी ने उन्हें मामले में मदद का आश्वासन दिया था।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/