- मां ने कहा कि शुभेंदु बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं और स्वामी विवेकानंद के बड़े भक्त
अशोक झा/ कोलकोता: बंगाल में पहली बार शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। शुभेंदु समेत छह विधायकों ने शपथ ली है. बेटे के मुख्यमंत्री बनने पर शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि हमारा बंगाल हमेशा समृद्ध बना रहे। शिशिर अधिकारी ने बात करते हुए कहा, 'कृषि परिवार फले-फूलें। उचित शिक्षा व्यवस्था हो और उपयुक्त उद्योगों की स्थापना सही स्थानों पर हो ताकि लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि चोरों के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं है। बेईमान लोगों के लिए राजनीति में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। बंगाल की मिट्टी अत्यंत पवित्र है और हम इसके समक्ष नतमस्तक हैं। उन्होंने राजनीति में ईमानदारी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि राजनीति में चोरों और बेईमान लोगों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक बंगाल की मिट्टी बहुत पवित्र है और यहां जो गलत चीजें हुई हैं, उन्हें सुधारने की जरूरत है। शिशिर कुमार अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के पास नदियां, समुद्र, जंगल, पहाड़ और भरपूर प्राकृतिक संसाधन हैं. इसके साथ ही यहां पढ़े-लिखे लोगों की भी कमी नहीं है. उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि राज्य में ऐसे उद्योग लगाए जाने चाहिए जो बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करें।गायत्री देवी ने कहा कि कुछ दिन पहले घर की छत पर बड़े-बड़े कमल के फूल खिले थे, जिसे देखकर उन्हें पहले ही संकेत मिल गया था कि राज्य में "कमल खिलेगा"। उनके अनुसार, उसी समय उन्हें लगा था कि इस बार राजनीतिक बदलाव तय है।
उन्होंने अपने बेटे शुभेंदु अधिकारी के बचपन को याद करते हुए बताया कि माध्यमिक स्तर तक वह अधिकतर घर के भीतर ही रहते थे, लेकिन बाद में कॉलेज जीवन से ही सक्रिय राजनीति में जुड़ गए। उन्होंने कहा कि बचपन में शुभेंदु बागवानी में काफी रुचि लेते थे और घर के बगीचे में समय बिताते थे।
गायत्री देवी ने यह भी बताया कि शुभेंदु को पांता भात (पानी में भिगोए हुए चावल) बेहद पसंद है और गर्मियों की रातों में वह अक्सर हल्के भोजन की मांग करते हैं, जिसमें आलू भुजिया, मछली या अंडे का आमलेट शामिल रहता है।
अपने बेटे से अपेक्षाओं पर उन्होंने कहा कि वह जो भी निर्णय ले, अपने विवेक से काम करे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने बेटे की गतिविधियों की जानकारी मिलती रहती है।
गायत्री देवी ने बताया किया कि शुभेंदु बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं और स्वामी विवेकानंद के बड़े भक्त हैं।
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