- सीमावर्ती क्षेत्रों के सभी राज्यों में एकसाथ करनी होगी 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' की कारवाई
- धनबल का इस्तेमाल कर पनाह ले रहे घुसपैठिए, संरक्षकों की पहचान कर करना होगा कठोर कानूनी कार्रवाई
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी बांग्लादेश बॉर्डर से अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। नई भाजपा सरकार की 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' रणनीति के तहत अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू होते ही पश्चिम बंगाल में सनसनी फैल गई है।
सीमा पर घुसपैठियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। सैकड़ों को पकड़ा जा चुका है तो सैकड़ों सीमांत राज्यों चिकन नेक में अपना पनाहगार ढूंढ रहे है। ये वोटबैंक और तुष्टिकरण के संरक्षण देने वाले लोगों के माध्यम से धन बल के माध्यम से उनका रिश्तेदार बन रहे है। नया चेहरा देख पूछने पर कहते है वह बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया या कूच बिहार इस्लामपुर से आए है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का घुसपैठ मुक्त भारत तभी संभव हो पाएगा जब एक साथ चिकन नेक में बंगाल की तरह कारवाई होगी? बंगाल में पिछले साल गृह मंत्रालय की तरफ से जारी उस एडवाइजरी का भी जिक्र किया गया है, जिसमें भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से निपटने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। केंद्रीय गाइडलाइन के मुताबिक, संदिग्ध इलीगल इमिग्रेंट्स को 30 दिनों तक ऐसे होल्डिंग सेंटर में रखा जा सकता है। इस प्रोसेस में बायोमेट्रिक डेटा लेना, जानकारी को सेंट्रल पोर्टल पर अपलोड करना और पहचान होने के बाद संबंधित लोगों को बॉर्डर अथॉरिटी को सौंपना शामिल है। नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार जिला मजिस्ट्रेट या समान रैंक के अधिकारी के पास होगा। इस प्रकार की कार्रवाई सीमावर्ती दूसरे राज्यों को भी करना होगा।
मंगलवार को उत्तर 24 परगना जिले के बिथारी-हाकिमपुर बॉर्डर पर सैकड़ों बांग्लादेशी बिना दस्तावेजों के भारत से वापस अपने देश भागने की कोशिश कर रहे है। सीएम ने पहली कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया था कि सरकार 45 दिन में बीएसएफ को चौकियां बनाने और कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपी देगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने नौ जिलों में बीएसएफ को जमीन दे दी है। उन्होंने बताया कि अब तक बीएसएफ को 142.79 एकड़ जमीन दी जा चुकी है। गौरतलब हो कि बीजेपी ने पश्चिम बंगाल चुनावों में बंगाल को घुसपैठिया मुक्त बनाने का वादा किया था। सरकार के थ्री डी फॉर्मूले के बाद बांग्लादेश बॉर्डर के चेकपोस्ट पर अवैध घुसपैठियों की भीड़ देखी जा रही है। इसके साथ ही बंगाल में वर्षों से रहने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या परिवार समेत बंगाल छोड़ने लगे है। सीमा पर पहुंचे ज्यादातर लोग कोलकाता के न्यू टाउन, खरदह और डानकुनी इलाके से आए थे।इनमें से कई लोग पिछले कुछ वर्षों में अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए थे। हाकिमपुर सीमा पर आजतक की टीम को एक ऐसा परिवार मिला जिसने सभी का ध्यान खींचा।।पति, पत्नी और भाई तीनों दृष्टिबाधित हैं।उत्तर 24 परगना के खरदाह इलाके में रहते थे। ये लोग सड़क और ट्रेनों में भीख मांगकर गुजर-बसर करते थे।मो शमशुराहमान, पत्नी आशिया खातून और भाई बिलाल एक साल से भारत में रह रहे थे।
नौ मई को सीएम बने थे शुभेंदु अधिकारी: शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। अधिकारी ने बंगाल में बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को रोकने और अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' (पहचान करो, नाम हटाओ और वापस भेजो) की सख्त नीति लागू की है। इसके कारण पूरे राज्य में अवैध रूप से रहने वालों में हड़कंप मच गया है।
बंगाल में बनाए जा रहे हैं डिटेंशन सेंटर: अधिकारी के आदेश पर राज्य में डिटेंशन सेंटर बनाए जा रहे हैं। राज्य के गृह विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों/कलेक्टरों को अवैध विदेशी नागरिकों को रखने के लिए समर्पित होल्डिंग सेंटर्स स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआती चरण में बांग्लादेश सीमा से सटे मुस्लिम-बहुल जिलों मालदा (इंग्लिश बाजार) और मुर्शिदाबाद (लालगोला) में पहले ही ऐसे होल्डिंग सेंटर बना दिए गए है। ये डिटेंशन सेंटर शुरू भी कर दिए गए हैं। इन केंद्रों में संदिग्धों को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकता है।
कैसे किया जाएगा डिपोर्ट?: राज्य सरकार ने केंद्र के सहयोग से डिपोर्ट करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अवैध घुसपैठ की पहचान होने के बाद उन्हें बीएसएफ के हवाले किया जाएगा। ऐसे में लंबी अदालती प्रक्रिया से बचाव होगा। सीमा सुरक्षा बल भारत-बांग्लादेश समझौते के तहत सीधे बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के साथ समन्वय स्थापित कर इन नागरिकों की नागरिकता सत्यापित करेगी और उन्हें सीधे डिपोर्ट (वापस) करेगी। बंगाल सरकार की सख्ती के बाद अवैध घुसपैठियों में स्वैच्छिक वापसी यानी रिवर्स माइग्रेशन देखा जा रहा है। बॉर्डर पर भीड़ से यही अनुमान लगाया जा रहा है, क्योंकि उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट और मालदा के सीमावर्ती क्षेत्रों पर सैकड़ों की संख्या में अवैध बांग्लादेशी नागरिक अपने परिवारों और सामान के साथ खुद ही वापस बांग्लादेश लौटने के लिए एकत्र हो रहे हैं।
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