जिला उपभोक्ता फोरम भोजपुर का बड़ा फैसला, रेलवे की 'त्योहार की भीड़' और सुरक्षा वाली दलील को किया सिरे से खारिज।
2022 का मामला: 3AC की कन्फर्म सीट पर अवैध कब्जा, TTE और ट्विटर शिकायत के बाद भी नहीं मिली थी कोई मदद।
कोर्ट का सख्त आदेश- टिकट का पूरा पैसा 8% ब्याज के साथ लौटाएं, साथ ही दें 35 हजार रुपये का हर्जाना।
इंडियन रेलवे के आरामदायक सफर के दावों की पोल खोलता एक बड़ा मामला बिहार के भोजपुर से सामने आया है।
साल 2022 में कोईलवर (कायमनगर) के रहने वाले रवि शंकर पांडेय और उनके तीन दोस्तों ने विंध्याचल से आरा आने के लिए एलटीटी-पटना एक्सप्रेस (13202) के थर्ड एसी (3AC) कोच में चार कन्फर्म टिकट बुक कराए थे।
जब वे ट्रेन में चढ़े, तो उनकी सीटों पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था, जिन्होंने खुद को रेलवे कर्मचारी बताते हुए सीट छोड़ने से मना किया और बदतमीजी की।
यात्रियों ने टीटीई और आरपीएफ की तलाश की, लेकिन कोई नहीं मिला। यहां तक कि 'X' (ट्विटर) पर रेलवे को टैग कर लाइव शिकायत करने के बावजूद उन्हें ऑन-ग्राउंड कोई मदद नहीं मिली।
बक्सर स्टेशन पर जब एक टीटीई मिला भी, तो उसने मदद करने के बजाय 'त्योहार की भीड़' का बहाना बनाकर उन्हें खुद ही स्थिति 'मैनेज' करने की गैर-जिम्मेदाराना सलाह दे डाली। मजबूरन चारों यात्रियों को पूरी रात खड़े-खड़े सफर करना पड़ा।
4 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, जिला उपभोक्ता फोरम भोजपुर के अध्यक्ष कृष्ण प्रताप सिंह और सदस्य कमल किशोर सिंह की बेंच ने रेलवे को इस घोर लापरवाही का दोषी माना है।
कोर्ट में रेलवे ने बचने के लिए तर्क दिया कि 'कानून-व्यवस्था राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) का काम है।' लेकिन फोरम ने इसे खारिज करते हुए साफ कहा कि कन्फर्म टिकट का पूरा पैसा लेने के बाद सुरक्षित और आरामदायक सफर देना रेलवे की ही जिम्मेदारी है।
अदालत ने रेलवे को 60 दिनों के भीतर पीड़ित को टिकट का पूरा पैसा (1,876 रुपये) 8% सालाना ब्याज के साथ, और 35,000 रुपये का भारी हर्जाना (20 हजार मानसिक प्रताड़ना + 15 हजार अदालती खर्च) चुकाने का कड़ा निर्देश दिया है।
कन्फर्म टिकट के बाद भी अगर आपको ट्रेन में सीट न मिले और रातभर खड़े होकर सफर करना पड़े, तो रेलवे इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है! भोजपुर की अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में रेलवे पर इसी लापरवाही के लिए भारी जुर्माना ठोका है। जानिए कैसे एक यात्री ने 4 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई और रेलवे के 'मैनेज कर लीजिए' वाले सिस्टम को दी करारी मात। हर रेल यात्री को अपने अधिकारों के लिए यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए।
सवाल आपके लिए: क्या आपके साथ भी कभी ट्रेन सफर के दौरान ऐसी परेशानी हुई है जहाँ कन्फर्म टिकट के बावजूद आपकी सीट पर दूसरों ने कब्जा कर लिया हो?
अपना कड़वा अनुभव कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!
रेलवे के खिलाफ उपभोक्ता अदालत की इस बड़ी जीत को अपने सभी दोस्तों, रिश्तेदारों और व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि हर यात्री अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सके। ( बिहार से अजित मिश्र की कलम से )
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