पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मालदा में बुधवार को बवाल हो गया। मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाया गया। बंगाल में जजों के इस घेराव से सुप्रीम कोर्ट खासा नाराज है। इसमें तीन महिला अधिकारी थीं। मालदा में दोपहर 3.30 बजे घटी इस घटना को लेकर बंगाल के डीजीपी और कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल की। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खुद देर रात 2 बजे तक मामले की निगरानी करते रहे।गुरुवार को सुबह जब सुनवाई हुई तो कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की. रात 11 बजे तक घटनास्थल पर डीएम के न पहुंचने पर सवाल उठाए। घेराव खत्म होने के बाद लौट रहे इन अधिकारियों पर पथराव के साथ हमले की कोशिश भी हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की सरकार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नाराजगी जताई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा ने कहा, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. बंगाल सबसे राजनीतिक ध्रुवीकरण वाला राज्य है.मुझे आधी रात को आदेश देना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने मालदा के कालियाचक इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी मीडिया खबरों का हवाला दिया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था.
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं ने मालदा जिले के कालियाचक ब्लॉक में इन न्यायिक अधिकारियों का घेराव कर लिया था। एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग ने तमाम मतदाताओं को विचाराधीन स्थिति में रखा है. चुनाव आयोग और बंगाल की ममता सरकार में आरोप प्रत्यारोप के बीच वोटरों के दस्तावेजों के सत्यापन का काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया था, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं।खबरों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल को इस बारे में सूचित कर दिया था, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद ऐसे वोटरों के दस्तावेजों की सत्यापन की निगरानी कर रहे हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने ममता बनर्जी सरकार के वकील से कहा है कि आपके राज्य का हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है। सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली भी मामले पर सुनवाई कर रहे थे। बुधवार को दोपहर के समय प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। ये अधिकारी फाइनल वोटर लिस्ट से बाहर किए गए करीब 50 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों की जांच कर रहे हैं। चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाते हुए कहा, 'दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है. क्या आप समझते हैं कि हम नहीं जानते कि उपद्रवी कौन थे? मैं रात 2 बजे तक स्थिति की जानकारी ले रहा था।
सीजेआई ने राज्य सरकार से कहा, 'रात को 11 बजे तक आपके कलेक्टर भी वहां नहीं पहुंचे। मुझे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए मौखिक रूप से सख्त आदेश देना पड़ा।चुनाव आयोग ने भी घटना की कड़ी निंदा की है। चुनाव आयोग के वकील दामा सेशाद्री नायडू ने कहा कि ऐसा भीड़तंत्र स्वीकर नहीं किया जाएगा. वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि यह अस्वीकार्य घटना है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ही न्यायिक अधिकारियों को इस काम में लगाने का निर्देश दिया था। बुधवार को मालदा के कालिचाक में अधिकारी एसआईआर का काम कर रहे थे, तभी गांव वालों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. ये लोग लिस्ट से लोगों को हटाए जाने का विरोध कर रहे थे, जिसके चलते जहां ये अधिकारी काम कर रहे थे वहां प्रदर्शनकारी दोपहर 3.30 बजे से रात तक करीब नौ घंटे डेरा डाले बैठे रहे और जब कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने डीजीपी से संपर्क किया, उसके बाद देर रात ये अधिकारी वहां से निकल पाए और तब भी उनकी गाड़ियों पर पथराव किया गया। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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