अमर उजाला वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम मिश्रा के निधन की खबर केवल एक व्यक्ति के जाने की सूचना नहीं है, बल्कि पत्रकारिता जगत के एक संवेदनशील, सजग और मानवीय चेहरे के खो जाने की पीड़ा है।
अमर उजाला के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे घनश्याम मिश्रा जी न सिर्फ एक कुशल पत्रकार थे, बल्कि एक ऐसे इंसान थे जिनकी पहचान उनकी मृदुभाषिता, सरलता और मिलनसार स्वभाव से होती थी।
अमर उजाला के माध्यम से उन्होंने समाज के हर वर्ग की आवाज़ को उठाया। उनकी लेखनी में सच्चाई की दृढ़ता और संवेदनाओं की गहराई साफ झलकती थी। वे खबरों को सिर्फ लिखते नहीं थे,बल्कि उसे जीते थे।
लंबे समय तक कचहरी और न्याय ब्यवस्था को भी कवर किया एवं अपने अख़बार में प्रमुखता से जगह दिया।
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से शिक्षा प्राप्त करने वाले घनश्याम मिश्रा जी अपने व्यक्तित्व में विद्वता और विनम्रता का अद्भुत संगम थे। उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव से न जाने कितने युवा पत्रकारों को दिशा दी।
वे केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि समाज के हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले एक सच्चे साथी थे। चाहे किसी की परेशानी हो या खुशी का अवसर, उनकी उपस्थिति हमेशा आत्मीयता से भरी होती थी। यही कारण है कि उनका जाना केवल उनके परिवार या संस्थान की क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है।
सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता भी उन्हें आम लोगों के और करीब ले आती थी। वे अपने विचारों और अनुभवों के माध्यम से लगातार समाज से संवाद बनाए रखते थे, और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करते थे।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो उनकी यादें, उनके शब्द और उनका व्यवहार हमेशा हमारे साथ रहेंगे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि एक सच्चा पत्रकार केवल खबरों का वाहक नहीं होता, बल्कि समाज का मार्गदर्शक और संवेदनाओं का संरक्षक भी होता है।
किडनी के लम्बी बीमारी के बावजूद उनके संघर्ष जीवटता को हमेशा याद रखा जाएगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिजनों एवं शुभचिंतकों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें।
घनश्याम मिश्रा जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
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