बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव के लिए ना सिर्फ शतरंज की विशात बिछाएगा गया है बल्कि चाल भी बड़ी तेजी से चली जा रही है। 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होने है। चुनाव में वादों आरोप प्रत्यारोप के बाद महाभारत के तर्ज पर सभी पार्टियों के प्रमुख खुले मंच से प्रण कर रहे है। जिस प्रकार महाभारत मुख्य रूप से भीष्म, कर्ण, और कृष्ण के कठोर प्रण (प्रतिज्ञाओं) पर टिकी है उसी प्रकार भाजपा के चाणक्य अमित शाह बंगाल से टीएमसी को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भाजपा को दिल्ली की गद्दी से उतारने का संकल्प लिया है।ममता बनर्जी ने इस दौरान निर्वाचन आयोग (ECI) और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।ममता का बंगाल से दिल्ली तक की ललकार: ममता बनर्जी ने जनसभा में मंच से जनता को गवाह बनाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अंत करीब है।मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक महा-कसम खायी है। राजनीतिक संकल्प लेते हुए मालदा जिले के वैष्णव नगर में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि वह भाजपा को न केवल बंगाल से बाहर निकालेंगीं, बल्कि दिल्ली की कुर्सी से भी उतार फेंकेंगी। उन्होंने कहा- यह मेरा वादा है। मैं भाजपा को पहले बंगाल से बाहर निकालूंगी और फिर दिल्ली की सत्ता से भी उनका सफाया कर दूंगी। मोदी और शाह देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं। यह मेरा वादा है। मैं भाजपा को पहले बंगाल से और फिर दिल्ली की सत्ता से बाहर निकाल फेंकूंगी।ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए अमित शाह ने टिप्पणी की कि जहाँ पिछली बार दीदी नंदीग्राम में हारी थीं, वहीं इस बार वे न केवल भवानीपुर, बल्कि पूरे बंगाल में हार का सामना करेंगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सुवेंदु अधिकारी का नामांकन बंगाल में TMC के पतन की शुरुआत है। शाह ने इस बात पर बल दिया कि नंदीग्राम की जनता इस बार फिर से इतिहास दोहराएगी और ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।
अमित शाह का दावा मैंने पूरे बंगाल का दौरा किया है':
उन्होंने दावा किया, "मैंने बंगाल के कोने-कोने का दौरा किया है, और मैं जहाँ भी जाता हूँ, वहाँ से एक ही आवाज़ गूँजती है: 'ममता बनर्जी को अलविदा कहो।' चुनाव शुरू होने से पहले ही, बंगाल में आप कहीं भी चले जाएँ, हर जगह यही भावना सुनाई देती है-कि अब इस सरकार को विदा करने और ममता बनर्जी को अलविदा कहने का समय आ गया है।"
राज्य को परेशान करने वाले ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए, गृह मंत्री ने कहा कि बंगाल की जनता TMC के वसूली रैकेट और गुंडागर्दी से पूरी तरह ऊब चुकी है। युवा भारी बेरोज़गारी और लगभग हर दिन होने वाले बम धमाकों से त्रस्त हैं। पूरे राज्य में बार-बार होने वाले बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि TMC सरकार ने घुसपैठियों को संरक्षण दिया है, एक ऐसी स्थिति जो राज्य के जनसांख्यिकीय स्वरूप को बदल रही है। शाह ने युवाओं से वादा किया कि BJP सरकार के सत्ता में आने पर बेरोज़गारी को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा और विकास की एक नई लहर लाई जाएगी, ताकि बंगाल अपनी पुरानी पहचान वापस पा सके।
बंगाल में हिमायूं - ओवैसी ने पहली ही रैली में भरी हुंकार
वहीं, कांग्रेस और लेफ्ट को लपेटते हुए ओवैसी ने कहा कि इन पार्टियों ने दशकों तक बंगाल पर राज किया, लेकिन मुसलमानों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'कांग्रेस और लेफ्ट खुद को धर्मनिरपेक्षता का अलंबरदार बताते हैं, लेकिन जब मुसलमानों के हक की बात आती है, तो ये पार्टियां मौन हो जाती हैं. ये वही लोग हैं जो भाजपा का डर दिखाकर आपको डराते हैं ताकि आप हमेशा इनके गुलाम बने रहें.' ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम समाज अब 'रजिया गुंडों में फंस गई' वाली स्थिति में है, जहां एक तरफ भाजपा का डर है और दूसरी तरफ इन पार्टियों का छलावा.
असदुद्दीन ओवैसी ने टीएमसी, कांग्रेस और लेफ्ट पर करारा हमला बोला.
मुर्शिदाबाद और मालदा में नया समीकरण
मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिले, जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस और अब टीएमसी के गढ़ रहे हैं, वहां ओवैसी और हुमायूं कबीर की जोड़ी ने ममता बनर्जी की चिंताएं बढ़ा दी हैं. ओवैसी ने दावा किया कि उनके गठबंधन की जीत ही यह सुनिश्चित करेगी कि विधानसभा में मुसलमानों की आवाज मजबूती से गूंजे. उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस बार 'वोटिंग मशीन' बनने के बजाय 'किंगमेकर' बनें.
हुमायूं कबीर ने भी ओवैसी का समर्थन करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने मुसलमानों की जमीन पर मंदिर बनवाकर और उनकी अनदेखी कर विश्वासघात किया है. ओवैसी और हुमायूं कबीर ने गठबंधन का घोषणापत्र भी जारी किया. बता दें के दोनों का गठबंधन बंगाल की 180 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और उनका लक्ष्य केवल सीटें जीतना नहीं, बल्कि सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखना है. ओवैसी के इस तीखे तेवर ने यह साफ कर दिया है कि 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। अब देखना है कि चार मई को नतीजा आने के बाद किसका भीष्म प्रतिज्ञा पूरा हो पाता है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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