पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान बृहस्पतिवार शाम छह बजे समाप्त हो गया। अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित समय से पहले मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी गई। राज्य में शाम पांच बजे तक 92.50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें दक्षिण दिनाजपुर जिले में सबसे अधिक 93.12 प्रतिशत मतदान हुआ। शाम पांच बजे तक 3.60 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 90 प्रतिशत ने मतदान किया।2011 के बाद से, पश्चिम बंगाल एक ‘हाइपर-एंगेज्ड’ मतदाता वर्ग के रूप में विकसित हुआ है, जहां 2016 और 2021 के चुनावों में भी मतदान 80% से ऊपर है। आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि क्या लेफ्ट फ्रंट या अन्य विपक्षी दल इस उच्च भागीदारी का लाभ उठाकर वापसी कर पाएंगे। वर्तमान स्थिति यह बताती है कि बंगाल में अब उच्च मतदान एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है, भले परिणाम कुछ भी हो। यह मतदान प्रतिशत राज्य के हालिया चुनावी इतिहास में सबसे अधिक है। राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा। मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई। उम्मीदवारों पर हमलों समेत कुछ जिलों में छिटपुट हिंसा की घटनाओं ने बंगाल के चुनावी माहौल में तनाव पैदा कर दिया। निर्वाचन आयोग ने हिंसा के संबंध में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
EC ने बूथ से नदारद रहने पर कर्मचारियों को किया निलंबित पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान एक मतदान केंद्र से नदारद रहने के आरोप में निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को संबंधित बूथ के सभी मतदानकर्मियों को निलंबित कर दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। आयोग ने घटना की जांच के आदेश भी दिए और जिला निर्वाचन अधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अधिकारी ने बताया कि बूथ संख्या-9 पर तैनात सभी मतदानकर्मी दोपहर करीब 12 बजे खाना खाने के लिए एक साथ बाहर चले गए, जिससे बूथ कुछ समय के लिए खाली रह गया। उन्होंने यह भी बताया कि सेक्टर अधिकारी भी अनुपस्थित थे। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''इस चूक का संज्ञान लेते हुए, पीठासीन अधिकारी सहित सभी मतदानकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बाद में एक आरक्षित मतदान टीम को तैनात किया गया।'' उन्होंने कहा कि आरक्षित मतदान टीम के साथ बूथ पर मतदान जारी रहा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बृहस्पतिवार को 152 सीटों के लिए मतदान हुआ।
TMC ने भारी मतदान को ममता के जोरदार समर्थन का संकेत बताया तृणमूल कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस दावे का खंडन किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान ''परिवर्तन के लिए शानदार जनादेश'' का संकेत है। तृणमूल ने दावा किया कि इसके बजाय यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार के विकास एजेंडे के लिए जोरदार समर्थन को प्रदर्शित करता है। मोदी के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि मतदान प्रतिशत में हुई वृद्धि ''सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में निर्णायक रूप से गई है'' और यह भाजपा को स्पष्ट रूप से खारिज किये जाने का संकेत है। घोष ने शाम 5 बजे तक करीब 90 प्रतिशत मतदान होने का उल्लेख करते हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''भाजपा भारी मतदान को ठीक से नहीं समझ पा रही है। यह बदलाव के लिए वोट नहीं है, बल्कि (ममता) बनर्जी के शासन का जोरदार समर्थन है। बंगाल की जनता ने पहले चरण में ही भाजपा की कमर तोड़ दी है।'' राज्य में शाम 5 बजे तक 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दक्षिण दिनाजपुर जिले में सबसे अधिक 93.12 प्रतिशत मतदान हुआ।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बृहस्पतिवार को मतदान शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर मतदान में तेजी आयी और अपराह्न तीन बजे तक 68.77 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला। इस दौरान हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने और भाजपा उम्मीदवारों पर हमले की छिटपुट घटनाएं भी हुईं। पश्चिम बंगाल के 16 जिलों में हो रहे मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुबह सात बजे मतदान आरंभ हुआ। पहले दो घंटे में 3.60 करोड़ मतदाताओं में से 18.76 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और धीरे-धीरे मतदान में तेजी आयी।
पांच बजे तक करीब 90 प्रतिशत मतदान दर्ज पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बृहस्पतिवार को शाम पांच बजे तक करीब 90 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला। इस दौरान हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने और कम से कम तीन उम्मीदवारों पर हमले की छिटपुट घटनाएं भी हुईं। राज्य के हालिया चुनावी इतिहास में यह मतदान प्रतिशत सबसे अधिक है। मतदान शाम छह बजे समाप्त हो गया। अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित समय से पहले मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में नाम काटे जाने को लेकर विवाद के बीच राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई। मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें इस बात का संकेत थीं कि मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इसे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ। राज्य में शाम पांच बजे तक 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें दक्षिण दिनाजपुर जिले में सबसे अधिक 93.12 प्रतिशत मतदान हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि मतदान में लोगों की भारी भागीदारी बढ़ी हुई राजनीतिक गोलबंदी और एसआईआर के सांख्यिकीय प्रभाव दोनों को दर्शाती है, जिसके तहत राज्य भर में मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे। पहले दो घंटे में 3.60 करोड़ मतदाताओं में से 18.76 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और धीरे-धीरे मतदान में तेजी आई। पूर्वाह्न 11 बजे तक 41.11 प्रतिशत और अपराह्न एक बजे तक 62.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। तीन बजे तक 78 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। उम्मीदवारों पर हमलों समेत कुछ जिलों में छिटपुट हिंसा की घटनाओं ने बंगाल के चुनावी माहौल में अपेक्षित तनाव पैदा कर दिया।
मतदान में आगे और इजाफा होने की संभावना
पूर्वाह्न 11 बजे तक 41.11 प्रतिशत और अपराह्न एक बजे तक 62.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। तीन बजे तक 78 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। मतदान में आगे और इजाफा होने की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ जिलों में छिटपुट हिंसा की घटनाओं ने बंगाल के चुनावी माहौल में अपेक्षित तनाव पैदा कर दिया। निर्वाचन आयोग ने हिंसा के संबंध में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु सरकार के साथ उस समय हाथापाई की गई जब वह गड़बड़ी की खबरों के बाद एक मतदान केंद्र की ओर जा रहे थे। शुभेंदु सरकार ने दावा किया कि पुलिस की मौजूदगी में उनकी पिटाई की गई और उनके वाहन में तोड़फोड़ की गई। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शुभेंदु सरकार ने एक बूथ के पास अशांति फैलाने की कोशिश की थी जिसके कारण स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
एक अन्य घटना में, आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के रहमत नगर में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर पथराव किया गया जिससे उसकी पिछली खिड़कियों के शीशे टूट गए। अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया, "जब मैं मतदान केंद्र परिसर से बाहर निकल रही थी, तब मेरी कार पर पत्थर फेंके गए, जिससे पीछे की खिड़की का शीशा टूट गया। यह साफ है कि इसके पीछे कौन है। यह चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है।" उन्होंने बताया कि घटना के संबंध में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने बताया कि वह घटना की जांच कर रही है। साथ ही इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मुर्शिदाबाद के नौदा में आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) और तृणमूल के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। सुबह से ही तनाव बढ़ता जा रहा था, जब एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर एक मतदान केंद्र पर गए और उन्हें तृणमूल समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। कबीर ने बाद में सत्तारूढ़ पार्टी पर डराने-धमकाने और गड़बड़ी का आरोप लगाया जबकि तृणमूल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए हिंसा की निंदा की। बीरभूम के लाभपुर में उस समय तनाव फैल गया, जब भाजपा उम्मीदवार देबाशीष ओझा के एक पोलिंग एजेंट पर हमला किया गया, जिसमें उसके सिर पर चोट लगी।
झड़प में कम से कम दो लोग घायल
इस घटना के बाद इलाके में अशांति फैल गई। मुरारई में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में कम से कम दो लोग घायल हो गए जिससे जिले में तनाव और बढ़ गया। हालांकि, तृणमूल ने इन आरोपों से इनकार किया। कूच बिहार के माथाभांगा में आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर तृणमूल और भाजपा नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। दोनों पक्षों ने मतदान केंद्रों के पास मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप एक-दूसरे पर लगाया जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। पूर्व मेदिनीपुर के मोयना में उस समय तनाव फैल गया, जब भाजपा समर्थकों ने कथित तौर पर तृणमूल उम्मीदवार के खिलाफ नारेबाजी की। जिला-वार आंकड़ों के अनुसार, बांकुड़ा में लगभग 79 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 79.72 प्रतिशत, कूच बिहार में लगभग 79 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं पश्चिम मेदिनीपुर (65.77 प्रतिशत) और झाड़ग्राम (65.31 प्रतिशत) में भी अच्छी भागीदारी दर्ज की गई। मालदा (लगभग 76 प्रतिशत) और अलीपुरद्वार (लगभग 77 प्रतिशत) में मतदान थोड़ा कम रहा।
अधिकारियों ने बताया कि दोपहर तक निर्वाचन आयोग को मतदान से जुड़ी करीब 500 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि 'सीविजिल' ऐप के माध्यम से 375 अन्य शिकायतें दर्ज की गईं। नंदीग्राम में अपना वोट डालने के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के मजबूत प्रदर्शन का विश्वास जताया और आरोप लगाया कि ''तृणमूल द्वारा संरक्षित अपराधी'' मतदाताओं को डरा रहे हैं। तृणमूल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर शांतिपूर्ण मतदान में बाधा डालने का प्रयास करने और कुछ अधिकारियों के आचरण में पक्षपात का आरोप लगाया। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संपर्क किया। वरिष्ठ तृणमूल नेता अनुब्रत मंडल ने बीरभूम में मतदान करने के बाद चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बताया और मतदाताओं से शांतिपूर्वक मतदान करने की अपील की। पहले चरण में उत्तर बंगाल की सभी 54 विधानसभा सीटों के साथ-साथ दक्षिण बंगाल और जंगलमहल के कुछ हिस्सों में मतदान हो रहा है। इन क्षेत्रों को भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीच प्रमुख चुनावी रणक्षेत्र माना जा रहा है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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