- बंगाल में बड़ा उलटफेर, 15 साल बाद ममता बनर्जी की सत्ता पर खतरा; क्या इस बार खिल पाएगा कमल?
पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 294 विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर 23 अप्रैल को हुए मतदान में 93.19 फीसदी बंपर वोटिंग के साथ बुधवार को दूसरे और अंतिम चरण के चुनावों में भी आजादी के बाद इस बार रिकॉर्डतोड़ वोटिंग हुई।छिटपुट हिंसा के बीच चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। खबर लिखे जाने तक 91.80 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी। जिसमें कुछ पोलिंग बूथों से आंकड़े आना बाकी था। इसके बाद इस वोटिंग टर्नआउट में कुछ और बढ़ोतरी होगी। दोनों चरणों के मतदान के बाद बंगाल में 92 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत है, लेकिन अलग-अलग एजेंसियों के सर्वे में तस्वीर पूरी तरह बंटी हुई नजर आ रही है. कुछ एग्जिट पोल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सत्ता में वापसी दिखा रहे हैं, तो कुछ सर्वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पहली बार बंगाल में सरकार बनाते हुए बता रहे हैं. चाणक्य स्ट्रेटजी के एग्जिट पोल में तृणमूल कांग्रेस को 130 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 150 से 160 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य दलों के खाते में 6 से 10 सीटें जा सकती हैं. पीपल्स पल्स के सर्वे में टीएमसी को 117 से 187 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। भाजपा को 95 से 110 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य को 1 से 4 सीटें मिलने की संभावना है.मैट्रिज के एग्जिट पोल में टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ बढ़त में दिखाई गई है। अन्य दलों को 6 से 10 सीटें मिल सकती हैं.पी-मार्क के सर्वे में तृणमूल कांग्रेस को 118 से 138 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं। अन्य दलों को 2 से 6 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है.पोल डायरी के अनुमान के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में टीएमसी को 99 से 127 सीटें, भाजपा को 142 से 171 सीटें, कांग्रेस को तीन से पांच, लेफ्ट गठबंधन को दो से तीन और अन्य के खाते में एक सीटें जाने का अनुमान है. प्रजा पोल के सर्वे के अनुसार, टीएम को 85 से 110 सीटें, भाजपा को 178 से 208 सीटें और अन्य को 0 से पांच सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. बता दें कि ये सिर्फ एग्जिट पोल है, न कि आधिकारिक चुनाव परिणाम। बंगाल के रण में इस बार ममता बनर्जी का जादू चलता नहीं दिख रहा है. 6 प्रमुख एग्जिट पोल्स में से 5 ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने परिवर्तन का मन बना लिया है। 2021 में जिस भाजपा को दीदी ने पटखनी दी थी, वही भाजपा 2026 में सुनामी बनकर लौटती दिख रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए जो दांव चल रही थीं, वे उलटे पड़ गए हैं। इन आंकड़ों ने न केवल टीएमसी के कैंप में सन्नाटा पसरा दिया है, बल्कि राजनीतिक पंडितों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बंगाल में दशकों पुरानी वामपंथी और फिर टीएमसी वाली राजनीति का युग अब अंत की ओर है?
कमल की लहर में ढह गए टीएमसी के सारे समीकरण
बंगाल की सत्ता का रास्ता ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरता है और इस बार एग्जिट पोल्स बता रहे हैं कि भाजपा ने वहां जबरदस्त सेंधमारी की है. मैट्रिज के एग्जिट पोल की मानें तो भाजपा को 146 से 161 सीटें मिल सकती हैं, जबकि टीएमसी 125 से 140 के बीच सिमट रही है।इस मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, चाणक्य स्ट्रैटजी ने भी इसी तरह के आंकड़े पेश किए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि सत्ता विरोधी लहर इस बार बहुत गहरे स्तर पर काम कर रही थी। लोगों के बीच भ्रष्टाचार और स्थानीय स्तर पर धांधली के जो मुद्दे थे, उन्होंने ममता बनर्जी के 'महिला कार्ड' को भी पीछे छोड़ दिया है। अगर ये सर्वे नतीजों में बदलते हैं, तो भाजपा के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत होगी:
प्रजा पोल का 'महा-सर्वे' और भाजपा की प्रचंड जीत
इस बार के एग्जिट पोल्स में सबसे ज्यादा चर्चा प्रजा पोल की हो रही है. इस मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, प्रजा पोल ने जो आंकड़े दिए हैं, वे किसी भी टीएमसी समर्थक की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. इस सर्वे में भाजपा को 178 से 200 सीटें दी गई हैं, जो राज्य की कुल 294 सीटों का दो-तिहाई के करीब है. वहीं ममता बनर्जी की पार्टी को महज 85 से 110 सीटों के बीच दिखाया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि भाजपा ने बंगाल के उन दुर्गों को भी जीत लिया है जिन्हें टीएमसी का अभेद्य किला माना जाता था. सीनियर एडिटर मानते हैं कि अगर प्रजा पोल का अनुमान सटीक बैठता है, तो यह माना जाएगा कि बंगाल की जनता ने अबकी बार 'चुपचाप कमल छाप' के नारे को पूरी गंभीरता से लिया है।
चाणक्य और पी-मार्क के आंकड़ों में छिपे बड़े संकेत
सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि पी-मार्क और पोल डायरी जैसे संस्थानों ने भी भाजपा को बहुमत के पार दिखाया है. पी-मार्क के अनुसार भाजपा 150 से 175 सीटें जीत सकती है. पोल डायरी ने भाजपा को 142 से 171 सीटें दी हैं. इन दोनों ही सर्वे में टीएमसी कहीं भी 140 का आंकड़ा पार करती नहीं दिख रही. जानकारों का कहना है कि टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती शहरी मध्यवर्ग और युवाओं की नाराजगी रही है. रोजगार की कमी और औद्योगिक पिछड़ापन जैसे मुद्दों पर भाजपा ने जिस तरह से दीदी को घेरा, उसका असर अब मतों के ध्रुवीकरण के रूप में साफ नजर आने लगा है.
पीपल्स पल्स का दावा: क्या गलत साबित होंगे बाकी सब?
हालांकि, इन 5 एग्जिट पोल्स के शोर के बीच 'पीपल्स पल्स' का सर्वे बिल्कुल अलग कहानी कह रहा है. इस मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, पीपल्स पल्स ने दावा किया है कि टीएमसी 177 से 187 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी. इस सर्वे ने भाजपा को सिर्फ 95 से 110 सीटों पर सीमित कर दिया है. यह इकलौता ऐसा सर्वे है जो दीदी के समर्थकों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है. अब सवाल यह उठता है कि क्या 5 एजेंसियां गलत साबित होंगी या फिर पीपल्स पल्स का जमीनी आकलन बाकी सबसे बेहतर निकलेगा? बंगाल में अक्सर 'साइलेंट वोटर' का प्रभाव रहता है, जो अपनी राय सार्वजनिक नहीं करता. हो सकता है कि इसी वोटर ने पीपल्स पल्स को कुछ अलग संकेत दिए हों.
विदाई की बेला या फिर होगा कोई बड़ा चमत्कार?
2026 का यह विधानसभा चुनाव बंगाल के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. अगर एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा सत्ता में आती है, तो यह भारतीय राजनीति की दिशा बदल देगा. मतगणना के दिन तक सस्पेंस बना रहेगा, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि दीदी के लिए अपनी कुर्सी बचाना इस बार लोहे के चने चबाने जैसा है. भाजपा ने जिस तरह से बूथ स्तर पर मैनेजमेंट किया और धुआंधार रैलियां कीं, उसका प्रतिफल इन आंकड़ों में झलकता है. वहीं टीएमसी अभी भी इस भरोसे में है कि उनकी सरकारी योजनाएं उन्हें जीत दिला देंगी. अब देखना यह है कि 4 मई को जब ईवीएम का पिटारा खुलेगा, तो उसमें से 'कमल' निकलता है या फिर दीदी की 'घास-फूल'। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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