- राष्ट्रपति के अपमान को बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है भाजपा
- आदिवासी समाज में इसको लेकर रोष, पीएम सहित अन्य नेताओं ने जताई नाराजगी
बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा विवादों में घिर गया है। इसके पहले आदिवासी सांसद खगेन मुर्मू पर जानलेवा हमला को लेकर आदिवासी समाज नाराज था ही अब राष्ट्रपति के अपमान को लेकर बैठे बैठाए बल मिल गया है। दरअसल पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची थीं। प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति का स्वागत राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करना चाहिए था। हालांकि ममता बनर्जी नहीं पहुंचीं। इसको लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुख जताया। दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी के विधाननगर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का उद्घाटन किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने जताई नाराजगी: पहले यह कार्यक्रम बागडोगरा एयरपोर्ट के पास होना था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया गया। इसको लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर यह कार्यक्रम पहले से तय स्थान पर आयोजित होता तो बड़ी संख्या में लोग आते, लेकिन प्रशासन के मन में क्या चल रहा है यह कोई नहीं जानता। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रशासन ने सम्मेलन के लिए ऐसी जगह चुनी जहां संथाली लोग पहुंच ही नहीं सकते और मुझे बहुत दुख है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए लेकिन वह नहीं आईं। ममता दीदी मेरी छोटी बहन जैसी हैं, मुझे नहीं पता वह मुझसे नाराज थी, इसलिए ऐसा हुआ।
पीएम मोदी ने ममता को घेरा: इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बंगाल के टीएमसी सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरा। पीएम मोदी ने कहा, “यह शर्मनाक है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में गहरा दुख पहुंचाया है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है। यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी लापरवाही से ले रही है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में सुधरने की भावना जागृत होगी।”
ममता ने मुर्मू पर लगाया आरोप: इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर निशाना साधा और उन पर भाजपा के इशारों पर विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति करने का आरोप लगाया। राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा की गई टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय का दुरुपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री ने कोलकाता में एक धरना स्थल पर कहा, ”भाजपा इतना नीचे गिर गई है कि वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इस्तेमाल राज्य को बदनाम करने के लिए कर रही है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम में राज्य प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के बारे में उन्हें दी गई जानकारी गलत थी। चुनाव से पहले ऐसे कार्यक्रमों में हमेशा शामिल होना उनके लिए संभव नहीं है। अगर आप साल में एक बार आती हैं तो मैं आपका स्वागत कर सकती हूं, लेकिन अगर आप चुनाव के दौरान आती हैं, तो मेरे लिए आपके कार्यक्रमों में शामिल होना संभव नहीं होगा क्योंकि मैं लोगों के अधिकारों के लिए काम कर रही हूं।” पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के साथ ही सी.वी. आनंद बोस का कार्यकाल समाप्त हो गया। उनका कार्यकाल शुरू से ही विवादों और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ टकराव के कारण चर्चा में रहा। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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