पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने 28 फरवरी 2026 को अंतिम विशेष सारांश संशोधन (SSR) के तहत नई वोटर लिस्ट जारी कर दी। SIR के बाद फाइनल लिस्ट में मतदाता घटकर 70459284 हो गए, जिसमें से 36022642 पुरुष, 34435260 महिला और 1382 थर्ड जेंडर वोटर हैं। यानी SIR के बाद पश्चिम बंगाल में 6178245 मतदाता घट गए. जिसमें 28,81223 पुरुष और 32,96627 महिला वोटर हैं। वहीं, 60,06,675 मतदाताओं के नाम अभी भी 'एडजुडिकेशन' यानी सत्यापन प्रक्रिया के तहत लंबित हैं. लेकिन उन्हें पोस्ट-SIR इलेक्टोरल रोल में शामिल कर लिया गया है। रिवीजन प्रोसेस इलेक्शन कमीशन के निर्देशों के अनुसार किया गया था।
19 लाख मतदाता माइग्रेट पाए गए: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान 58,20,899 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट पब्लिश होने से पहले काटे गए। मृत 24,16,852, अनुपस्थित 12,20,039, स्थानांतरित (Shifted) 19,88,076, पहले से पंजीकृत (Already Enrolled) 1,38,328 और अन्य (Others) 57,604 पाए गए।
16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची के अनुसार राज्य में कुल 7,08,16,630 मतदाता दर्ज किए गए थे
फॉर्म-6 और 6A के तहत 1,82,036 नए मतदाताओं को जोड़ा गया, जिनमें 89,445 पुरुष, 92,583 महिला और 8 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
फॉर्म-8 के माध्यम से 6,671 प्रविष्टियों में संशोधन किया गया, जिसमें 1,953 पुरुष, 4,717 महिला और 1 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं.
फॉर्म-7 के तहत 5,46,053 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिनमें 2,68,147 पुरुष, 2,77,877 महिला और 29 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं
इन सभी परिवर्तनों के बाद 28 फरवरी 2026 तक राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7,04,59,284 रह गई है। अंतिम सूची में 3,60,22,642 पुरुष, 3,44,35,260 महिला और 1,382 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. आयोग का कहना है कि नाम हटाने की कार्रवाई मुख्य रूप से मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लिकेशन और मतदाता के ट्रेस न हो पाने जैसी वजहों से की गई है।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो बैंकुरा में अब तक करीब 1.18 लाख, नदिया में 2.73 लाख, उत्तर कोलकाता में लगभग 17 हजार और अलीपुरद्वार में 1,02,835 मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटाए गए हैं। दक्षिण कोलकाता में भी हजारों नामों को सूची से बाहर किया गया है, जबकि कई मामलों पर अभी निर्णय लिया जाना बाकी है।
राज्य के कई हिस्सों में संशोधित सूची की हार्ड कॉपी जिला प्रशासन द्वारा बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को सौंप दी गई है इनमें से एक प्रति स्थानीय मतदान केंद्रों पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराई जा रही है. मान्यता प्राप्त आठ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को सूची की सॉफ्ट कॉपी भी दी जाएगी, जबकि बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को हार्ड कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।
मतदाता अपनी स्थिति की जांच निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, राज्य CEO पोर्टल या ECI Net मोबाइल ऐप के जरिए नाम या EPIC नंबर दर्ज कर कर सकते हैं। जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) की वेबसाइटों पर भी सूची उपलब्ध कराई जाएगी। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। बंगाल के सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 58 लाख नाम छूट गए थे। असल में मरे हुए, ट्रांसफर हुए, नकली वोटर लिस्ट से छूट गए थे। इसके बाद एसआईआर में सुनवाई के बाद पता चला है कि अब तक 5 लाख नाम छूट गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि बाकी करीब 65 लाख नामों पर अभी ट्रायल चल रहा है।नचुनाव आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद फाइनल वोटरलिस्ट जारी कर दी है। इसमें करीब 65 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर मनोज कुमार अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य में अभी कुल वोटर्स की संख्या 7,04,59,284 है। चुनाव आयोग की जारी सूची से पता चलता है कि नवंबर में प्रक्रिया शुरू होने के बाद से नदिया जिले में लगभग 2.71 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। जबकि बांकुड़ा में कुल 1.18 लाख नाम काटे गए हैं। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, उत्तरी कोलकाता क्षेत्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से लगभग 4.07 लाख नाम हटाए गए हैं।
उत्तरी कोलकाता क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और उन पर वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। इनमें से लगभग 3.90 लाख लोगों के नाम मसौदा चरण में ही हटा दिए गए और अंतिम सूची में 17,000 लोगों के नाम हटाए गए।
अधिकारी ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची में अब लगभग 29,15,000 नाम हैं, जो प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 1.18 लाख नामों की शुद्ध कटौती को दर्शाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश की सीमा से लगे नदिया जिले में लगभग 2.73 लाख नाम हटाए गए जिससे अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 41.45 लाख रह गई जबकि पिछले साल चार नवंबर को एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने पर यह संख्या 44.18 लाख थी। 16 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद यह आंकड़ा घटकर 42,02,261 हो गया था।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी बंगाल के अलीपुरद्वार में अंतिम मतदाता सूची में 11,96,651 नाम शामिल थे, जबकि जिले में कुल 1,02,835 नाम हटाए गए। कई जिलों में अपडेट सूचियों की प्रति सार्वजनिक रूप से लगा दी गई है।
दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं पर विचार किया गया, जिनमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं के संबंध में 'तार्किक विसंगतियां' पाई गईं और 31 लाख मतदाताओं की 'मैपिंग' (दस्तावेजों का मिलान) नहीं हुई थी। लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम अब भी जनगणना प्रपत्रों में 'तार्किक विसंगतियों' के आधार पर कानूनी कार्रवाई के अधीन हैं।
आर-पार के मूड़ में ईरान, US के 7 एयरबेसों पर दागीं मिसाइलें, कहा- डिप्लोमैटिक प्रोसेस के बीच हमला राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है। राज्य में एसआईआर 2002 के बाद से इस तरह का पहला राज्यव्यापी अभ्यास है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पिछले साल चार नवंबर को मतदाताओं के बीच जनगणना प्रपत्रों के वितरण के साथ शुरू हुई थी। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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