राष्ट्रपति के अपमान को लेकर भाजपा चौतरफा हमलावर, सिलीगुड़ी में गांधी मूर्ति के सामने विरोध प्रदर्शन तो विधाननगर में धिक्कार रैली
मार्च 08, 2026
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सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान को लेकर भाजपा चौतरफा हमलावर है। आज सिलीगुड़ी के भाजपा विधायक शंकर घोष के नेतृत्व में गांधी मूर्ति के सामने धरना प्रदर्शन किया गया। विधाननगर में भाजपा विधायक दुर्गा मुर्मू के नेतृत्व में आदिवासी समाज के लोगों ने धिक्कार रैली निकाली। विधायक शंकर घोष ने कहा कि राष्ट्रपति का अपमान करने के बाद भी सीएम माफी के बदले राष्ट्रपति पर ही आरोप लगा रही है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को राज्य में आदिवासियों के बीच विकास की रफ़्तार पर सवाल उठाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर निशाना साधा और उन पर विधानसभा चुनावों से पहले 'बीजेपी के इशारे पर' राजनीति करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती है, लेकिन चुनाव के समय और जानकारी के अभाव में हर कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए मुमकिन नहीं है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस समय धरने पर बैठी हैं और उन्हें उस विशिष्ट कार्यक्रम की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी।उन्होंने तर्क दिया कि आयोजकों या फंडिंग के बारे में राज्य सरकार को सूचित नहीं किया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार- 'राष्ट्रपति का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन व्यस्त चुनावी माहौल में जनता के अधिकारों के लिए लड़ना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर दी गई जानकारी को भी पूरी तरह गलत बताया.
राष्ट्रपति के आरोपों को बताया 'भाजपा का एजेंडा'
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मू पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें भाजपा की नीतियों के जाल में फंसाया गया है. ममता ने कहा कि उन्हें यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को भाजपा का राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. उनके मुताबिक केंद्र की प्राथमिकता केवल राजनीति करना है. जबकि उनकी सरकार के लिए बंगाल की जनता और उनके हित सबसे ऊपर हैं. यह पूरी तरह राजनीतिक द्वेष है। जरा सोचिए ऐसे मुख्यमंत्री को क्या कहा जाय। गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल के छोटा होने और प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर दुख जताया था. उन्होंने कहा था कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन देश के राष्ट्रपति पद के लिए तय गरिमा और नियमों का पालन होना अनिवार्य है। मुर्मू की इस टिप्पणी ने ही ममता बनर्जी को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने और केंद्र पर पलटवार करने का मौका दिया है। इस विवाद ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। @बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट
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