राष्ट्रपति का अपमान देश का अपमान नारा लगाते बंगाल में आदिवासी उतरे सड़क पर, ममता से मांग रहे जवाब आदिवासी समाज से क्यों है चिढ़
March 11, 2026
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बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है। पिछले एक हफ्ते में ऐसी घटनाएं हुईं जिनसे राज्यपाल और यहां तक कि राष्ट्रपति के पद भी सियासी बहस के केंद्र में आ गए।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान के विरोध में सोमवार को सिलीगुड़ी में विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध रैली निकाली गई। रैली में सचेतन नागरिक मंच सिलीगुड़ी और जनताजी सुरक्षा मंच की पहल पर एयरव्यू मोड़ से एक प्रतिवाद सभा का आयोजन किया गया।संगठन के सदस्यों ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के प्रति किया गया यह कथित अपमान अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य है। लक्ष्मण वंशल ने कहा कि बंगाल की सीएम ममता बनर्जी वह किसी को भी कुछ भी बोल देती हैं। इसी प्रकार से उन्होंने जेपी नड्डा पर फब्तियां कसी थीं। वह किसी को भी कुछ भी ऊल-जलूल बोल देती हैं और फिर उन अपशब्दों को वापिस भी नहीं लेतीं। वह समझती हैं कि उन पर सात ख़ून माफ़ हैं! भाजपा का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कई बार उनके कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, खासकर चुनावों के समय। भाजपा ने आरोप लगाया कि कई कार्यकर्ताओं की हत्या और मारपीट की घटनाएं हुईं।
असेंबली और लोकसभा इलेक्शन के दौरान और उसके बाद भाजपा ने दावा किया कि उनके समर्थकों को निशाना बनाया गया और कई लोगों को अपना घर छोड़कर भागने पड़ा। भाजपा नेताओं का आरोप रहा कि राज्य की पुलिस और प्रशासन का उपयोग विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए किया गया। हुआ यह कि महामहिम द्रौपदी मुर्मू अंतर्राष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम-बंगाल के दार्जिलिंग पहुंचीं। इसके बाद द्रौपदी मुर्मू सिलीगुड़ी उपमंडल के बिधाननगर पहुंचीं, जहां उन्होंने पश्चिम-बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपनी नाराजगी जताई। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें मेरे कार्यक्रम में साथ होना चाहिए था।
राष्ट्रपति ने कहा, "मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है। ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं, शायद वह मुझसे नाराज हैं, इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा। कोई बात नहीं, मुझे इस बात का कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं है।" राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में कार्यक्रम को संबोधित करना था लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी।
इसलिए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह मूल स्थल पर गईं और वहां अपनी बात रखी। दरअसल राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में कार्यक्रम को संबोधित करना था लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी। इसलिए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह मूल स्थल पर गईं और वहां अपनी बात रखी। राष्ट्रपति मुर्मू की नाराजगी के बाद बीजेपी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा।
पश्चिम बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर राज्य सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा, “आज पश्चिम-बंगाल में घटी घटनाओं से ममता बनर्जी सरकार के नेतृत्व में संवैधानिक ढांचे के पूर्ण पतन का संकेत मिलता है। एक दुर्लभ और अभूतपूर्व घटनाक्रम में भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने सिलीगुड़ी यात्रा के दौरान तैयारियों और प्रोटोकॉल के अभाव पर खुले तौर पर नाराजगी व्यक्त की।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संथाली सम्मेलन के लिए अनुमति देने से इन्कार कर दिया, जहां स्वयं राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थीं।” जब कोई राज्य सरकार भारत के राष्ट्रपति के पद की गरिमा का अनादर करने लगती है तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि संवैधानिक मर्यादा और शासन व्यवस्था के पतन को भी दर्शाता है।
यह केवल अभद्रता नहीं है। यह संस्थागत अनादर है और एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि बंगाल में शासन व्यवस्था किस प्रकार अराजकता में डूब गई है। उन्होंने कहा कि साल 2003 को संथाल समुदाय के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उस साल, संथाल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में लिखा गया भारत का संविधान जारी किया गया था। राष्ट्रपति ने कहा कि 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी स्क्रिप्ट बनाई थी।
हाल ही में हमने इस इन्वेंशन की 100वीं सालगिरह मनाई है। उनके योगदान ने संथाल भाषा बोलने वालों को अपनी बात कहने का एक नया मौका दिया। उन्होंने “बिदु चंदन,” “खेरवाल वीर,” “दलेगे धन,” और "सिदो कान्हू – संताल हुल” जैसे नाटक भी लिखे। इस तरह उन्होंने संथाल समुदाय में साहित्य और सामाजिक चेतना की रोशनी फैलाई। संथाल समुदाय के लोगों को दूसरी भाषाएं और स्क्रिप्ट पढ़नी चाहिए लेकिन अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा, “आज के समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान देना ज़रूरी है। आदिवासी युवाओं को शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ना चाहिए लेकिन इन सभी कोशिशों में उन्हें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। इससे हमें एक सशक्त समाज और एक मजबूत भारत बनाने में मदद मिलेगी। यह देश कानून से चलता है न कि हठधर्मिता से। अतः ममता दीदी को सभी का मान-सम्मान करना चाहिए। (बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट)
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