दो विषयों में एम.ए. और पीएचडी। श्रीराम नवमी शोभायात्रा में शामिल होने के लिए गुरुवार को एनजेपी पहुंची।स्टेशन पर उनका जयकारे के साथ भव्य स्वागत किया गया। साध्वी प्राची जैसे फायरब्रांड नेताओं की मौजूदगी इन रैलियों के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है। वह पहले भी लव जिहाद के आरोपियों के लिए कहती है ऐसे लोगों को "नो जेल, नो बेल, सीधा 72 हूरों से मेल" करा देना चाहिए। उन्होंने हिंदू लड़कियों से भी कहा कि वे दुर्गा बनें, काली बनें, लेकिन बुर्केवाली कभी ना बनें।कहा कि साध्वी प्राची ने कहा कि प्रदेश की राजनीति जिस स्तर तक पहुंच गई है। उसकी कल्पना शायद भगवान श्रीराम ने भी नहीं की होगी।
यह श्रीराम के नारे से भी लोगों को चिढ़ है। उन्होंने कहा कि राजनीति में कम से कम वक्तव्य की पवित्रता होनी चाहिए। लेकिन आज विपक्ष हिंदुओं के आराध्य भगवान श्रीराम पर कटाक्ष कर रहा है, जो बेहद शर्मनाक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले तृणमूल कांग्रेस,सपा, फिर कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अपनी निम्न स्तरीय राजनीति को सार्वजनिक मंचों पर उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जीवन के हर मोड़ पर राम नाम का महत्व है। सुबह की शुरुआत से लेकर जीवन की अंतिम यात्रा तक राम नाम जुड़ा होता है तो फिर राम नाम से आपत्ति क्यों? उन्होंने आरोप लगाया कि केवल हिंदू देवी-देवताओं का ही मजाक उड़ाया जाता है और हिंदू समाज इसे चुपचाप सहन करता है। साथ ही उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने भी अंतिम समय में भगवान राम का नाम लिया था और तभी उद्धार संभव हुआ। साध्वी प्राची अपने बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहती है। बोल पड़ीं मैंने चार बच्चे ही पैदा करने को कहा तो भूकंप आ गया, ये लोग जो 40 पिल्ले पैदा करते हैं और फिर लव जिहाद फैलाते हैं उस पर कोई बात नहीं करता।बीजेपी नेता और विश्व हिंदू परिषद से ताल्लुक रखने वाली ये हैं साध्वी प्राची। विवादों से पुराना नाता है इनका। विश्व हिंदू परिषद से ताल्लुक रखने वाली ये हैं साध्वी प्राची।विवादों से पुराना नाता है इनका। विश्व हिंदू परिषद के एक सम्मेलन में साध्वी प्राची ने 11 बच्चे पैदा करने के लिए एक हिंदू बुजुर्ग का सम्मान भी किया। साध्वी प्राची मूल रूप से यूपी के बागपत जिले की निवासी हैं. वहां के गांव सिरसली में एक दलित परिवार में साध्वी प्राची का जन्म हुआ. इनका पूरा परिवार आर्य समाजी है। परिवार में माता-पिता के अलावा तीन भाई और एक बहन है. ये अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. पिता हरबीर सिंह आर्य सरकारी इंटर कॉलेज में शिक्षक थे।
साध्वी प्राची ने योग और वेद विषयों में डबल एम.ए. किया। साध्वी ऋतम्भरा की गुरु बहन प्राची ने वेदों पर शोध किया। डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल की. सारी शिक्षा-दिक्षा गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार और मुज़फ्फरनगर में हुई। वो हरियाणा के करनाल में महिला गुरुकुल कॉलेज की प्रिंसिपल भी रहीं।बचपन से संघ से जुड़ी रहीं।1995 में प्राची ने भगवा वस्त्र पहने और साध्वी बन गई। बरनावा (अब छपरौली) से भाजपा विधायक रहे त्रिपाल सिंह धामा को उनका राजनीतिक गुरु कहा जाता है।.
2011 में बडौत में बूचड़खानों के विरोध में जैनमुनि मैत्रीपरभ सागर के साथ साध्वी ने आंदोलन किया। 2012 में बीजेपी ने उन्हें पुरकाजी से टिकट दिया, लेकिन वो चुनाव हार गईं। लोकसभा चुनाव 2014 में साध्वी डॉ. प्राची को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा भी खूब रही थी। लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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