पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती और उनके आवागमन पर अंतिम निर्णय अब भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक लेंगे।भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल प्रशासन को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में उपलब्ध केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की रूट मार्च और क्षेत्र प्रभुत्व अभ्यास का पहला चरण 14 मार्च की रात आठ बजे तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।
यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक जिले में संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी, जो जमीनी स्तर पर सुरक्षा की जरूरतों का आकलन करेंगी। ये टीमें संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आवश्यक केंद्रीय बलों की संख्या की सिफारिश करेंगी। अंतिम निर्णय नामित पुलिस पर्यवेक्षकों द्वारा लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव राजनीतिक दलों के साथ आयोग की बैठक के दौरान मिले सुझावों के बाद किया गया है। कई दलों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि पिछले चुनावों में कई बार केंद्रीय बलों का समुचित उपयोग नहीं हुआ और उन्हें उन क्षेत्रों से दूर रखा गया जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता थी।इसी के मद्देनजर आयोग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने तथा सुरक्षा बलों की तैनाती को आवश्यकता के अनुसार सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है।
इस बीच आयोग ने राज्य प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी जिलों में उपलब्ध केंद्रीय बलों द्वारा रूट मार्च और क्षेत्र प्रभुत्व अभ्यास का पहला चरण 14 मार्च को रात 8 बजे तक पूरा किया जाए। इन अभ्यासों का उद्देश्य मतदाताओं में विश्वास पैदा करना और चुनाव से पहले मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का संदेश देना है।जानकारी के अनुसार, अब तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 480 कंपनियां दो चरणों में पश्चिम बंगाल पहुंच चुकी हैं और आयोग ने इनकी जिला-वार तैनाती भी पूरी कर ली है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने समीक्षा दौरे के दौरान कहा कि चुनावी हिंसा के मामलों में आयोग सख्त और समझौता न करने वाला रुख अपनाएगा। उन्होंने दोहराया कि चुनाव से पहले, दौरान और बाद में होने वाली किसी भी हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति लागू की जाएगी।चुनाव आयुक्त ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 80,000 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से लगभग 61,000 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग राज्य भर के मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग लागू किया जाएगा। ज्ञानेश कुमार ने आगे बताया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी की है। दिसंबर 2025 में मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद फॉर्म 7 का उपयोग करके 5,46,053 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। एसआईआर प्रक्रिया से पहले पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ थी, जबकि अब यह संख्या 7.04 करोड़ है। इससे सूची में 61 लाख से अधिक नामों का परिवर्तन हुआ है। 6,006,675 मतदाताओं के नाम अभी भी विचाराधीन हैं। पश्चिम बंगाल में पुरुष 3.28 करोड़, महिला 3.16 करोड़, थर्ड जेंडर 1152, दिव्यांग 4.16 लाख, वयोवृद्ध 3.79 लाख, शतायु व्यक्ति 6,653, सर्विस मतदाता 1.08 लाख, 20 से 29 साल के 1.31 करोड़, 18 से 19 साल के 5.23 लाख वोटर हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि डाक मतपत्रों की गिनती पूरी होने के बाद ही ईवीएम/वीवीपीएटी की अंतिम से पहले वाली गिनती की जाएगी। मतदान परिणामों की घोषणा के 72 घंटों के भीतर पहली बार इंडेक्स कार्ड और सांख्यिकीय रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएंगी। फॉर्म 17सी और ईवीएम डेटा में विसंगति होने पर हर मामले में वीवीपीएटी पर्चियों की अनिवार्य गिनती की जाएगी। परिणाम घोषित होने के 7 दिनों के भीतर उम्मीदवार द्वारा आवेदन करने पर 5 फीसदी ईवीएम में जली हुई मेमोरी/माइक्रो कंट्रोलर की जांच और सत्यापन किया जाएगा। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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