*डालें इक दूजे पर रंग अबीर गुलाल ।।*
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राग द्वेष का दहन करें हम,
स्वजन हिल मिल खेलें होली।
प्रकृति सुन्दरी थिरक रही,
मोहक मन्मथ करे ठिठोली।
युवा वाल वृद्ध अति उमंग,
डालें इक दूजे पर रंग अबीर ।
कर हुड़दंग थिरकें चहुं दिस,
भर भर मारें रंग ले पिचकारी।
गोपी संग गोप गावें फाग झूम,
मदमस्त दौरि दौरिडालें रंग अबीर।
सारी देह रंगें रंग, 'अटल' अधीर।।
खुशियां बांटे अपनों संग,
भारत मां की रक्षा में रह तत्पर।
दुःख सुख में होवें समभाव,
देश प्रेम भाव भरें हो परस्पर।।
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आचार्य रामाधार पाण्डेय,, अटल,,
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