- अगला आदेश जारी होने तक अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के अपने घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत
मणिपुर में नई सरकार के पदभार संभालने के बाद उखरुल जिले में अशांति फैल गई। उखरूल जिला के अधिकारियों ने बताया कि आज तड़के कथित तौर पर हथियारबंद उग्रवादियों ने कई घरों में आग लगा दी।यह हिंसा तंगखुल नगा समुदाय के एक व्यक्ति पर हुए कथित हमले के बाद उपजे तनाव का परिणाम बताई जा रही है। प्रशासन ने स्थिति को अनियंत्रित होते देख जिले में तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा (Curfew) लागू कर दी है। उखरुल जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि लिटन गांव में तांगखुल और कुकी समुदाय के सदस्यों के बीच शांति और सार्वजनिक व्यवस्था के भंग होने की आशंका है।आदेश में यह भी कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, “मैं, आशीष दास, जिला मजिस्ट्रेट, उखरुल, बीएनएसएस, 2023 की धारा 163 की उप-धारा 1 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए आदेश देता हूं कि 8 फरवरी 2026 को शाम 7 बजे से अगला आदेश जारी होने तक अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के अपने घर से बाहर निकलने और कोई भी अन्य कार्य या गतिविधि जो कानून-व्यवस्था को बाधित कर सकती है, पर प्रतिबंध रहेगा।”
आदेश में यह भी कहा गया कि यह प्रावधान सरकारी अफसरों और सुरक्षा बलों पर लागू नहीं होगा।तांगखुल समुदाय के सदस्य पर हुआ हमला: अफसरों ने बताया कि क्षेत्र में तनाव शनिवार रात से बढ़ रहा था, जब तांगखुल समुदाय के एक सदस्य पर लिटन गांव में सात से आठ लोगों ने हमला किया था। इस मामले को पीड़ित पक्ष और लिटन सारैखोंग के प्रमुख ने आपसी सहमति से परंपरागत तरीकों से सुलझाने का निर्णय लिया था और रविवार को बैठक निर्धारित की गई थी लेकिन यह बैठक नहीं हुई क्योंकि पीड़ित का परिवार नहीं आया।इसके बजाय सिकिबुंग के कुछ ग्रामीणों ने लिटन सारैखोंग के प्रमुख के घर पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने वापस जाते समय लिटन पुलिस थाने के पास से गुजरते हुए सात गोलियां चलायीं।
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि रविवार शाम को जिले के लिटान गांव में दो आदिवासी समूहों ने पथराव किया, जिसके कारण प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी।उन्होंने बताया कि मध्यरात्रि के आसपास लिटान सारेइखोंग में तंगखुल नगा समुदाय के कई मकानों में कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों द्वारा आग लगा दी गई। पास के ही एक इलाके में कुकी समुदाय के कुछ लोगों के मकानों को भी जला दिया गया। तंगखुल मणिपुर की सबसे बड़ी नगा जनजाति है। लितान सारेइखोंग कुकी बहुल गांव है। जिले के एक अधिकारी ने कहा, ''नुकसान का आकलन किया जा रहा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।'' सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फुटेज में हथियारबंद लोग गांव में मकानों और वाहनों को आग लगाते हुए और उग्रवादी अत्याधुनिक हथियारों से हवा में गोली चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही को रोकने के लिए महादेव, लंबुई और शांगकाई तथा लिटान की ओर जाने वाले अन्य क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
उन्होंने बताया कि रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने लिटान सारेइखोंग गांव में आपस में भिड़े दो आदिवासी समूहों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है। जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा।बीती रात लिटान गांव में सात से आठ लोगों द्वारा तंगखुल नगा समुदाय के एक सदस्य पर कथित तौर पर हमला किए जाने के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई। अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और दोनों पक्ष आपसी सहमति से पारंपरिक तरीकों से समस्या का समाधान करने पर सहमत हुए थे। रविवार को एक बैठक निर्धारित की गई थी लेकिन बैठक नहीं हुई। उन्होंने बताया कि इसके बजाय पास के सिकिबुंग गांव के ग्रामीणों के एक समूह ने लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर कथित तौर पर हमला किया। ऐसी जानकारी है कि ग्रामीणों ने लिटान पुलिस थाने के आसपास से गुजरते समय सात गोलियां भी चलाईं। तनावपूर्ण शांति के बीच अलर्ट:जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति वर्तमान में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। संदिग्धों की आवाजाही रोकने के लिए लिटान की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर नाकेबंदी कर दी गई है। तंगखुल (मणिपुर की सबसे बड़ी नगा जनजाति) और कुकी समुदाय के बीच इस झड़प ने राज्य में पहले से ही नाजुक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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