- ये आतंकी चोरी छुपे नहीं बल्कि पहुंच रहे हवाई मार्ग से खुलासे के बाद सीमांत मे चौकसी
- ज़हीर ने 'इस्लाम के लिए कुर्बानी', 'सेक्युलर और लिबरल ताकतों' के खिलाफ एकता और कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की थी मांग
- बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर भारत को अस्थिर करना चाहता लश्कर आतंकी
बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाला है। चुनाव से पहले देश में भीषण हिंसा की चेतावनी की कई रिपोर्ट सामने आई हैं। इस बीच ताजा अपडेट में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकियों ने पाकिस्तान से बांग्लादेश में एंट्री की है।पाकिस्तान से एक चौंकाने वाले खुलासे में एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट बीजी-342 में कम से कम चार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी सवार थे। यह विमान इस हफ्ते की शुरुआत में कराची से ढाका पहुंचा था।यह विमान दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद आया था। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच फिर से हवाई सेवा शुरू होने को लेकर काफी बवाल हुआ।
कराची से आई ‘मौत की फ्लाइट’
रिपोर्ट के मुताबिक, बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट (BG-342) ने कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी और 30 जनवरी को सुबह 4:20 बजे ढाका लैंड हुई। इस फ्लाइट में कुल 113 पैसेंजर थे। इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट साहिदुल हसन खोकोन का दावा है कि पैसेंजर लिस्ट में 4 लोग लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव थे. इनकी पहचान उनके ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स से हुई है. हैरानी की बात यह है कि 14 साल बाद जैसे ही ढाका-कराची फ्लाइट शुरू हुई, उसके कुछ ही दिनों के भीतर आतंकी गतिविधियां शुरू हो गईं।
यूनुस सरकार की ‘सीक्रेट डील’? आरोप लग रहे हैं कि मोहम्मद यूनुस की सरकार ने पाकिस्तान के साथ कुछ बिना बताए समझौते किए हैं। पाकिस्तानी मिलिट्री और इंटेलिजेंस के लोगों को स्पेशल वीजा और बिना रोक-टोक एंट्री दी जा रही है। बांग्लादेशी पोर्ट्स पर आने वाले पाकिस्तानी जहाजों और कार्गो की जांच में भारी ढील दी गई है।।जानकारों का कहना है कि यह ‘लापरवाही’ नहीं बल्कि जानबूझकर उठाया गया कदम है, ताकि कट्टरपंथी ताकतों को मजबूती मिले।यह आरोप इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट साहिदुल हसन खोकोन ने लगाया था। लोकल मीडिया ने बताया कि इस घटना से यूनुस सरकार की बांग्लादेश में आतंकवादी घुसपैठ की खतरनाक मदद और उसके कथित इस्लाम समर्थक और पाकिस्तान को खुश करने वाले रवैये का पता चलता है। हाफिज सईद के गुर्गे और भारत पर खतरा:
यह खतरा सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के लिए भी खतरे की घंटी है।रिपोर्ट बताती है कि लश्कर के फाउंडर हाफिज सईद का करीबी इब्तिसाम इलाही जहीर लगातार बांग्लादेश के दौरे कर रहा है। उसने भारत सीमा से सटे जिलों (रंगपुर, राजशाही, चपैनवाबगंज) का दौरा किया। वहां ‘कश्मीर के पाकिस्तान में विलय’ और जिहाद के भड़काऊ भाषण दिए। यूनुस के सत्ता में आने के बाद जहीर दो बार (अक्टूबर 2025 और फरवरी 2025) बांग्लादेश आ चुका है।।मकसद साफ है-भारत के पूर्वी और नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में अस्थिरता फैलाना और लश्कर का नया नेटवर्क खड़ा करना।
शनिवार को X पर एक पोस्ट में, खोकोन ने कहा कि बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG-342 कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुई और 30 जनवरी को सुबह 4.20 बजे ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरी, जिसमें कुल 113 यात्री सवार थे।
खोकोन के मुताबिक, पैसेंजर्स में कुछ लोग ऐसे थे जिन्हें उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव्स के तौर पर पहचाना, जिनके नाम और कथित जुड़ाव उनके ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स में लिखे थे।
उन्होंने दावा किया कि यह मौजूदा सरकार के तहत लापरवाही या जानबूझकर कुछ न करने की वजह से हुई बड़ी सिक्योरिटी कमियों की ओर इशारा करता है।खोकोन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'लश्कर-ए-तैयबा के मिलिटेंट्स का पाकिस्तान से बांग्लादेश आना,' उन्होंने ऐसी तस्वीरें शेयर कीं जिनमें कथित ऑपरेटिव्स की पासपोर्ट डिटेल्स दिख रही थीं।
यह दावा यूनुस सरकार के पिछले हफ्ते ढाका और कराची के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू करने के फैसले के तुरंत बाद सामने आया है, जिससे 14 साल के गैप के बाद एयर रूट बहाल हुआ है, ऐसा बांग्लादेश के बड़े मीडिया आउटलेट द डेली रिपब्लिक की एक रिपोर्ट में कहा गया है।
कहा जाता है कि यह कदम पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बिना बताए हुए समझौतों के बाद उठाया गया और इसमें वॉटर कैनन सैल्यूट समेत सेरेमोनियल इशारे किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों ने आरोप लगाया है कि इस रूट को फिर से शुरू करने के साथ-साथ कई विवादित रियायतें भी दी गईं, जिनमें पाकिस्तानी सरकार के अधिकारियों, सेना के लोगों और इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स के लिए खास वीज़ा छूट और खास अधिकार, बांग्लादेशी पोर्ट्स पर पाकिस्तानी जहाजों के लिए इंस्पेक्शन के नियमों में ढील, और दोनों देशों के बीच होने वाले लेन-देन की जांच में ढील शामिल है।
मौजूदा आरोपों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि अब आम लोगों की उड़ानों का इस्तेमाल आतंकवादी मूवमेंट के लिए कवर के तौर पर किया जा सकता है। लश्कर-ए-तैयबा, एक UN-मान्यता प्राप्त आतंकवादी संगठन है जो 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों और कई दूसरे हमलों के लिए ज़िम्मेदार है, और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के सपोर्ट से बड़े पैमाने पर काम करता है।
द डेली रिपब्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश में इसकी मौजूदगी के आरोप मौजूदा सरकार के तहत बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों की एक बड़ी कहानी में फिट बैठते हैं।
इस ग्रुप ने पहले दावा किया था कि उसके सदस्यों ने जुलाई-अगस्त 2024 की अशांति में भूमिका निभाई थी, जिसके कारण अवामी लीग सरकार को हटाना पड़ा था। इसके बाद, ऐसी खबरें आईं कि सैयद ज़ियाउल हक और अबुल कलाम आज़ाद, उर्फ़ बच्चू रज़ाकर समेत भगोड़े जिहादी और सज़ायाफ़्ता अपराधी पाकिस्तानी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके बांग्लादेश में घुसे।
एनालिस्ट्स के बताए एक और डेवलपमेंट में, LeT के फाउंडर हाफ़िज़ सईद के करीबी सहयोगी और पाकिस्तान के मरकज़ी जमीयत अहल-ए-हदीस के जनरल सेक्रेटरी इब्तिसाम इलाही ज़हीर ने अक्टूबर 2025 में कई हफ़्तों का बांग्लादेश दौरा किया, रिपोर्ट में कहा गया।
अपने रहने के दौरान, ज़हीर ने कथित तौर पर ढाका और भारत के साथ बॉर्डर पर कई सेंसिटिव ज़िलों का दौरा किया, जिनमें चपैनवाबगंज, नाचोले, रंगपुर, लालमोनिरहाट, निलफामारी, जॉयपुरहाट और राजशाही शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ज़हीर ने 'इस्लाम के लिए कुर्बानी', 'सेक्युलर और लिबरल ताकतों' के खिलाफ एकता और कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की मांग करते हुए भाषण दिए थे। साथ ही, वह अहल-ए-हदीस बांग्लादेश से जुड़े लोकल कट्टरपंथी ग्रुप्स और असदुल्लाह अल ग़ालिब जैसे लोगों से भी मिले थे।
यूनुस के सत्ता में आने के बाद यह उनका दूसरा दौरा था, इससे पहले फरवरी 2025 में उनका दौरा हुआ था। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इस तरह की 'धार्मिक पहुंच' वाली गतिविधियां LeT के क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क को फिर से बनाने, कमजोर बॉर्डर इलाकों में भर्ती करने और भारत के पूर्वी बॉर्डर और उत्तर-पूर्वी राज्यों को टारगेट करके ऑपरेशन की संभावित प्लानिंग के लिए एक फ्रंट के तौर पर काम कर सकती हैं।
द डेली रिपब्लिक की रिपोर्ट में कहा गया है कि आलोचकों ने आगे आरोप लगाया है कि यूनुस एडमिनिस्ट्रेशन की पाकिस्तान के इंटेलिजेंस सिस्टम के साथ बढ़ती करीबी, घरेलू सिक्योरिटी सिस्टम के कमजोर होने, पाकिस्तानी कार्गो इंस्पेक्शन में छूट और वीज़ा स्क्रीनिंग प्रोसेस में कमी ने असल में बांग्लादेश को जिहादी ग्रुप्स के लिए एक परमिसिव ट्रांजिट ज़ोन में बदल दिया है। उन्होंने दावा किया कि LeT, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, तालिबान, अंसार अल-इस्लाम जैसे संगठन और बुरे मिलिट्री वाले लोग सरकार की अलग-अलग तरह की सहनशीलता के साथ काम कर रहे होंगे।
12 फरवरी के चुनाव पास आने के साथ, विपक्ष की आवाज़ों ने कथित आतंकवादी एंट्री को सुधार के वादों के साथ धोखा बताया है, और चेतावनी दी है कि कट्टरपंथ और आतंकी नेटवर्क को आगे बढ़ने दिया जा रहा है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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