पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव से कुछ सप्ताह पहले झापा निर्वाचन क्षेत्र में जबरदस्त सियासी मुकाबला हो रहा है। इस सीट पर काठमांडू के पूर्व महापौर बालेंद्र शाह ‘बालेन’ का मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से है। नेपाल का झापा जिला जो सिलीगुड़ी से मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर है। यह क्षेत्र बंगाल बिहार का वह सीमावर्ती क्षेत्र है जहां से देश की राजनीति का भविष्य तय होता है। मशहूर रैपर से नेता बने और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन कोशी प्रांत के झापा-पांच निर्वाचन क्षेत्र पहुंचे, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के अध्यक्ष ओली दो दिन पहले ही यहां घर-घर जाकर प्रचार शुरू कर चुके हैं। ओली ने झापा जिले से अब तक सात में से 6 बार संसदीय चुनाव जीते हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार को भारी अंतर से हराया था। नेपाल की राजनीति पर नजर रखने वाले वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता चरण प्रसाई ने कहा- 'इस बार ओली के लिए मुकाबला ज्यादा कठिन होगा. उन्हें पिछले साल सितंबर में 'जेन-जी' आंदोलन के दौरान इस्तीफा देना पड़ा था.' एक बार फिर से वे लोकतांत्रिक चुनावों के जरिये मैदान में हैं और उनका मुकाबला पीएम पद के उम्मीदवार बालेन शाह से है।
ओली और बालेन के बीच टक्कर: आरएसपी के मुताबिक, 'रविवार को बालेन ने कम से कम 12 जगहों का दौरा किया और घर-घर जाकर प्रचार किया।' बालेन ने पहले ही पारंपरिक दलों को सीधी चुनौती देने और प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, इसलिए वह ओली के गढ़ माने जाने वाले झापा-पांच से खड़े हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज हो रहा है, झापा जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. हालांकि इस सीट से अन्य राजनीतिक दलों के भी उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला ओली और बालेन के बीच माना जा रहा है. अन्य उम्मीदवारों में नेपाली कांग्रेस से मंधारा पौडेल, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी से रणजीत तमांग और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी से लक्ष्मी संगरौला शामिल हैं।
कैसे सत्ता से हटे केपी ओली?: केपी ओली पिछले चुनावों में निर्वाचित प्रधानमंत्री थे. उन्हें नई जेनरेशन के आंदोलनों के बाद अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी लेकिन वे देश के अंदर ही रहे. आपको बता दें कि 'जेन जी' उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है और जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है. भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में 'जेन-जेड' समूह के हिंसक प्रदर्शन के बाद 9 सितंबर को ओली ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद 12 सितंबर को सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने राष्ट्रपति से प्रतिनिधि सभा भंग कर 5 मार्च को आम चुनाव कराने की सिफारिश की। ( नेपाल बॉर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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